Human Trafficking: गिरोह के खुलासे के लिए नए सिरे से जांच, भाई बोला- शरीर में फैला था संक्रमण..दर्दनाक हुई मौत
Kanpur Crime: सुरेश मांझी की मौत मानव तस्करी से जुड़ी मिली, तो गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ेगी। साथ ही, मानव तस्करी की आरोपी फरार महिला की तलाश में टीम लगाई गई है।
विस्तार
कानपुर में नौबस्ता के रविंद्रनगर निवासी सुरेश मांझी (30) की मौत यदि तस्करी से जुड़ी पाई गई तो पूर्व में दर्ज मुकदमे में गैर इरादतन हत्या की धारा भी बढ़ाई जाएगी। वहीं, फरार महिला आरोपी की तलाश में फिर से टीम को लगाया गया है। सोमवार को परिजनों ने सुरेश के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
इसके बाद परिजनों ने आरोपियों को सख्त सजा दिलाने और मानव तस्करी से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़ करने की मांग की है, जिसके बाद एसीपी नौबस्ता ने प्रकरण की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। मूलरूप से बिहार निवासी सुरेश मांझी परिवार संग नौबस्ता के रविंद्रनगर में बस गया था।
बीते साल मई में मछरिया गुलाबी बिल्डिंग के पास रहने वाला विजय उसके अच्छी नौकरी दिलाने के बहाने ले गया और 70 हजार में भीख मंगवाने वाले गिरोह के सरगना राज नागर, आशा देवी और तारावती के माध्यम से दिल्ली पहुंचा दिया था। गिरोह ने भीख मंगवाने के लिए केमिकल डालकर अंधा कर दिया था।
हैवी डोज के कारण बढ़ता गया शरीर में संक्रमण
रमेश के अनुसार उसे ऐसे इंजेक्शन दिए जाते थे, जिससे उसका एक हाथ व एक पैर पूरी तरह से बेकार हो गया था। दवाओं के हैवी डोज के कारण उसके शरीर में संक्रमण बढ़ता गया। ज्यादा तबीयत बिगड़ने पर उसे विजय से वापस भेज दिया। बीते साल 30 अक्तूबर को किदवईनगर चौराहे घायलावस्था में पड़ा मिला था।
गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ेगी
परिजनों को मिलने के बाद से उसका इलाज शुरू हुआ। संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाने के कारण रविवार देर रात घर पर ही दम तोड़ दिया था। डॉक्टरों के बयान और विधिक राय लेने के बाद पूर्व में दर्ज एफआईआर में गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ाई जाएगी। पूरे गैंग का भंडाफोड़ करने के लिए नए सिरे से जांच शुरू की जाएगी।
पूरे शरीर में संक्रमण फैलने से हुई सुरेश की मौत
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सुरेश के पूरे शरीर में संक्रमण फैल चुका था। इससे वह कोमा में गया और शरीर के सारे अंगों ने काम करना बंद कर दिया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। रमेश के अनुसार वह अनपढ़ हैं। किसी डॉक्टर ने उन्हें कोई राय या सलाह नहीं दी, तो हारकर भाई को शाम करीब सात बजे घर ले आए।
कांशीराम से हैलट... फिर बेबस होकर ले आए घर
रमेश मांझी ने बताया कि उन्होंने छोटे भाई को आंखों के सामने तिल-तिल मरते देखा। शनिवार को अचानक उसके खराब हो चुके पैर के तलवों से मवाद बहने लगा। दर्द से चीख रहा था। उसे उठाकर कांशीराम अस्पताल ले गए, वहां डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। हैलट अस्पताल के लिए रेफर किया।
पुलिस वाले बोले.. साहब नहीं हैं, सुबह आना
रमेश के अनुसार भाई को दर्द से कराहता देख मन नहीं माना तो रात करीब नौ बजे मदद के लिए नौबस्ता थाने पहुंचे। मुंशियाने में जाकर भाई की हालत बताकर मदद की गुहार लगाई तो पुलिस वाले बोले...बड़े साहब नहीं है, सुबह आना...। मायूस होकर घर लौट आए। देर रात करीब दो बजे उसने दम तोड़ दिया।
अपने फायदे के लिए दूसरे की जिंदगी कर दी बर्बाद
रमेश ने कहा कि मानव तस्करी के इस गिरोह ने अपने फायदे के लिए दूसरे की जिंदगी बर्बाद कर दी। बोले..अगर भीख मंगवानी थी, तो अपने बच्चों के हाथ पैर तोड़कर उनकी आंखें फोड़कर उनसे भीख मंगवाते...। मेरे भाई की हंसती खेलती जिंदगी उससे क्यों छीन ली...।