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Etawah News: कला उत्सव में दिखेगी जिले के विद्यार्थियों की रचनात्मकता
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इटावा। विद्यार्थियों की छिपी कलात्मक प्रतिभा को मंच देने के लिए जिले में कला उत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तरीय प्रतियोगिता 10 सितंबर को सुबह नौ बजे पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, इटावा में होगी। इसमें कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थी विभिन्न कला विधाओं में प्रतिभाग करेंगे। प्रतियोगिता का आयोजन शिक्षा मंत्रालय की पहल के तहत किया जा रहा है।
कला उत्सव में विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए 12 विधाएं निर्धारित की गई हैं। इनमें शास्त्रीय गायन, लोकगीत, शास्त्रीय वादन, ताल वाद्य, समूह वादन, शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य, लघु नाटिका, दृश्य कला में द्विआयामी व त्रिआयामी चित्रकला, स्थानीय शिल्प और पारंपरिक कहानी वाचन शामिल हैं। डीआईओएस अतुल कुमार सिंह ने बताया कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार गायन, वादन और नृत्य की विभिन्न विधाओं में विद्यार्थी एकल अथवा समूह के रूप में प्रस्तुति देंगे। समूह प्रस्तुतियों में अधिकतम चार विद्यार्थी प्रतिभाग कर सकेंगे। पारंपरिक कहानी वाचन में दो विद्यार्थी प्रतिभाग करेंगे। प्रतिभागियों को अपनी प्रस्तुति में भारतीय कला एवं संस्कृति से जुड़े लोक एवं पारंपरिक तत्वों को प्राथमिकता देनी होगी। डीआईओएस की ओर से सभी राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों को निर्धारित तिथि पर विद्यार्थियों की प्रतिभागिता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर प्रतियोगिता के आयोजन के लिए पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, इटावा को नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं नोडल शिक्षक के रूप में प्रवक्ता सुमति यादव को नामित किया गया है।
डीआईओएस ने बताया कि इस वर्ष कला उत्सव की विषयवस्तु विकसित भारत- वर्ष 2047 के भारत की परिकल्पना रखी गई है। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में इसी विषय से जुड़े रचनात्मक पक्ष को सामने लाने पर जोर दिया गया है। कला उत्सव का उद्देश्य माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को पहचानना, उसे प्रोत्साहित करना और शिक्षा में कला को बढ़ावा देना है।
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कला उत्सव में विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए 12 विधाएं निर्धारित की गई हैं। इनमें शास्त्रीय गायन, लोकगीत, शास्त्रीय वादन, ताल वाद्य, समूह वादन, शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य, लघु नाटिका, दृश्य कला में द्विआयामी व त्रिआयामी चित्रकला, स्थानीय शिल्प और पारंपरिक कहानी वाचन शामिल हैं। डीआईओएस अतुल कुमार सिंह ने बताया कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार गायन, वादन और नृत्य की विभिन्न विधाओं में विद्यार्थी एकल अथवा समूह के रूप में प्रस्तुति देंगे। समूह प्रस्तुतियों में अधिकतम चार विद्यार्थी प्रतिभाग कर सकेंगे। पारंपरिक कहानी वाचन में दो विद्यार्थी प्रतिभाग करेंगे। प्रतिभागियों को अपनी प्रस्तुति में भारतीय कला एवं संस्कृति से जुड़े लोक एवं पारंपरिक तत्वों को प्राथमिकता देनी होगी। डीआईओएस की ओर से सभी राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों को निर्धारित तिथि पर विद्यार्थियों की प्रतिभागिता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर प्रतियोगिता के आयोजन के लिए पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, इटावा को नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं नोडल शिक्षक के रूप में प्रवक्ता सुमति यादव को नामित किया गया है।
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डीआईओएस ने बताया कि इस वर्ष कला उत्सव की विषयवस्तु विकसित भारत- वर्ष 2047 के भारत की परिकल्पना रखी गई है। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में इसी विषय से जुड़े रचनात्मक पक्ष को सामने लाने पर जोर दिया गया है। कला उत्सव का उद्देश्य माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को पहचानना, उसे प्रोत्साहित करना और शिक्षा में कला को बढ़ावा देना है।
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