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चुनावी रण: इत्रनगरी में भाजपा के सामने सपा-बसपा ने नहीं खोले पत्ते, कांग्रेस खेमे में भी सन्नाटा

Sun, 10 Mar 2024 06:14 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 10 Mar 2024 06:14 PM IST
सार

लोकसभा चुनाव में भाजपा को चुनौती देने के लिए प्रतिद्वंद्वी पार्टियों की ओर से अभी अपने पत्ते नहीं खोले गए हैं। हालांकि चर्चा यही है कि अगले कुछ दिनों में विपक्ष की ओर से भी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया जाएगा।

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kannauj lok sabha election 2024, No one opened cards in front of BJP
कन्नौज द्वार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव दंगल में उतरने वाले सभी दावेदारों का नाम सामने न आने से सियासी तस्वीर अभी धुंधली है। यहां सबसे पहले उम्मीदवार के नाम का एलान कर भाजपा ने इस मोर्चे पर जरूर बढ़त बनाई है। ऐसे में सभी की निगाहें अब मुख्य विपक्षी पार्टियां सपा और बसपा पर टिकी हैं।

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इत्रनगरी में इस बार का सियासी दंगल दिलचस्प होने के आसार हैं। पिछले दो दशक के बाद यह पहली बार होगा कि भाजपा यहां कुर्सी बचाने के लिए और सपा वापस हासिल करने के लिए एक-दूसरे के आमने-सामने होगी। बसपा ने अब तक लोकसभा चुनाव में कामयाबी हासिल नहीं की है, इसलिए उसके पास यहां खोने को कुछ नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा संग गठबंधन के तहत मैदान से बाहर रहने वाली बसपा सियासी मजबूत करने और जनाधार को बढ़ाने की जुगत में है। लोकसभा चुनाव वर्ष 2019 में मिली कामयाबी को दोहराने के लिए भाजपा ने फिर से पिछली बार के विजेता और मौजूदा सांसद सुब्रत पाठक पर ही दांव लगाया है।

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टिकट के ऐलान के बाद से भाजपा का खेमा चुनावी तैयारी में जुट गया है। सांसद के स्वागत के लिए जुलूस निकाल कर कार्यकर्ताओं के माध्यम से तैयारी का प्रदर्शन भी किया जा चुका है। इसके उलट भाजपा को चुनौती देने के लिए प्रतिद्वंद्वी पार्टियों की ओर से अभी अपने पत्ते नहीं खोले गए हैं। हालांकि चर्चा यही है कि अगले कुछ दिनों में विपक्ष की ओर से भी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया जाएगा।

सपा से अखिलेश के लड़ने के आसार
उम्मीद यही जताई जा रही है कि समाजवादी पार्टी इत्रनगरी में सिमटी सियासी जमीन को फिर से मजबूत करके गढ़ को फतह करने के लिए पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ही यहां से ताल ठोकेंगे। वो खुद कई बार यहां इसका इशारा दे चुके हैं। हालांकि पिछले दिनों उन्होंने बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ के साथ ही कन्नौज संसदीय क्षेत्र का भी प्रभारी बनाकर अलग ही चाल चली है। समझा जा रहा है कि धर्मेंद्र यादव का नाम आगे करके वो कार्यकर्ताओं का मन टटोल रहे हैं।
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बसपा की भूमिका पर सभी की निगाह
कन्नौज में बसपा की भूमिका आम लोगों के साथ ही प्रतिद्वंद्वी सियासी पार्टियों की भी नजर है। बसपा से कौन चुनाव लड़ेगा इसकी तस्वीर भी अभी धुंधली है। समझा जा रहा है कि पार्टी अलग-अलग बिरादरी के उम्मीदवारों पर मंथन कर रही है। वो पिछड़ा वर्ग के मजबूत चेहरे की तलाश में है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं के बीच पैठ रखने वाले इस वर्ग के चेहरे पर भी मंथन हो रहा है। पिछले चुनावों में बसपा यहां स्वर्ण और पिछड़ा वर्ग के अलावा मुस्लिम चेहरे पर भी दांव लगा चुकी है, लेकिन कामयाबी नहीं मिली है।

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