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मौत से जूझ रहे आईपीएस सुरेंद्र दास, सुसाइड से दो दिन पहले पत्नी के साथ देखी थी 'स्त्री' फिल्म
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 07 Sep 2018 08:26 AM IST
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आईपीएस सुरेंद्र दास की पुरानी तस्वीर
कानपुर एसपी पूर्वी के पद पर तैनात आईपीएस सुरेंद्र कुमार दास की हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है। बुधवार की सुबह उन्होंने कैंट स्थित अपने सरकारी आवास में जहर खा लिया था। सर्वोदय नगर के रिजेंसी अस्पताल में आईपीएस सुरेंद्र जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। सुसाइड के प्रयास से दो दिन पहले रविवार को वह अपनी पत्नी डॉ. रवीना सिंह के साथ रेव मोती मॉल में 'स्त्री' फिल्म देखने गए थे। इस दौरान दोनों की आपस में कोई भी बातचीत नहीं हो रही थी।
सिनेमाहॉल में आईपीएस सुरेंद्र के साथ फिल्म देख रहे एक डॉक्टर ने इस बात का खुलासा किया है। नाम उजागर न करने की शर्त पर डॉक्टर ने बताया कि सिनेमा हॉल में रविवार की रात 10:55 पर 'स्त्री' फिल्म शुरू हुई। देर रात एक बजे के करीब जब फिल्म खत्म हुई तो सिनेमा हॉल में मौजूद लोग एक दूसरे से फिल्म की कहानी को लेकर बातचीत कर रहे थे। डॉक्टर भी अपने परिवार के साथ फिल्म देखने गए थे। डॉक्टर के मुताबिक एसपी सुरेंद्र दास और उनकी पत्नी डॉ. रवीना सिनेमाहॉल से बाहर निकलते हुए गुमसुम नजर आ रहे थे। उनके साथ एक गनर भी था। लिफ्ट में भी एसपी के साथ डॉक्टर मौजूद थे। रविवार को ही मियां-बीवी के चेहरे उतरे हुए नजर आ रहे थे जबकि दोनों फिल्म देखकर बाहर आए थे।
एसपी पश्चिम संजीव सुमन का कहना है कि सुरेंद्र कुमार ने पारिवारिक कलह के चलते यह कदम उठाया है। कलह किस बात की और किसे लेकर थी, इसकी छानबीन की जा रही है। एसएसपी के आदेश पर सीओ कैंट के साथ फोरेंसिक टीम ने शाम को एसपी पूर्वी के आवास की जांच की। टीम ने उनके बेडरूम में पड़ी उल्टी के सैंपल लिए, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा है। कुछ साक्ष्य जुटाने के बाद टीम ने एसपी के बेडरूम को सील कर दिया है। एक्सपर्ट का मानना है कि एसपी पूर्वी की पत्नी रवीना खुद भी डॉक्टर हैं। पति के जहर खाने का पता चला तो उन्होंने असर कम करने के इरादे से पति को कई उल्टियां भी कराई थीं। जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो अस्पताल ले गईं। पुलिस ने अघोषित तरीकेसे आवास को अपनी निगरानी में ले लिया है। वहां पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
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सिनेमाहॉल में आईपीएस सुरेंद्र के साथ फिल्म देख रहे एक डॉक्टर ने इस बात का खुलासा किया है। नाम उजागर न करने की शर्त पर डॉक्टर ने बताया कि सिनेमा हॉल में रविवार की रात 10:55 पर 'स्त्री' फिल्म शुरू हुई। देर रात एक बजे के करीब जब फिल्म खत्म हुई तो सिनेमा हॉल में मौजूद लोग एक दूसरे से फिल्म की कहानी को लेकर बातचीत कर रहे थे। डॉक्टर भी अपने परिवार के साथ फिल्म देखने गए थे। डॉक्टर के मुताबिक एसपी सुरेंद्र दास और उनकी पत्नी डॉ. रवीना सिनेमाहॉल से बाहर निकलते हुए गुमसुम नजर आ रहे थे। उनके साथ एक गनर भी था। लिफ्ट में भी एसपी के साथ डॉक्टर मौजूद थे। रविवार को ही मियां-बीवी के चेहरे उतरे हुए नजर आ रहे थे जबकि दोनों फिल्म देखकर बाहर आए थे।
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एसपी पश्चिम संजीव सुमन का कहना है कि सुरेंद्र कुमार ने पारिवारिक कलह के चलते यह कदम उठाया है। कलह किस बात की और किसे लेकर थी, इसकी छानबीन की जा रही है। एसएसपी के आदेश पर सीओ कैंट के साथ फोरेंसिक टीम ने शाम को एसपी पूर्वी के आवास की जांच की। टीम ने उनके बेडरूम में पड़ी उल्टी के सैंपल लिए, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा है। कुछ साक्ष्य जुटाने के बाद टीम ने एसपी के बेडरूम को सील कर दिया है। एक्सपर्ट का मानना है कि एसपी पूर्वी की पत्नी रवीना खुद भी डॉक्टर हैं। पति के जहर खाने का पता चला तो उन्होंने असर कम करने के इरादे से पति को कई उल्टियां भी कराई थीं। जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो अस्पताल ले गईं। पुलिस ने अघोषित तरीकेसे आवास को अपनी निगरानी में ले लिया है। वहां पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
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डरावनी फिल्म 'स्त्री' एक लड़की की आत्मा (चुड़ैल) के बारे में है
स्त्री फिल्म का पोस्टर
'स्त्री' फिल्म एक लड़की की आत्मा(चुड़ैल) के बारे में है जो हर साल शहर में आती है और मर्दों को मारकर सिर्फ उनके कपड़े छोड़ जाती है। ज्यादा डरावनी बात इस फिल्म की ये है कि ये कहानी सच्ची घटना पर आधारित बताई जाती है। दरसअल 1990 के आसपास कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में एक अफवाह फैली थी कि एक ‘चुड़ैल’ है जो शहर की गलियों में रात के वक्त घूमती है। वो चुड़ैल मर्दों की तलाश में रहती है।
बताते हैं कि वो चुड़ैल लोगों के घरों का दरवाजा खटखटाती थी और बड़ी प्यारी सी आवाज में घर के मर्द को आवाज देती थी। खासकर मर्द की मां या पत्नी की आवाज में वो उन्हें पुकारती थी। अपने जानने वाले की आवाज सुनकर अगर मर्द बाहर जाता था तो फिर वो चुड़ैल अगले 24 घंटे के भीतर-भीतर उसे मार देती थी। ये अफवाह शहर में आग की तरह फैल चुकी थी, लोग डरे हुए रहते थे और रात में घरों से बाहर ही नहीं निकलते थे।
उसके बाद लोगों ने इस चुड़ैल से बचने का एक तरीका सोचा- नाले बा। नाले बा को अगर कन्नड़ से ट्रांसलेट करें तो इसका मतलब है कि ‘कल आना’. लोग अपने घरों के सामने नाले बा लिख देते थे ताकि वो बुरी आत्मा उनके घर का दरवाजा न खटखटाए। ऐसा माना जाता था कि नाले बा पढ़ने के बाद वो चुड़ैल वापस लौट जाती थी। उस चुड़ैल के बारे में इतनी ज्यादा अफवाहें उड़ी कि लोग आज भी 1 अप्रैल को ‘नाले बा डे’ के तौर पर मनाते हैं। कहते हैं कि उन दिनों कई लोगों ने अपने घर के बाहर किसी के दरवाजा खटखटाने की आवाजें सुनी थी और कई भयंकर मर्डर भी हुए थे।
बताते हैं कि वो चुड़ैल लोगों के घरों का दरवाजा खटखटाती थी और बड़ी प्यारी सी आवाज में घर के मर्द को आवाज देती थी। खासकर मर्द की मां या पत्नी की आवाज में वो उन्हें पुकारती थी। अपने जानने वाले की आवाज सुनकर अगर मर्द बाहर जाता था तो फिर वो चुड़ैल अगले 24 घंटे के भीतर-भीतर उसे मार देती थी। ये अफवाह शहर में आग की तरह फैल चुकी थी, लोग डरे हुए रहते थे और रात में घरों से बाहर ही नहीं निकलते थे।
उसके बाद लोगों ने इस चुड़ैल से बचने का एक तरीका सोचा- नाले बा। नाले बा को अगर कन्नड़ से ट्रांसलेट करें तो इसका मतलब है कि ‘कल आना’. लोग अपने घरों के सामने नाले बा लिख देते थे ताकि वो बुरी आत्मा उनके घर का दरवाजा न खटखटाए। ऐसा माना जाता था कि नाले बा पढ़ने के बाद वो चुड़ैल वापस लौट जाती थी। उस चुड़ैल के बारे में इतनी ज्यादा अफवाहें उड़ी कि लोग आज भी 1 अप्रैल को ‘नाले बा डे’ के तौर पर मनाते हैं। कहते हैं कि उन दिनों कई लोगों ने अपने घर के बाहर किसी के दरवाजा खटखटाने की आवाजें सुनी थी और कई भयंकर मर्डर भी हुए थे।