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इटावा: तीनों भाइयों ने मिलकर की थी पिता की हत्या, धान के खेत में मिला था शव
Sat, 07 Nov 2020 09:54 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 07 Nov 2020 09:54 PM IST
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इटावा जिले के भरथना में दो नवंबर को ऊसराहार रोड से नगला जलाल जाने वाले रास्ते पर वृद्ध की हत्या कर उसके तीनों बेटों ने शव फेंक दिया था। यह बात कोतवाली में शनिवार को प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण ओमवीर सिंह ने पुलिस क्षेत्राधिकारी चन्द्रपाल सिंह की मौजूदगी में मामले का खुलासा करने के दौरान कही।
उन्होंने बताया कि गांव मंगूपुर निवासी वीरेंद्र सिंह उर्फ हाकिम सिंह का शव दो नवंबर को ऊसराहार रोड से नगला जलाल वाले रास्ते पर मजार के सामने धान के खेत में मिला था। इस मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार कर रहे थे।
एसपी ने बताया कि जांच में पता चला कि वीरेंद्र उर्फ हाकिम के पास कुल आठ बीघा जमीन थी। जिसमें से तीन बीघा जमीन उसने पहले बेच दी थी। इसके चलते उसकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। 18 अगस्त 2020 को वीरेंद्र ने करीब ढाई बीघा जमीन और बेच दी।
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इसकी सूचना उनके छोटे पुत्र विष्णु ने दिल्ली में नौकरी कर रहे अपने भाइयों चंद्रभान व गुड्डू उर्फ अरुण को दी। इस पर वह दोनों दोनों दिल्ली से घर पर आए और जमीन बेचने को लेकर उनका पिता से विवाद बढ़ गया।
जिसमें तीनों ने मिल कर वीरेंद्र के साथ मारपीट कर गमछे से उनका मुंह दबा कर हत्या कर दी। इसके बाद शिनाख्त छिपाने के लिए मुंह पर गमछा रखकर शव को ईंटों से कुचल कर फेंक दिया। शव मिलने के बाद छोटे बेटे विष्णु ने शिनाख्त कर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
सीओ चंद्रपाल सिंह ने बताया कि विवेचना के दौरान साक्ष्य मिलने पर शनिवार सुबह पिता की हत्या के आरोपी तीनों पुत्रों को उनके घर से गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। तीनों ने अपने पिता की हत्या करना स्वीकार किया है। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त गमछा भी बरामद कर लिया गया है।
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उन्होंने बताया कि गांव मंगूपुर निवासी वीरेंद्र सिंह उर्फ हाकिम सिंह का शव दो नवंबर को ऊसराहार रोड से नगला जलाल वाले रास्ते पर मजार के सामने धान के खेत में मिला था। इस मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार कर रहे थे।
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एसपी ने बताया कि जांच में पता चला कि वीरेंद्र उर्फ हाकिम के पास कुल आठ बीघा जमीन थी। जिसमें से तीन बीघा जमीन उसने पहले बेच दी थी। इसके चलते उसकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। 18 अगस्त 2020 को वीरेंद्र ने करीब ढाई बीघा जमीन और बेच दी।
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इसकी सूचना उनके छोटे पुत्र विष्णु ने दिल्ली में नौकरी कर रहे अपने भाइयों चंद्रभान व गुड्डू उर्फ अरुण को दी। इस पर वह दोनों दोनों दिल्ली से घर पर आए और जमीन बेचने को लेकर उनका पिता से विवाद बढ़ गया।
जिसमें तीनों ने मिल कर वीरेंद्र के साथ मारपीट कर गमछे से उनका मुंह दबा कर हत्या कर दी। इसके बाद शिनाख्त छिपाने के लिए मुंह पर गमछा रखकर शव को ईंटों से कुचल कर फेंक दिया। शव मिलने के बाद छोटे बेटे विष्णु ने शिनाख्त कर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
सीओ चंद्रपाल सिंह ने बताया कि विवेचना के दौरान साक्ष्य मिलने पर शनिवार सुबह पिता की हत्या के आरोपी तीनों पुत्रों को उनके घर से गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। तीनों ने अपने पिता की हत्या करना स्वीकार किया है। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त गमछा भी बरामद कर लिया गया है।