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नोट की चोट : सस्ते में गल्ला बेचकर घरों में जला रहे चूल्हा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 15 Nov 2016 10:34 PM IST
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हर गांव के यही हालात हैं
- फोटो : अमर उजाला
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औरैया में जिनके घरों में फसल रखी है वह तो किसी तरह सस्ते में गल्ला बेचकर घर का चूल्हा जला रहे है, लेकिन जिनकी रोजी रोटी मजदूरी पर ही टिकी है उनके घरों में अब दो जून रोटी का भी संकट है। शहर से सात किलोमीटर दूर गांव पढ़ीन के हालात कुछ ऐसी ही है। यह गांव तो सिर्फ नजीर है, करीब हर गांव के यही हालात हैं।
मंगलवार को जब पढ़ीन गांव का जायजा लिया तो वहां कई जगहों पर ग्रामीण उदास बैठे दिखे। एक जगह किसान आपस मेें बातें कर रहे थे। इन हालातों से कब छुटकारा मिलेगा। अधिकतर ग्रामीणों का कहना था कि इस समय 10 रुपये भी उनके घर में नहीं है। रबी की खेती के लिए उन्हें इस समय खाद और बीज की जरूरत है। उन्हें खाद और बीज दोनों देने से दुकानदार ने मना कर दिया। रुपयों का इंतजाम नहीं हुआ तो उनकी खेती पिछड़ जाएगी। वह भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। राम सिंह ने बताया कि वह तो सस्ते भाव में गल्ला बेचकर किसी तरह से चूल्हा जला रहे हैं। हरविंद यादव ने कहा कि तुम लोग खेती से पैदा गल्ला बेचकर काम चला भी सकते हो, लेकिन हमने तो चार दिन मजदूरी भी की लेकिन काम कराने वाले ने उन्हें चारों दिन 500 का नोट दिखा दिया। आज शाम घर के लोगों के लिए सब्जी कैसे आएगी। यही डर सता रहा है। बालकराम रविवार को औरैया बैंक गये और वहां से चार हजार के नोट बदले तो उन्हे दो हजार का एक नोट मिल गया और एक हजार की रेजगारी। बालक राम के लिए वो दो हजार का नोट मुसीबत बना है। कोई लेने को तैयार नही है।
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मंगलवार को जब पढ़ीन गांव का जायजा लिया तो वहां कई जगहों पर ग्रामीण उदास बैठे दिखे। एक जगह किसान आपस मेें बातें कर रहे थे। इन हालातों से कब छुटकारा मिलेगा। अधिकतर ग्रामीणों का कहना था कि इस समय 10 रुपये भी उनके घर में नहीं है। रबी की खेती के लिए उन्हें इस समय खाद और बीज की जरूरत है। उन्हें खाद और बीज दोनों देने से दुकानदार ने मना कर दिया। रुपयों का इंतजाम नहीं हुआ तो उनकी खेती पिछड़ जाएगी। वह भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। राम सिंह ने बताया कि वह तो सस्ते भाव में गल्ला बेचकर किसी तरह से चूल्हा जला रहे हैं। हरविंद यादव ने कहा कि तुम लोग खेती से पैदा गल्ला बेचकर काम चला भी सकते हो, लेकिन हमने तो चार दिन मजदूरी भी की लेकिन काम कराने वाले ने उन्हें चारों दिन 500 का नोट दिखा दिया। आज शाम घर के लोगों के लिए सब्जी कैसे आएगी। यही डर सता रहा है। बालकराम रविवार को औरैया बैंक गये और वहां से चार हजार के नोट बदले तो उन्हे दो हजार का एक नोट मिल गया और एक हजार की रेजगारी। बालक राम के लिए वो दो हजार का नोट मुसीबत बना है। कोई लेने को तैयार नही है।
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