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पेट की बीमारियों से बचना है तो मिनरल वॉटर की जगह पानी उबाल कर पिएं
Sat, 20 Apr 2019 05:16 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 20 Apr 2019 05:16 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली के गेस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट प्रोफेसर गौर चौधरी के अनुसार एस्केरिस से आंतों के जख्मों को ठीक करने के लिए शोध चल रहा है। शोध में ऐसे मरीजों के पेट में एस्केरिस पहुंचाए गए, जिनकी आंतों में जख्म थे, शुरुआत में ही सार्थक परिणाम सामने आए। उन्होंने पेट की बीमारियों से बचाव के लिए मिनरल वॉटर की जगह शुद्ध पानी पीने पर जोर दिया।
कानपुर के मेडिकल कालेज में आयोजित आईएमए सीजीपी रिफ्रेसर कोर्स में डॉ. चौधरी ने डॉक्टरों को बताया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से भी कभी-कभी आंतों में घाव (क्रोंस डिसीज) हो जाते हैं। 20 साल में आंतों में घाव के मरीज दोगुने हो गए हैं। प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड, मिनरल वाटर आदि भी इसकी वजह हैं। दर्द निवारक दवाओं से भी आंतों में जख्म हो सकते हैं।
कुछ एंटीबायोटिक्स दवाओं से हेल्थी कीटाणु मर जाते हैं, इससे पेट में गड़बड़ी, डाइजेशन, स्वास्थ्य, मूड प्रभावित होता है। हृदय रोगियों को खून पतला करने के लिए दी जाने वाली ऐस्परिन यदि नॉन कार्डियक पेशेंट को दी जाए तो ब्लीडिंग हो सकती है। उन्होंने बताया कि गले की नसें मोटी होकर फटना खतरनाक बीमारी है।
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कानपुर के मेडिकल कालेज में आयोजित आईएमए सीजीपी रिफ्रेसर कोर्स में डॉ. चौधरी ने डॉक्टरों को बताया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से भी कभी-कभी आंतों में घाव (क्रोंस डिसीज) हो जाते हैं। 20 साल में आंतों में घाव के मरीज दोगुने हो गए हैं। प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड, मिनरल वाटर आदि भी इसकी वजह हैं। दर्द निवारक दवाओं से भी आंतों में जख्म हो सकते हैं।
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कुछ एंटीबायोटिक्स दवाओं से हेल्थी कीटाणु मर जाते हैं, इससे पेट में गड़बड़ी, डाइजेशन, स्वास्थ्य, मूड प्रभावित होता है। हृदय रोगियों को खून पतला करने के लिए दी जाने वाली ऐस्परिन यदि नॉन कार्डियक पेशेंट को दी जाए तो ब्लीडिंग हो सकती है। उन्होंने बताया कि गले की नसें मोटी होकर फटना खतरनाक बीमारी है।
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डायबिटिक माता-पिता के बच्चे संतुलित आहार लें
वाराणसी से आए डॉ. कमलाकर त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों में डायबिटीज के इलाज में मोदी (मैच्योरिटी ऑनसेट डायबिटीज यंग) पर भी गौर किया जाने लगा है। यदि शुरुआत में ही इसका पता चल जाए, तो बहुत सस्ती दवा से वे सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। डायबिटिक माता-पिता के जो बच्चे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव रहित नियमित दिनचर्या अपनातेे हैं, वे इस रोग से बचे रहते हैं।
पित्त की नली में रुकावट भी पीलिया के लिए जिम्मेदार
एसजीपीजीआई, लखनऊ से आए डॉ. प्रवीर राय, डॉ. गौरव चावला ने बताया कि खून की कोशिकाओं के ज्यादा टूटने, वायरल हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन) के साथ अलावा पित्त की नली में रुकावट भी पीलिया के लिए जिम्मेदार है।
वाराणसी से आए डॉ. कमलाकर त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों में डायबिटीज के इलाज में मोदी (मैच्योरिटी ऑनसेट डायबिटीज यंग) पर भी गौर किया जाने लगा है। यदि शुरुआत में ही इसका पता चल जाए, तो बहुत सस्ती दवा से वे सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। डायबिटिक माता-पिता के जो बच्चे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव रहित नियमित दिनचर्या अपनातेे हैं, वे इस रोग से बचे रहते हैं।
पित्त की नली में रुकावट भी पीलिया के लिए जिम्मेदार
एसजीपीजीआई, लखनऊ से आए डॉ. प्रवीर राय, डॉ. गौरव चावला ने बताया कि खून की कोशिकाओं के ज्यादा टूटने, वायरल हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन) के साथ अलावा पित्त की नली में रुकावट भी पीलिया के लिए जिम्मेदार है।