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'अगर गलती की तो होंगे दर्दनाक नतीजे': ईरान की दो टूक, गालिबाफ बोले- शर्तें माने यूएस वरना होर्मुज नहीं खुलेगा
Mon, 21 Sep 2026 07:35 AM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, तेहरान
एएनआई, तेहरान
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 21 Sep 2026 07:35 AM IST
सार
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने साफ किया है कि उसकी शर्तें पूरी होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और अमेरिका के साथ पुराने बातचीत ढांचे में लौटने का सवाल नहीं है। तेहरान ने मध्यस्थों के जरिए संघर्ष रोकने, जमे हुए धन को जारी करने और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करने की मांगें पहुंचाई हैं।
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ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराता जा रहा है। इस बीच ईरान ने कहा है कि जब तक अमेरिका तेहरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक न तो होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जाएगा और न ही उसके साथ बातचीत पर विचार किया जाएगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने यह बात कही है।
अल जजीरा के अनुसार, गालिबाफ ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक अपनी मांगें और शर्तें स्पष्ट रूप से पहुंचा दी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, ईरानी लोगों के जरूरी अधिकारों को मान्यता नहीं मिलती और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता, तब तक बातचीत के पुराने ढांचे में लौटने या होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की कोई संभावना नहीं है।
होर्मुज क्यों बना तनाव का प्रमुख केंद्र?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव का प्रमुख केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां समुद्री यातायात पर लगाए गए प्रतिबंधों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति में आगे और बाधा आने की चिंता बढ़ गई है।
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क्या अमेरिकी ठिकानों पर फिर हमलों की तैयारी में ईरान?
गालिबाफ के बयान के बाद ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है। ईरान के खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से कहा कि अगर अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके हितों को निशाना बनाया जाएगा।
सैन्य कमान ने कहा, "अगर अमेरिका इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ कोई गलती करता है, तो क्षेत्र में उसके सभी ठिकानों और हितों को बिना किसी सीमा या विचार के लगातार, प्रभावी और दर्दनाक हमलों का निशाना बनाया जाएगा।" ईरानी सैन्य कमान ने क्षेत्र के उन देशों को भी चेतावनी दी है जो अमेरिका की किसी सैन्य कार्रवाई में उसका साथ देंगे। ईरान ने कहा कि ऐसे देशों को कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा और ईरानी सेना की ओर से उनके खिलाफ किसी संयम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
अमेरिका ने 109 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि उसकी सेनाओं ने ईरान पर लगाए गए नौसैनिक नाकाबंदी को लागू करने की कोशिशों के तहत 109 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला है। अमेरिकी सेना ने 14 जुलाई को ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने की कार्रवाई फिर शुरू की थी।
ट्रंप ने ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अपना रुख नहीं बदलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई ने इससे पहले कहा था कि कतर की मध्यस्थता के जरिए तेहरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं। इनमें सभी मोर्चों पर संघर्ष रोकना, ईरान के जब्त किए गए धन को जारी करना और अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करना शामिल है।
अमेरिका-ईरान तनाव से कैसे बिगड़े पश्चिम एशिया में हालात?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ऐसे समय बढ़ा है जब क्षेत्र में अस्थिरता भी बढ़ रही है। हाल में हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं। इसके बाद अमेरिका ने पश्चिम एशिया के कई देशों में अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है। इसमें तेजी से स्थिति बिगड़ने, उड़ानों में बाधा आने और अमेरिकी हितों पर हमले की आशंका का जिक्र किया गया है।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए दुनिया के नेता इस समय न्यूयॉर्क में जुट रहे हैं। ऐसे में अमेरिका-ईरान टकराव और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख चिंता के मुद्दे बने हुए हैं।
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अल जजीरा के अनुसार, गालिबाफ ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक अपनी मांगें और शर्तें स्पष्ट रूप से पहुंचा दी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, ईरानी लोगों के जरूरी अधिकारों को मान्यता नहीं मिलती और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता, तब तक बातचीत के पुराने ढांचे में लौटने या होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की कोई संभावना नहीं है।
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होर्मुज क्यों बना तनाव का प्रमुख केंद्र?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव का प्रमुख केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां समुद्री यातायात पर लगाए गए प्रतिबंधों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति में आगे और बाधा आने की चिंता बढ़ गई है।
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क्या अमेरिकी ठिकानों पर फिर हमलों की तैयारी में ईरान?
गालिबाफ के बयान के बाद ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है। ईरान के खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से कहा कि अगर अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके हितों को निशाना बनाया जाएगा।
सैन्य कमान ने कहा, "अगर अमेरिका इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ कोई गलती करता है, तो क्षेत्र में उसके सभी ठिकानों और हितों को बिना किसी सीमा या विचार के लगातार, प्रभावी और दर्दनाक हमलों का निशाना बनाया जाएगा।" ईरानी सैन्य कमान ने क्षेत्र के उन देशों को भी चेतावनी दी है जो अमेरिका की किसी सैन्य कार्रवाई में उसका साथ देंगे। ईरान ने कहा कि ऐसे देशों को कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा और ईरानी सेना की ओर से उनके खिलाफ किसी संयम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
अमेरिका ने 109 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि उसकी सेनाओं ने ईरान पर लगाए गए नौसैनिक नाकाबंदी को लागू करने की कोशिशों के तहत 109 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला है। अमेरिकी सेना ने 14 जुलाई को ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने की कार्रवाई फिर शुरू की थी।
ट्रंप ने ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अपना रुख नहीं बदलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई ने इससे पहले कहा था कि कतर की मध्यस्थता के जरिए तेहरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं। इनमें सभी मोर्चों पर संघर्ष रोकना, ईरान के जब्त किए गए धन को जारी करना और अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करना शामिल है।
अमेरिका-ईरान तनाव से कैसे बिगड़े पश्चिम एशिया में हालात?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ऐसे समय बढ़ा है जब क्षेत्र में अस्थिरता भी बढ़ रही है। हाल में हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं। इसके बाद अमेरिका ने पश्चिम एशिया के कई देशों में अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है। इसमें तेजी से स्थिति बिगड़ने, उड़ानों में बाधा आने और अमेरिकी हितों पर हमले की आशंका का जिक्र किया गया है।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए दुनिया के नेता इस समय न्यूयॉर्क में जुट रहे हैं। ऐसे में अमेरिका-ईरान टकराव और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख चिंता के मुद्दे बने हुए हैं।