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विश्व अल्जाइमर दिवस: याददाश्त की भूल समझ टाल रहे परिवार, पहचान में देरी पड़ रही भारी; संकेत समझना जरूरी
Mon, 21 Sep 2026 03:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चिराग गुप्ता, नई दिल्ली
चिराग गुप्ता, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 21 Sep 2026 03:59 AM IST
सार
विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर इहबास (इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज) के डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। देरी होने पर बीमारी अधिक गंभीर अवस्था में पहुंच सकती है।
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प्रतीक चित्र
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
किसी व्यक्ति का बार-बार एक ही सवाल पूछना, सामान रखकर भूल जाना या परिचित रास्तों को पहचानने में परेशानी होना अक्सर परिवार सामान्य व्यवहार मानकर नजरअंदाज कर देता है। यही लापरवाही कई मामलों में अल्जाइमर की समय पर पहचान में देरी का कारण बन रही है।
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विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर इहबास (इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज) के डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। देरी होने पर बीमारी अधिक गंभीर अवस्था में पहुंच सकती है।
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पूर्वी दिल्ली में किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि बड़ी संख्या में मरीजों में लक्षण शुरू होने के करीब दो साल या उससे अधिक समय बाद बीमारी की पहचान हो पाती है। इहबास के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि अल्जाइमर केवल भूलने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क से जुड़ा एक प्रगतिशील रोग है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और दैनिक कार्यों को प्रभावित करता है।
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शुरुआती संकेत सामान्य दिखाई देने के कारण परिवार अक्सर इन्हें उम्र बढ़ने या सामान्य व्यवहार का हिस्सा मान लेते हैं। कुछ मरीज सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाने लगते हैं या पहले की तुलना में अधिक चिड़चिड़े दिखाई देते हैं।
समय पर पहचान जरूरी
डॉ. ओमप्रकाश के अनुसार, बीमारी की जल्द पहचान और उपचार से मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। समय पर पहचान होने से परिवार को देखभाल, उपचार और भविष्य की जरूरतों की बेहतर तैयारी का अवसर भी मिलता है। वहीं, देर से अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में याददाश्त और मानसिक क्षमताओं में अधिक गिरावट हो सकती है।