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रेलवे में फर्जी नौकरी: दो और एजेंट गए जेल, पांचों ठगों का सुराग नहीं, जीआरपी की तीन टीमें कर रहीं तलाश

Sat, 12 Jun 2021 09:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 12 Jun 2021 09:25 PM IST
सार

कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर बुधवार देररात पकड़े गए 16 फर्जी रेलवे कर्मचारी में से तीन एजेंटों को जेल भेज दिया गया है। इनमें 13 युवक ऐसे थे, जिनसे पांच से 15 लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र और आईकार्ड थमाया गया था।

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Fake job in railway: Two more agents went to jail, no clue of five thugs, three teams of GRP are searching
रेलवे में फर्जी नौकरी का मामला: घटना की जानकारी देते अधिकारी - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर फर्जी नौकरी करने वाले 16 युवकों में तीन एजेंटों को जेल भेज दिया गया है। ये 13 युवक ऐसे थे, जिनसे पांच से 15 लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र और आईकार्ड थमाया गया था। ये लोग आठ-10 दिन से नौकरी भी कर रहे थे। बृहस्पतिवार देर रात जब इन्हें पकड़ा गया तो ठगी का पता चला। इनमें गिरोह के तीन एजेंट भी थे।
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एजेंट दिनेश कुमार को शुक्रवार को ही जेल भेजा गया था, जबकि शिव नारायण त्रिपाठी और पवन गुप्ता को शनिवार को जेल भेजा गया। वहीं युवकों को नौकरी का झांसा देकर ठगने वाले पांचों आरोपी अभी फरार हैं। सरगना रुद्र ठाकुर, राकेश भट्ट, अनुज अवस्थी, अभिषेक और मोहित की गिरफ्तारी के लिए जीआरपी ने तीन टीमें बनाई हैं। इटावा के रहने वाले सरगना रुद्र की यहां पनकी में सुसराल है। जीआरपी इंस्पेक्टर एके सिंह ने बताया कि शुक्रवार देर रात पनकी, कानपुर देहात और बिधनू इलाकों में छापेमारी की गई है। चार अन्य टीमें इनकी तलाश में लगी हैं।
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रुपये लेने के लिए बैंक खातों का हुआ इस्तेमाल
ठगों ने युवकों से नौकरी देने के नाम पर जो रकम वसूली थी, उसमें चार बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया है। रुद्र प्रताप और राकेश भट्ट के खातों से 14 बार रुपयों का ट्रांजेक्शन हुआ है। रुद्र इटावा, राकेश भट्ट उत्तराखंड के रुड़की और अभिषेक चंदौली का रहने वाला है। अनुज और मोहित के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

फर्जी तरह से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वालों की गिरफ्तारी होने के बाद अन्य बेरोजगार युवकों के बारे में भी पता चल सकता है, जिन्हें ठगा गया होगा। जीआरपी ने टीमें बनाई हैं और आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
अजीत कुमार सिंह, इंस्पेक्टर, जीआरपी

ठगी के मामले में जीआरपी कार्रवाई कर रही है। रेलवे के किसी विभाग से इनका संबंध नहीं है। रेलवे की जिस टीसी की मदद से फर्जी नौकरी करने वालों को पकड़ा गया है, उन्हें पुरस्कृत किया गया है। रेलवे अभी कोई जांच नहीं कर रहा है। 
हिमांशु शेखर उपाध्याय, निदेशक, कानपुर सेंट्रल

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