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जगद्गुरू रामभद्राचार्य ने पशु बलि, शराबी ब्राह्मण और गांजा पीने वालों को लेकर कही ये बड़ी बात

Wed, 17 Oct 2018 08:11 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 17 Oct 2018 08:11 AM IST
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Jagadguru Rambhadracharya statement about liquor and cigarette
मां कालिका देवी भूतेश्वर मंदिर में रामकथा का सातवां दिन
जगद्गुरू रामभद्राचार्य ने उन्नाव में कहा कि आज के पिता अपने पुत्रों से अपनी बात मनवाने के लिए परेशान हैं। जबकि दशरथजी चाहते हैं कि रामजी मेरी बात न माने और वन न जाएं। तुलसी पीठाधीश्वर ने कहा कि तमाम गलत कुरीतियों ने बेड़ा गर्क किया है। देवी मंदिरों में बकरों की बलि प्रथा पूर्णता शास्त्र विरुद्ध है।
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कभी मां नहीं चाहती कि मेरे पुत्र की ही बलि दी जाए। लोग अपनी रसना की तृप्ति के लिए इस तरह से कृत्य को धार्मिक बताते हैं। उन्होंने शिवजी के भक्तों द्वारा गांजा, चिलम पीने वालों को भी आड़े हाथों लिया। कहा कि इस तरह के लोग अपना घर बर्बाद करके दूसरे का घर बर्बाद करने में लगे हुए हैं।
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वहीं कहा कि भक्त वह होता है जिसको भगवान भजते हैं। उन्होंने गीत सुनाते हुए कहा कि सदा जिनके चरित्रों को गाके न प्रभु अघाते हैं, जिसे भगवान रटते हैं उसे ही भक्त कहते हैं। वहीं मुख्यमंत्री द्वारा इलाहाबाद के फिर से प्रयागराज नाम बदले जाने की जगद्गुरू ने खासी सराहना की। 
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रामकथा को माया मोह से विमुक्त करने वाली बताया

Jagadguru Rambhadracharya statement about liquor and cigarette
राम वनवास के बाद भरत-राम मिलन का किया वर्णन
उन्नाव के कालिका देवी भूतेश्वर महादेव प्रांगण में चल रही रामकथा के सातवें दिन जगद्गुरू रामभद्राचार्य ने रामकथा को माया मोह से विमुक्त करने वाली बताया। उन्होंने राम वनवास के बाद भरत और राम मिलन का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राम से प्रेम करने वाला अछूत नहीं चाहे वह किसी वर्ण जाति का हो। बोले, मदिरादि सेवन करने वाला ब्राह्मण नहीं हो सकता है। स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि रामरूपी कथा ने दिगपाल वरुण को भी तेज प्रदान किया।

वरुण मनुष्य को अपने बंधन में बांधना तो जानते हैं लेकिन मुक्त करना नहीं जानते। भरतजी की कथा तो बंधन से विमुक्त करने वाली है। बोले कि जनकजी अपनी पत्नी सुनैना से कहते हैं कि सावधान सुन समुखि सुलोचनि, रामकथा कथा भव बंध विमोचनि। रामभद्राचार्य ने कहा कि राम वनवास होने के बाद अपने नाना के यहां से वापस लौटे भरत ने जब घर आकर देखा कि पिता मरण हो चुका है और राम वन चले गए हैं तो उन्होंने राजगद्दी लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद वह राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट जाते हैं। उन्होंने चित्रकूट जाने को जी चाहता है, चित्रकूटजी में रामजी रमत हैं। राम में रम जाने को जी चाहता है। सिया दरस पाने को जी चाहता है भजन सुनाकर कथा श्रवण करने वालों को आनंद प्रदान किया।

उन्होंने भरतजी को गुणातीत बताते हुए कहा कि भरतजी बंधन के 6 भेदों से परे हैं। सुखा शक्ति, ज्ञाना शक्ति, कर्माशक्ति, प्रमादाशक्ति, निद्रासक्ति व आलस्यासक्ति से भरतजी से कोसों दूर हैं। बोले कि जब प्रमादासक्ति समाप्त हो जाती है तो व्यक्ति गुणातीत हो जाता है। जो प्रमाद नहीं करता वह गुरु गोविंद का प्रसाद पा लेता है।

स्वामी रामभद्राचार्यजी ने चित्रकूट में राम भरत मिलन का मार्मिक वर्णन कर श्रोताओं की आंखों में आंसू ला दिए। कथा श्रवण करने वालों में प्रमुख रूप से जितेंद्र पांडे उर्फ  कल्लू दीपक पांडे, विमल द्विवेदी, उपजिलाधिकारी प्रभुदयाल,क्षेत्राधिकारी बीघापुर स्वतंत्र सिंह, गोविंद नारायण शुक्ला, प्रधानाचार्य पंकज सिंह, सोहनलाल त्रिवेदी, पवन शुक्ला भी मौजूद रहे। 

 
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