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Kanpur News: आईवीआरआई ने सीरम नमूने लौटाए, मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने मांगे
Wed, 01 Apr 2026 02:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 01 Apr 2026 02:03 AM IST
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कानपुर देहात। रनियां के खानचंद्रपुर में मवेशियों के शरीर में क्रोमियम या मरकरी की मौजूदगी की जांच के लिए गए सीरम नमूने आईवीआरआई ने लौटा दिए। तर्क दिया कि अब सीरम से हानिकारक तत्वों की जांच नहीं की जाती है। आईवीआरआई (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) ने अब मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत (लिवर) के नमूने मांगे हैं।
औद्योगिक क्षेत्र रनियां से सटा खानचंद्रपुर क्रोमियम प्रभावित है। यहां छह फैक्टरियों का 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप रहा है। बीते साल ही यह कचरा उठाया जा सका है। इससे पहले भूजल प्रभावित हो चुका है। क्रोमियम डंप होने से मिट्टी की ऊपरी सतह भी दूषित हो गई है। दूषित पानी पीने से लोगों में त्वचा, हड्डी, पेट व अनिंद्रा आदि के लक्षण दिखने लगे हैं। एनजीटी की सख्ती पर स्वास्थ्य विभाग नियमित शिविर लगाकर लोगों की जांच करा रहा है। वहीं रैंडम आधार पर लोगों के रक्त के नमूनों की जांच भी कराई जा रही है।
इधर क्रोमियम युक्त पानी से उगाया हरा चारा खाने व यह दूषित पानी पीने से दुधारू मवेशियों के शरीर में घातक तत्वों के पहुंचने और दूध के जरिये इंसानों में इनके पहुंचने की आशंका जताई गई थी। मार्च के पहले पखवाड़े में 14 मवेशियों के खून नमूना से सीरम अलग किया गया था इसे पिछले सप्ताह बरेली स्थित आईवीआरआई भेजा गया, मगर वहां से सीरम नमूने लौटा दिए गए। हानिकारक तत्वों की जांच के लिए मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने मांगे गए हैं।
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वर्जन.......
मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने भेजे जाएंगे
सरवनखेड़ा पशुचिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डॉ. अंकुर प्रियदर्शी को मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने लेने के निर्देश दिए गए हैं। आईवीआरआई ने सीरम नमूने से क्रोमियम या मरकरी तत्वों की जांच अब न किए जाने का तर्क दिया है। इसके साथ ही मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने मांगे हैं। खानचंद्रपुर व आसपास के गांवों में अब मवेशियों के मरने पर यह नमूने लेकर भेजे जाएंगे। - डॉ. सुबोध कुमार बर्नवाल, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी कानपुर देहात।
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मिट्टी की ऊपरी सतह के उपचार पर निर्णय अटका
कानपुर देहात। खानचंद्रपुर में करीब बीस साल से अधिक समय तक खुले में 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप रहा। बीते साल ही कचरा उठाया जा सका है। इधर डंप स्थल पर मिट्टी की ऊपरी परत भी क्रोमियम प्रभावित हो गई है। इसका उपचार करना है, लेकिन इसके लिए कारगर पहल नहीं हो सकी है। सीएसए कानपुर से हरियाली उगाने के लिए परामर्श लिया गया था। सीएसए ने करीब दो करोड़ रुपये की जरूरत बताई इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग कोई निर्णय नहीं ले सका है। वन विभाग ने रुचि दिखाई थी लेकिन प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने उनपर विश्वास नहीं जताया। (संवाद)
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औद्योगिक क्षेत्र रनियां से सटा खानचंद्रपुर क्रोमियम प्रभावित है। यहां छह फैक्टरियों का 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप रहा है। बीते साल ही यह कचरा उठाया जा सका है। इससे पहले भूजल प्रभावित हो चुका है। क्रोमियम डंप होने से मिट्टी की ऊपरी सतह भी दूषित हो गई है। दूषित पानी पीने से लोगों में त्वचा, हड्डी, पेट व अनिंद्रा आदि के लक्षण दिखने लगे हैं। एनजीटी की सख्ती पर स्वास्थ्य विभाग नियमित शिविर लगाकर लोगों की जांच करा रहा है। वहीं रैंडम आधार पर लोगों के रक्त के नमूनों की जांच भी कराई जा रही है।
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इधर क्रोमियम युक्त पानी से उगाया हरा चारा खाने व यह दूषित पानी पीने से दुधारू मवेशियों के शरीर में घातक तत्वों के पहुंचने और दूध के जरिये इंसानों में इनके पहुंचने की आशंका जताई गई थी। मार्च के पहले पखवाड़े में 14 मवेशियों के खून नमूना से सीरम अलग किया गया था इसे पिछले सप्ताह बरेली स्थित आईवीआरआई भेजा गया, मगर वहां से सीरम नमूने लौटा दिए गए। हानिकारक तत्वों की जांच के लिए मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने मांगे गए हैं।
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मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने भेजे जाएंगे
सरवनखेड़ा पशुचिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डॉ. अंकुर प्रियदर्शी को मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने लेने के निर्देश दिए गए हैं। आईवीआरआई ने सीरम नमूने से क्रोमियम या मरकरी तत्वों की जांच अब न किए जाने का तर्क दिया है। इसके साथ ही मृत मवेशियों के फेफड़े व यकृत के नमूने मांगे हैं। खानचंद्रपुर व आसपास के गांवों में अब मवेशियों के मरने पर यह नमूने लेकर भेजे जाएंगे। - डॉ. सुबोध कुमार बर्नवाल, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी कानपुर देहात।
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मिट्टी की ऊपरी सतह के उपचार पर निर्णय अटका
कानपुर देहात। खानचंद्रपुर में करीब बीस साल से अधिक समय तक खुले में 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप रहा। बीते साल ही कचरा उठाया जा सका है। इधर डंप स्थल पर मिट्टी की ऊपरी परत भी क्रोमियम प्रभावित हो गई है। इसका उपचार करना है, लेकिन इसके लिए कारगर पहल नहीं हो सकी है। सीएसए कानपुर से हरियाली उगाने के लिए परामर्श लिया गया था। सीएसए ने करीब दो करोड़ रुपये की जरूरत बताई इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग कोई निर्णय नहीं ले सका है। वन विभाग ने रुचि दिखाई थी लेकिन प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने उनपर विश्वास नहीं जताया। (संवाद)