Income Tax: बोगस कंपनियों जैसी ही बोगस है जनराज्य पार्टी, सवा सौ कार्यकर्ताओं पर दिखा दिया 11 करोड़ का खर्च
जनराज्य पार्टी के जिस खेल का आयकर विभाग ने राजफाश किया है, वह छह साल पहले ही खुल सकता था। छह साल पहले ही पार्टी के रविशंकर सिंह व अभिषेक कृष्णा के खिलाफ नौबस्ता थाने में केस दर्ज कराया गया था। पुलिस ने डेढ़ साल तक जांच के बाद केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
विस्तार
जनराज्य पार्टी बोगस कंपनियों की तरह ही बोगस राजनीतिक पार्टी है। पूरी तरह कागजों तक ही सीमित। कानपुर में पंजीकृत पता के अलावा कुछ भी नहीं मिला है। पार्टी ने तकरीबन सवा सौ कार्यकर्ताओं पर ही 11 करोड़ के चंदे का खर्च दिखा दिया है। ये चंदा पांच साल के दौरान मिला दिखाया गया है। पार्टी की ना तो कोई राजनीतिक गतिविधि का साक्ष्य अधिकारियों को मिला है। ना ही कोई पोस्टर या अन्य कागज।
पार्टी के पदाधिकारियों के यहां दूसरे दिन भी आयकर की कार्रवाई चलती रही। अधिकारियों ने पूर्व पदाधिकारी ओमेंद्र सिंह के बयान दर्ज किए हैं। आयकर विभाग की टीमों ने बुधवार को पार्टी के संस्थापक रविशंकर यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक कृष्णा के तीन प्रतिष्ठानों पर छापा मारा था।
सूत्रों ने बताया कि 2017 से 2021 तक पार्टी को 11 करोड़ का चंदा मिला था। सूत्रों ने बताया कि आयकर अधिकारियों को ऑडिट बैलेंस शीट में तमाम खामियां मिली हैं। कुछ चंदा देने वालों को नाम-पता ही नहीं है तो कुछ से 10-15 लाख रुपए का चंदा दिखाया गया है। लेकिन उनके आयकर रिटर्न में इतनी कमाई नहीं मिली। ऐसे में मनी लॉंड्रिंग, कालेधन को सफेद करने या आयकर छूट का लाभ उठाने समेत तमाम बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
अंर्तकलह की भी जांच, नोट बंदी में आया चंदा
सूत्रों ने बताया कि छह साल पहले पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष अरुणेश सिंह की एफआईआर को भी आयकर विभाग जांच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि रवि शंकर यादव, अभिषेक कृष्णा और अन्य साथी चंदे की आड़ में कमाई का रास्ता बना रहे थे। 10 से 20 फीसदी कमीशन पर लोगों की काली कमाई को सफेद करनेे के लिए पार्टी फंड का सहारा लेने का प्रयास किया था। बाद में अभिषेक कृष्णा राष्ट्रीय अध्यक्ष और रविशंकर यादव संस्थापक पद पर काबिज हो गए। उन्हीं के कार्यकाल में अधिकतर चंदा मिला। आशंका है कि नोटबंदी के बाद काली कमाई को पार्टी फंड के नाम पर सफेद किया गया है।
पूर्व पदाधिकारी ने किया था विरोध, बाद में पार्टी छोड़ी
अफसरों ने गुरुवार को जनराज्य पार्टी के पूर्व पदाधिकारी ओमेंद्र सिंह के बयान भी दर्ज किए। बताया गया कि वो 2012-14 तक पार्टी के मुख्य महासचिव थे। उस समय पुनीत नाथ शुक्ला राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। बताया गया कि पार्टी का धरातल पर काम न करने और चंदे के नाम पर धंधा करने का विरोध किया था।
बदलते रहे कार्यालय के पते
सूत्रों ने बताया कि मौजूदा समय में पार्टी का पंजीकृत कार्यालय का पता बनारस दिखाया गया है। कानपुर के बाद लखनऊ और फिर प्रयागराज में पता दिखाया गया था। बेहद कम समय में पार्टी के पते बदलने की भी अफसर जांच कर रहे हैं।
छह साल पहले ही पुलिस खोल सकती थी मामला, दर्ज हुआ था केस
जनराज्य पार्टी के जिस खेल का आयकर विभाग ने राजफाश किया है, वह छह साल पहले ही खुल सकता था। छह साल पहले ही पार्टी के रविशंकर सिंह व अभिषेक कृष्णा के खिलाफ नौबस्ता थाने में केस दर्ज कराया गया था। पुलिस ने डेढ़ साल तक जांच के बाद केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। नौबस्ता थाने में पांच नवंबर 2016 को लखनऊ निवासी अरुणेश सिंह ने एक केस दर्ज कराया था। केस में रवि शंकर सिंह व अभिषेक कृष्णा समेत पांच आरोपी बनाए गए थे। इन पर आरोप था कि वे आर्थिक लाभ के लिए पार्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं। समानांतर खाते खोलकर खेल किया गया जा रहा है। पुलिस ने इस केस में 30 मई 2018 को फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस बंद कर दिया था। पुलिस का दावा है कि केस दर्ज कराने वाले वादी ने सहयोग नहीं किया। आरोपों के संबंध में साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराए। कुल मिलाकर पुलिस ने विवेचना गहनता से की ही नहीं थी अन्यथा मामला उसी वक्त खुल जाता। आयकर की कार्रवाई से पुलिस का खेल और लापरवाही उजागर हुई है।
जिले में 18 और पार्टिंयां, लोग जिनका नाम भी नहीं जानते
कानपुर नगर में 18 ऐसे राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, जिनका शहरवासी नाम तक नहीं जानते हैं। इनमें से दो-चार ऐसी पार्टियों ने जरूर विधानसभा चुनाव के समय कुछ सक्रियता दिखाई पर बाद में शांत बैठ गईं। इनमें से आधे दलों ने पिछले दो विधानसभा चुनाव में कानपुर नगर में चुनाव तक नहीं लड़ा है। ये दल सिर्फ कागजों पर हैं। शहर में जनराज्य पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष के यहां आयकर विभाग छापों के बाद ये पार्टियां भी निशाने पर आ सकती हैं। हालांकि स्थानीय चुनाव कार्यालय के पास इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि इन पार्टियों ने कितना चंदा उगाहा है या फिर चंदा लिया भी है या नहीं।
इन पार्टियों का है शहर में मुख्यालय
राजनीतिक पार्टी मुख्यालय
बहुजन पार्टी न्यू एलआईजी बर्रा-7
अखिल भारतीय नागरिक सेवा संघ- रतन लाल नगर
अखिल भारतीय सवर्ण पार्टी- एलआईसी सोसाइटी, शारदा नगर
भारतीय जन सहयोग पार्टी- जूही सफेद कॉलोनी
भारतीय श्रमिक पार्टी- जूही सफेद कॉलोनी, साकेत नगर
प्रजातांत्रिक बहुजन शक्ति दल- श्रीराम हाउस, पांडुनगर
राष्ट्रवादी जनतांत्रिक पार्टी - अमर विला, साकेत नगर
राष्ट्रवादी समाज पार्टी- सिविल लाइंस, पदम अपार्टमेंट के पास
राष्ट्रीय जन उत्थान पार्टी- आवास विकास, हंसपुरम (कैनाल रोड)
समतावादी रिपब्लिकन पार्टी- रामपुरम, पीएसी रोड
जनहित भारत पार्टी- अर्रा नई बस्ती, नौबस्ता, योगेन्द्र बिहार
राष्ट्रीय जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट)- शिवकटरा
राष्ट्रीय संगम दल- ख्योरा, नवाबगंज
समूहिक एकता पार्टी- परमट
अर्जक अधिकार दल- के ब्लाक, किदवई नगर
भारतीय जनचेतना दल-एलआईजी इंदिरा नगर
भारतीय जनता समाजसेवी पार्टी- कल्याणपुर