{"_id":"687ff3a2fd947919eb0d3b97","slug":"iits-book-will-teach-you-how-to-adjust-to-the-academic-environment-and-live-in-the-hostel-kanpur-news-c-12-1-knp1051-1197100-2025-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: शैक्षणिक माहौल में ढलना और हॉस्टल में रहना सिखाएगी आईआईटी की किताब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: शैक्षणिक माहौल में ढलना और हॉस्टल में रहना सिखाएगी आईआईटी की किताब
विज्ञापन
कानपुर। आईआईटी में प्रवेश लेने वाले छात्र पढ़ाई, संस्थान में तालमेल न बैठने और घर से दूर हॉस्टल में रहने से अक्सर तनाव में आ जाते हैं। ऐसे छात्रों की परेशानी को दूर करने के लिए आईआईटी के वैज्ञानिकों ने एक पुस्तक तैयार की है।
योर आईआईटीके एकेडमिक कंपास नाम की यह पुस्तक छात्रों को संस्थान के शैक्षणिक माहौल में बेहतर ढंग से समायोजित होने और घर से दूर हॉस्टल में रहने में मदद करेगी। इसमें अनुभव आधारित सुझाव और मार्गदर्शन दिए गए हैं।
सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड टीचिंग एक्सीलेंस के प्रभारी प्रो. मनोज हरबोला ने बताया कि लंबे समय से ऐसी पुस्तक की जरूरत महसूस हो रही थी जो छात्रों को सही मार्गदर्शन दे सके। यहां आने वाले छात्रों को न तो शैक्षणिक प्रणाली की सही समझ होती है और न तो हॉस्टल जीवन में सामंजस्य बैठाने की जानकारी होती है। यह पुस्तक छात्रों की समस्या का समाधान करने के साथ उन्हें आत्मविश्वास और सही दिशा देने का प्रयास करेगी। यह पुस्तक सेंटर में ही तैयार की गई है।
विज्ञापन
इसमें शैक्षणिक जीवन को सरल भाषा में सिखाया गया है। इसके साथ मुख्य और वैकल्पिक पाठ्यक्रम, अनुसंधान और दोहरी डिग्री विकल्प व अंतः विषयक शिक्षा के अवसर की जानकारी दी गई है। पुस्तक का संपादन व लेखक डॉ. अशेषा सिन्हा ने किया है।
संस्थान के उप निदेशक प्रो. बृजभूषण ने कहा कि देश भर से आने वाले अलग-अलग स्वभाव के छात्रों को तारतम्य बैठाने में समय लगता है। पढ़ाई भी कठिन होती है। इस पुस्तक के माध्यम से छात्रों को ऐसा मार्गदर्शन देना चाहते हैं जिससे वह पढ़ाई में ठीक से जुड़ सकें, सीखने की प्रक्रिया का आनंद ले सकें और समग्र रूप से विकसित हो सकें। यह पुस्तक सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक साथी की तरह है, जो छात्रों को उनके सफर में मदद करती है।
विज्ञापन
योर आईआईटीके एकेडमिक कंपास नाम की यह पुस्तक छात्रों को संस्थान के शैक्षणिक माहौल में बेहतर ढंग से समायोजित होने और घर से दूर हॉस्टल में रहने में मदद करेगी। इसमें अनुभव आधारित सुझाव और मार्गदर्शन दिए गए हैं।
विज्ञापन
सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड टीचिंग एक्सीलेंस के प्रभारी प्रो. मनोज हरबोला ने बताया कि लंबे समय से ऐसी पुस्तक की जरूरत महसूस हो रही थी जो छात्रों को सही मार्गदर्शन दे सके। यहां आने वाले छात्रों को न तो शैक्षणिक प्रणाली की सही समझ होती है और न तो हॉस्टल जीवन में सामंजस्य बैठाने की जानकारी होती है। यह पुस्तक छात्रों की समस्या का समाधान करने के साथ उन्हें आत्मविश्वास और सही दिशा देने का प्रयास करेगी। यह पुस्तक सेंटर में ही तैयार की गई है।
विज्ञापन
इसमें शैक्षणिक जीवन को सरल भाषा में सिखाया गया है। इसके साथ मुख्य और वैकल्पिक पाठ्यक्रम, अनुसंधान और दोहरी डिग्री विकल्प व अंतः विषयक शिक्षा के अवसर की जानकारी दी गई है। पुस्तक का संपादन व लेखक डॉ. अशेषा सिन्हा ने किया है।
संस्थान के उप निदेशक प्रो. बृजभूषण ने कहा कि देश भर से आने वाले अलग-अलग स्वभाव के छात्रों को तारतम्य बैठाने में समय लगता है। पढ़ाई भी कठिन होती है। इस पुस्तक के माध्यम से छात्रों को ऐसा मार्गदर्शन देना चाहते हैं जिससे वह पढ़ाई में ठीक से जुड़ सकें, सीखने की प्रक्रिया का आनंद ले सकें और समग्र रूप से विकसित हो सकें। यह पुस्तक सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक साथी की तरह है, जो छात्रों को उनके सफर में मदद करती है।