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Kanpur News: फ्लैश टॉक में जीएसवीएम की सिद्धि अव्वल, प्रथम को दूसरा स्थान

Fri, 13 Mar 2026 01:53 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2026 01:53 AM IST
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GSVM's Siddhi Secures Top Spot in 'Flash Talk'; Pratham Takes Second Place
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फिजियोलॉजी विभाग के बैनर तले आयोजित यूपी एसोपिकॉन-2026 में एमबीबीएस छात्रों ने चौकाने वाले आइडिया दिए। कॉन्फ्रेंस में फ्लैश टॉक शो का आयोजन किया गया, जिसमें प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को अपना इनोवेशन बताने के लिए केवल दो मिनट का समय मिला। फ्लैश टॉक में जीएसवीएम की छात्रा सिद्धि ने प्रथम, छात्र प्रथम ने द्वितीय और कन्नौज मेडिकल कॉलेज के ध्रुव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
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कॉन्फ्रेंस में एक छात्र ने सुझाव दिया कि शरीर में लगाई जाने वाली डिवाइस को बैटरी बदलने की झंझट से बचाने के लिए बॉडी हीट का इस्तेमाल किया जाए, जिसे इलेक्ट्रिक ऊर्जा में कनवर्ट करने की तकनीक डिवाइस में लगी हो। इसके अलावा स्पेस यात्रियों के लिए एआई आधारित डिवाइस बनाने का आइडिया भी प्रस्तुत किया गया, जो हड्डियों में कैल्शियम को सुरक्षित रख सके। कार्यशाला में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के 60 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। निर्णायक मंडल में डॉ. अमित वर्मा, डॉ. श्रद्धा वर्मा और डॉ. प्रियंका शुक्ला शामिल रहीं।
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फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. डॉली रस्तोगी ने बताया कि चार कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इनमें न्यूनतम संसाधनों में फिटनेस मूल्यांकन में डॉ. संकल्प झा एवं डॉ. आशीष कुमार गुप्ता, शोध पद्धति : जमोवी सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण में डॉ. मुकेश शुक्ला, एंबुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (एबीपीएम) में डॉ. शिवम वर्मा और क्लिनिकल प्रैक्टिस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर डॉ. नवदीप आहूजा ने जानकारी दी।
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एआई से चिकित्सीय सलाह हो सकती खतरनाक
मुख्य व्याख्यान एआई : एक चिकित्सकीय परिप्रेक्ष्य में एम्स विलासपुर के डॉ. नवनीत आहूजा ने चेताया कि आम जनता अगर चैटजीपीटी या अन्य एआई मॉडल से सीधे चिकित्सीय सलाह लेती है, तो यह खतरनाक हो सकता है। एआई गलत जानकारी दे सकता है या पुरानी जानकारी पर आधारित हो सकता है। इसलिए इसे केवल उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए, डॉक्टर के रूप में नहीं।



कंप्यूटर असिस्टेड लैब का उद्घाटन
फिजियोलॉजी विभाग में कंप्यूटर असिस्टेड लैब का उद्घाटन किया गया। इसमें एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा जिसमें स्क्रीन पर मेंढक, चूहा आदि का डिसेक्शन करके अंगों और शरीर पर केमिकल के प्रभाव के बारे में जानकारी ली जा सकेगी। विभागाध्यक्ष डॉ. डॉली रस्तोगी ने बताया कि इस लैब के माध्यम से छात्रों को वास्तविक जीवों की जरूरत नहीं पड़ेगी और शिक्षण सुरक्षित एवं प्रभावी होगा।
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