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अपोलो: मजाक किया है, पोल खोलो
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 03 Feb 2015 02:39 AM IST
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मुंबई जैसे शहर में छह हजार रुपये प्रति माह तनख्वाह पर नौकरी और उसके लिए भी दस हजार रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करने की शर्त। काबिलियत का कोई पैमाना नहीं।
लिखित परीक्षा ऐसे जैसे पिकनिक हो रही हो। सब हंसी- मजाक करते हुए एक-दूसरे से पूछ-पूछ कर प्रश्न हल कर रहे थे। ये बात कुछ हजम नहीं हुई। यह मजाक हुआ सोमवार को अपोलो इंस्टीट्यूट सरसौल में सैकड़ों स्टूडेंट्स के साथ। हमारा उद्देश्य किसी कंपनी या इंस्टीट्यूट पर आरोप लगाना नहीं है।
‘अमर उजाला संवाददाता’ भी वहां परीक्षार्थी बनकर गया और इस मजाक का साक्षी बना। हम जैसा देखा, वैसा पेश कर रहे हैं। हालात देखकर पाठक अंदाजा लगा सकते हैं।
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इसके साथ ही अभिभावकों के लिए एक अलर्ट भी है कि जॉब तलाशते वक्त बच्चों के संपर्क में रहें, उनसे पूछताछ करते रहें वर्ना कोई छह हजार में मुंबई पहुंचा देगा।
इंप्लायमेंट एक्सचेंज के सहयोग से यह जॉब फेयर लगा था। दोपहर 2 बजे संवाददाता अपोलो इंस्टीट्यूट सरसौल पहुंचा। रिसेप्शन पर पूछने पर बताया गया कि पहली मंजिल पर लिखित परीक्षा की जा रही है।
ऊपर पहुंचने पर मैडम ने यह कहते हुए एक फार्म दिया कि बहुत देर हो गई है लेकिन जल्दी से फार्म भर दो और नीचे जाकर एक नंबर कमरे में परीक्षा दे दो।
कमरे में घुसते ही देखा कि परीक्षा चल रही है लेकिन सभी स्टूडेंट एक दूसरे से आराम से डिस्कस कर पेपर हल कर रहे थे। परीक्षा के नाम पर मजाक हो रहा था। कोई निगरानी नहीं, नकल पर कोई रोक-टोक नहीं।
लिखित परीक्षा के थोड़ी देर बाद रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया। इसके बाद इंटरव्यू के लिए चयन हुआ। लोगों की धड़कनें तेज हो रहीं थीं कि इंटरव्यू में क्या सवाल पूछे जाएंगे।
लेकिन यह क्या, यहां तो इंटरव्यू में सिर्फ नाम, पता, मोबाइल नंबर और ईमेेल आईडी लेकर ये कहा गया कि अगर आपको नौकरी करनी है तो दस हजार रुपये जमा करने होंगे।
मुंबई में छह हजार रुपये प्रति माह पर नौकरी दी जाएगी। यह सुनकर स्टूडेंट्स का मुंह उतर गया। सब यही कहते हुए बाहर निकल आए कि छह हजार रुपए की नौकरी के लिए दस हजार रुपए जमा क्यों करे?
कहीं कोई ठगी तो नहीं हो रही। दस हजार देने केबाद यह भी भरोसा नहीं कि काम क्या कराएंगे। कहीं ऐसा न हो कि मुंबई ले जाकर मजदूरी करनी पड़े। वैसे भी मुंबई जैसे शहर में छह हजार रुपये में क्या करेंगे।
आरके वर्मा, टीचर, अपोलो इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाजी
- नौकरी के नाम पर दस हजार रुपये क्यों लिए जा रहे हैं। ऐसा तो कहीं नहीं होता?
ऐसा नहीं है, कौन कह रहा कि पैसा लिया जा रहा है।
-इंटरव्यू लेने वालों ने बताया कि ज्वाइनिंग से पहले पैसा जमा करना पड़ेगा?
झूठ बोल रहे हैं, आप के पास क्या सुबूत हैं। राह चलता आदमी आप को बता दे तो आप उस पर भी विश्वास कर लोगे क्या।
-मेरे साथी अर्पित गुप्ता ने भी इंटरव्यू दिया। उससे भी पैसे मांगे गए हैं?
पैसा लिया जाएगा, लेकिन वह सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा होगा। आखिर हम समाजसेवा का काम भी कर रहे हैं। अगर पैसा मांगा जा रहा है तो इसमें गलत क्या है।
-जब लड़कियों के लिए नौकरी थी ही नहीं तो आपने उन्हें सुबह से शाम तक क्यों रोका?
किसी को बुलाया नहीं गया था। जो भी स्वेच्छा से आ गया उसे परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया गया।
(इस खबर के संबंध में इंप्लायमेंट एक्सचेंज के उप निदेशक (सेवायोजन) राजीव कुमार यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ बताता रहा)
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लिखित परीक्षा ऐसे जैसे पिकनिक हो रही हो। सब हंसी- मजाक करते हुए एक-दूसरे से पूछ-पूछ कर प्रश्न हल कर रहे थे। ये बात कुछ हजम नहीं हुई। यह मजाक हुआ सोमवार को अपोलो इंस्टीट्यूट सरसौल में सैकड़ों स्टूडेंट्स के साथ। हमारा उद्देश्य किसी कंपनी या इंस्टीट्यूट पर आरोप लगाना नहीं है।
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‘अमर उजाला संवाददाता’ भी वहां परीक्षार्थी बनकर गया और इस मजाक का साक्षी बना। हम जैसा देखा, वैसा पेश कर रहे हैं। हालात देखकर पाठक अंदाजा लगा सकते हैं।
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इसके साथ ही अभिभावकों के लिए एक अलर्ट भी है कि जॉब तलाशते वक्त बच्चों के संपर्क में रहें, उनसे पूछताछ करते रहें वर्ना कोई छह हजार में मुंबई पहुंचा देगा।
इंप्लायमेंट एक्सचेंज के सहयोग से यह जॉब फेयर लगा था। दोपहर 2 बजे संवाददाता अपोलो इंस्टीट्यूट सरसौल पहुंचा। रिसेप्शन पर पूछने पर बताया गया कि पहली मंजिल पर लिखित परीक्षा की जा रही है।
ऊपर पहुंचने पर मैडम ने यह कहते हुए एक फार्म दिया कि बहुत देर हो गई है लेकिन जल्दी से फार्म भर दो और नीचे जाकर एक नंबर कमरे में परीक्षा दे दो।
कमरे में घुसते ही देखा कि परीक्षा चल रही है लेकिन सभी स्टूडेंट एक दूसरे से आराम से डिस्कस कर पेपर हल कर रहे थे। परीक्षा के नाम पर मजाक हो रहा था। कोई निगरानी नहीं, नकल पर कोई रोक-टोक नहीं।
लिखित परीक्षा के थोड़ी देर बाद रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया। इसके बाद इंटरव्यू के लिए चयन हुआ। लोगों की धड़कनें तेज हो रहीं थीं कि इंटरव्यू में क्या सवाल पूछे जाएंगे।
लेकिन यह क्या, यहां तो इंटरव्यू में सिर्फ नाम, पता, मोबाइल नंबर और ईमेेल आईडी लेकर ये कहा गया कि अगर आपको नौकरी करनी है तो दस हजार रुपये जमा करने होंगे।
मुंबई में छह हजार रुपये प्रति माह पर नौकरी दी जाएगी। यह सुनकर स्टूडेंट्स का मुंह उतर गया। सब यही कहते हुए बाहर निकल आए कि छह हजार रुपए की नौकरी के लिए दस हजार रुपए जमा क्यों करे?
कहीं कोई ठगी तो नहीं हो रही। दस हजार देने केबाद यह भी भरोसा नहीं कि काम क्या कराएंगे। कहीं ऐसा न हो कि मुंबई ले जाकर मजदूरी करनी पड़े। वैसे भी मुंबई जैसे शहर में छह हजार रुपये में क्या करेंगे।
आरके वर्मा, टीचर, अपोलो इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाजी
- नौकरी के नाम पर दस हजार रुपये क्यों लिए जा रहे हैं। ऐसा तो कहीं नहीं होता?
ऐसा नहीं है, कौन कह रहा कि पैसा लिया जा रहा है।
-इंटरव्यू लेने वालों ने बताया कि ज्वाइनिंग से पहले पैसा जमा करना पड़ेगा?
झूठ बोल रहे हैं, आप के पास क्या सुबूत हैं। राह चलता आदमी आप को बता दे तो आप उस पर भी विश्वास कर लोगे क्या।
-मेरे साथी अर्पित गुप्ता ने भी इंटरव्यू दिया। उससे भी पैसे मांगे गए हैं?
पैसा लिया जाएगा, लेकिन वह सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा होगा। आखिर हम समाजसेवा का काम भी कर रहे हैं। अगर पैसा मांगा जा रहा है तो इसमें गलत क्या है।
-जब लड़कियों के लिए नौकरी थी ही नहीं तो आपने उन्हें सुबह से शाम तक क्यों रोका?
किसी को बुलाया नहीं गया था। जो भी स्वेच्छा से आ गया उसे परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया गया।
(इस खबर के संबंध में इंप्लायमेंट एक्सचेंज के उप निदेशक (सेवायोजन) राजीव कुमार यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ बताता रहा)