फर्जी पते पर बने पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के असलहा लाइसेंस 30 साल बाद भी निरस्त नहीं हो सके हैं। गोरखपुर निवासी अमरमणि त्रिपाठी ने कानपुर के फर्जी पते पर लाइसेंस बनवाए थे। हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व मंत्री के नाम रिवाल्वर और बंदूक के लाइसेंस हैं। अमरमणि त्रिपाठी निवासी 19 ए हुमायूंबाग गोरखपुर का रिवाल्वर लाइसेंस (संख्या 85) 15 मार्च 1984 को और दोनाली बंदूक का लाइसेंस (नंबर 78) दो नवंबर 1983 को कानपुर से जारी हुआ था। इस लाइसेंस पर 128/51 सी ब्लॉक किदवई नगर का पता दर्ज है। शिकायत पर जांच हुई। 15 दिसंबर 1986 को तत्कालीन किदवई नगर चौकी प्रभारी डूमर सिंह ने रिपोर्ट लगाई कि दिए गए पते पर अमरमणि त्रिपाठी न रहते हैं और न कभी रहे हैं।
अमरमणि त्रिपाठी ने बनवा रखे हथियारों के फर्जी लाइसेंस, काट रहे हैं उम्रकैद की सजा
इस जांच रिपोर्ट के बाद एडीएम कोर्ट ने 1986 में लाइसेंस निरस्त कर अमरमणि को बंदूक जमा कराने का आदेश दिया। रिवाल्वर लाइसेंस निरस्त करने के लिए जिलाधिकारी की कोर्ट में मुकदमा चला। 13 मई 1998 को तत्कालीन जिलाधिकारी बीएल भुल्लर की कोर्ट ने लाइसेंस निरस्त कर दिया। तब अमरमणि ने मंडलायुक्त की कोर्ट में अपील की और दलील दी कि वह ठेकेदारी करते हैं, राजनीति से भी जुड़े हैं। कानपुर आना-जाना रहता है।
तत्कालीन आयुक्त विजय शंकर ने 10 नवंबर 1998 को आदेश दिया कि गोरखपुर जिलाधिकारी से अमरमणि के बारे में रिपोर्ट मंगाई जाए। इसमें उनकी स्थिति, निवास, वहां कोई मुकदमा हो तो उसकी भी जानकारी दी जाए। उस रिपोर्ट के बाद असलहा लाइसेंस निरस्त किए जाएं। तब से आज तक कानपुर के जितने भी जिलाधिकारी रहे, सभी गोरखपुर जिलाधिकारी को पत्र लिखते रहे। रिपोर्ट न आने के कारण अभी भी असलहा लाइसेंस निरस्त नहीं हो सके हैं। वर्ष 2000 से 2017 तक की अवधि में जितने भी डीएम रहे सभी ने इस संबंध में रिपोर्ट मांगी। आठ डीएम के लेटर और रिमाइंडर फाइल में संलग्न हैं।
अभी भी पते पर सत्यापन को पहुंचती पुलिस
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