रेलवे में फर्जी नौकरी: दो और एजेंट गए जेल, पांचों ठगों का सुराग नहीं, जीआरपी की तीन टीमें कर रहीं तलाश
कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर बुधवार देररात पकड़े गए 16 फर्जी रेलवे कर्मचारी में से तीन एजेंटों को जेल भेज दिया गया है। इनमें 13 युवक ऐसे थे, जिनसे पांच से 15 लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र और आईकार्ड थमाया गया था।
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एजेंट दिनेश कुमार को शुक्रवार को ही जेल भेजा गया था, जबकि शिव नारायण त्रिपाठी और पवन गुप्ता को शनिवार को जेल भेजा गया। वहीं युवकों को नौकरी का झांसा देकर ठगने वाले पांचों आरोपी अभी फरार हैं। सरगना रुद्र ठाकुर, राकेश भट्ट, अनुज अवस्थी, अभिषेक और मोहित की गिरफ्तारी के लिए जीआरपी ने तीन टीमें बनाई हैं। इटावा के रहने वाले सरगना रुद्र की यहां पनकी में सुसराल है। जीआरपी इंस्पेक्टर एके सिंह ने बताया कि शुक्रवार देर रात पनकी, कानपुर देहात और बिधनू इलाकों में छापेमारी की गई है। चार अन्य टीमें इनकी तलाश में लगी हैं।
ठगों ने युवकों से नौकरी देने के नाम पर जो रकम वसूली थी, उसमें चार बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया है। रुद्र प्रताप और राकेश भट्ट के खातों से 14 बार रुपयों का ट्रांजेक्शन हुआ है। रुद्र इटावा, राकेश भट्ट उत्तराखंड के रुड़की और अभिषेक चंदौली का रहने वाला है। अनुज और मोहित के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
फर्जी तरह से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वालों की गिरफ्तारी होने के बाद अन्य बेरोजगार युवकों के बारे में भी पता चल सकता है, जिन्हें ठगा गया होगा। जीआरपी ने टीमें बनाई हैं और आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
अजीत कुमार सिंह, इंस्पेक्टर, जीआरपी
ठगी के मामले में जीआरपी कार्रवाई कर रही है। रेलवे के किसी विभाग से इनका संबंध नहीं है। रेलवे की जिस टीसी की मदद से फर्जी नौकरी करने वालों को पकड़ा गया है, उन्हें पुरस्कृत किया गया है। रेलवे अभी कोई जांच नहीं कर रहा है।
हिमांशु शेखर उपाध्याय, निदेशक, कानपुर सेंट्रल