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Exclusive: चार साल में बालू में तैयार कर दिया जंगल, पशु-पक्षियों का बना आशियाना, नदी कटाव भी रुका
Mon, 24 Apr 2023 12:14 PM IST
शिखा पांडेय
नमित शुक्ला, अमर उजाला, फतेहपुर
नमित शुक्ला, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 24 Apr 2023 12:14 PM IST
सार
फतेहपुर के आलमपुर नहरी ग्राम पंचायत के गंगा किनारे कटरी का 32 हेक्टेयर का क्षेत्र बलूयी था। वर्ष 2018 में ग्राम पंचायत से वन विकसित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। गंगा में बालू गिरने से रोकने के लिए नदी के किनारे-किनारे मेड़ तैयार की गई। मेड़ के बीच-बीच में बड़े-बड़े गड्ढे पानी भरने के लिए बनाए गए। क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर 800 पौधे विभिन्न प्रजाति के लगाए गए।
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आलमपुर नरही गंगा कटरी क्षेत्र में तैयार किया गया 32 हेक्टेअर का जंगल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वन तथा वन्य जीवों के संरक्षण व संवर्धन के लिए गांव आमलपुर नरही के गंगा कटरी में 32 हेक्टेयर भूमि पर वन क्षेत्र तैयार किया गया है। ये वन्य जीवों की शरणस्थली भी बन रहा है। यहां पर घायल बारहसिंघा, अजगर, मोर समेत अन्य जीवों को स्वस्थ करके जंगल में छोड़ा गया है। वहीं जंगल तैयार होने से नदी में बालू का कटाव रुका है, साथ ही भूजल स्तर भी बढ़ा है।
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जिले के आलमपुर नहरी ग्राम पंचायत के गंगा किनारे कटरी का 32 हेक्टेयर का क्षेत्र बलूयी था। वर्ष 2018 में ग्राम पंचायत से वन विकसित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। गंगा में बालू गिरने से रोकने के लिए नदी के किनारे-किनारे मेड़ तैयार की गई। मेड़ के बीच-बीच में बड़े-बड़े गड्ढे पानी भरने के लिए बनाए गए। क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर 800 पौधे विभिन्न प्रजाति के लगाए गए। पूरे 32 हेक्टेयर जमीन पर 25 हजार 600 पौधे रोपित किए गए। रेंजर आरएल सैनी ने बताया कि यहां पर पौधों के जीवित रहने का रेशियो 90 से 95 प्रतिशत है।
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ये पौधे अब छोटे-छोटे पेड़ का रूप ले चुके हैं और पूरा क्षेत्र जंगल के रूप में तैयार हो चुका है। इससे पर्यावरण को बढ़ावा मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को रहने के लिए आशियाना बन गया है। वहीं गंगा में बालू का गिरना रुक गया है। आसपास के ग्रामीणों को धूप से बचने के लिए छांव मिलने लगी है। 2018 से पहले 32 हेक्टेयर का बलूयी मरुस्थल हरियाली से लहलहा उठा है।
तैयार की जा रही ग्रीन बेल्ट डलमऊ के पुल के आसपास का 2 हेक्टेयर क्षेत्र भी मरुस्थल था। यहां पर 2019 में खैर का जंगल तैयार किया गया। यहां पर अब पंक्षियों का बसेरा होने लगा है। इसी तरह भिटौरा श्मशान घाट से असनी पुल तक ग्रीन बेल्ट तैयार की गई है। ये पर्यावरण संरक्षण में सहायक सिद्ध हो रही है।
तैयार की जा रही ग्रीन बेल्ट डलमऊ के पुल के आसपास का 2 हेक्टेयर क्षेत्र भी मरुस्थल था। यहां पर 2019 में खैर का जंगल तैयार किया गया। यहां पर अब पंक्षियों का बसेरा होने लगा है। इसी तरह भिटौरा श्मशान घाट से असनी पुल तक ग्रीन बेल्ट तैयार की गई है। ये पर्यावरण संरक्षण में सहायक सिद्ध हो रही है।
वन्य जीवों को मिला बसेरा
वनों के लगातार कटने से वन्य जीवों का ठिकाना भी छिन गया था। उन्हें भी अपना ठिकाना मिल गया है। जंगल में जंगली सुअर, हिरण प्रजाति सांभर, खरगोश, हाइना, नीलगाय, मोर जैसे वन्य जीवों ने अपना बसेरा बनाना शुरू कर दिया हैं। रेस्क्यू घायल जानवरों को स्वस्थ करके जंगल में छोड़ा जाता है।
वनों के लगातार कटने से वन्य जीवों का ठिकाना भी छिन गया था। उन्हें भी अपना ठिकाना मिल गया है। जंगल में जंगली सुअर, हिरण प्रजाति सांभर, खरगोश, हाइना, नीलगाय, मोर जैसे वन्य जीवों ने अपना बसेरा बनाना शुरू कर दिया हैं। रेस्क्यू घायल जानवरों को स्वस्थ करके जंगल में छोड़ा जाता है।
फायदे
1. पर्यावरण संरक्षण में सहायक
2. वन्य जीवों को मिला बसेरा
3. भूजल स्तर बढ़ा
4. गंगा नदी का कटान रुका
1. पर्यावरण संरक्षण में सहायक
2. वन्य जीवों को मिला बसेरा
3. भूजल स्तर बढ़ा
4. गंगा नदी का कटान रुका
गंगा कटरी की जमीन पर प्रस्ताव तैयार करके वृक्षारोपण कराकर जंगल तैयार किया गया है। जंगल तैयार होने से वन्य जीवों के लिए अच्छा प्राकृतिकवास मिला है जो वन्य जीवों को आकर्षित कर रहे हैं। गंगा नदी में बालू का गिरना भी कम हुआ है। भूजल स्तर भी बढ़ा है।- आरएल सैनी, क्षेत्रीय वन अधिकारी, फतेहपुर