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Kanpur News: आईआईटी तैयार करेगा एआई के देसी डाटा मॉडल
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कानपुर। स्वास्थ्य क्षेत्र में आईआईटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के देसी डाटा मॉडल विकसित करेगा। इससे लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान होगा। इन मॉडल के जरिये किसी महामारी के फैलने के पहले बचाव के कदम उठा लिए जाएंगे। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) के कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने बताया कि एआई के लिए अभी 11 करोड़ रोगियों का डाटा उपलब्ध है।
आईआईटी में एनएचए ने आईसीएमआर–राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य एवं डेटा विज्ञान अनुसंधान संस्थान के सहयोग से ‘डिजिटल पब्लिक गुड (डीपीजी) फॉर हेल्थ एआई’ पर फेडरेटेड इंटेलिजेंस हैकाथॉन का आयोजन किया गया। डिजिटल हेल्थ स्टैक पर एक कार्यशाला हुई। डिजिटल पब्लिक गुड आईआईटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। यह स्वास्थ्य संस्थानों, डेटा प्रदाताओं और एआई डेवलपर्स के बीच सहयोग को सक्षम बनाता है। इसमें कुल 374 पंजीकरण हुए। इनमें 208 व्यक्तिगत प्रतिभागी और 166 टीमें शामिल रहीं। 54 प्रतिशत प्रतिभागी एआई शोधकर्ता रहे।
डॉ. बरनवाल ने कहा कि भारत का डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र अंतःक्रियाशीलता, डेटा सुरक्षा तथा नागरिक-केंद्रित सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए विकसित किया जा रहा है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव तथा एबीडीएम प्रबंध निदेशक रितु माहेश्वरी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का एकीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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आईआईटी के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने सुरक्षित डेटा साझाकरण, सहयोगात्मक मॉडल विकास तथा देश के डिजिटल हेल्थ स्टैक के माध्यम से पारितंत्र निर्माण के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
प्रतिभागियों ने तीन चिकित्सा ट्रैकों बोन एज प्रेडिक्शन, कैटरेक्ट डिटेक्शन तथा डायबिटिक रेटिनोपैथी के लिए एआई मॉडल विकसित किए। इन मॉडलों का मूल्यांकन ‘गोल्डन डेटासेट्स’ के विरुद्ध एक गोपनीयता-संरक्षण फेडरेटेड इंटेलिजेंस फ्रेमवर्क के माध्यम से किया गया, सटीक मॉडलों का चयन किया गया। बोन एज, कैटेरेक्ट और डायबिटिक रेटिनोपैथी उपयोग-मामलों में उत्कृष्ट योगदान करने पर सम्मानित किया गया।
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आईआईटी में एनएचए ने आईसीएमआर–राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य एवं डेटा विज्ञान अनुसंधान संस्थान के सहयोग से ‘डिजिटल पब्लिक गुड (डीपीजी) फॉर हेल्थ एआई’ पर फेडरेटेड इंटेलिजेंस हैकाथॉन का आयोजन किया गया। डिजिटल हेल्थ स्टैक पर एक कार्यशाला हुई। डिजिटल पब्लिक गुड आईआईटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। यह स्वास्थ्य संस्थानों, डेटा प्रदाताओं और एआई डेवलपर्स के बीच सहयोग को सक्षम बनाता है। इसमें कुल 374 पंजीकरण हुए। इनमें 208 व्यक्तिगत प्रतिभागी और 166 टीमें शामिल रहीं। 54 प्रतिशत प्रतिभागी एआई शोधकर्ता रहे।
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डॉ. बरनवाल ने कहा कि भारत का डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र अंतःक्रियाशीलता, डेटा सुरक्षा तथा नागरिक-केंद्रित सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए विकसित किया जा रहा है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव तथा एबीडीएम प्रबंध निदेशक रितु माहेश्वरी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का एकीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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आईआईटी के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने सुरक्षित डेटा साझाकरण, सहयोगात्मक मॉडल विकास तथा देश के डिजिटल हेल्थ स्टैक के माध्यम से पारितंत्र निर्माण के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
प्रतिभागियों ने तीन चिकित्सा ट्रैकों बोन एज प्रेडिक्शन, कैटरेक्ट डिटेक्शन तथा डायबिटिक रेटिनोपैथी के लिए एआई मॉडल विकसित किए। इन मॉडलों का मूल्यांकन ‘गोल्डन डेटासेट्स’ के विरुद्ध एक गोपनीयता-संरक्षण फेडरेटेड इंटेलिजेंस फ्रेमवर्क के माध्यम से किया गया, सटीक मॉडलों का चयन किया गया। बोन एज, कैटेरेक्ट और डायबिटिक रेटिनोपैथी उपयोग-मामलों में उत्कृष्ट योगदान करने पर सम्मानित किया गया।