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कोरोना काल था मनुष्यता का शांतिकाल, केवल वही लोग परेशान हुए जो बाजार से थे जुड़ेः कुमार विश्वास

Mon, 04 Jan 2021 01:14 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 04 Jan 2021 01:14 AM IST
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Dr. Kumar Vishwas said that if you want to bring Ramraj, then stop talking to the sleeper cell
डॉ. कुमार विश्वास
यदि देश में रामराज लाना है तो देश के लोगों को स्लीपर सेल से बात करना बंद करना होगा। पाकिस्तान से आने वाले लोग जो स्लीपर सेल का काम करते हैं, उनसे बात नहीं करनी चाहिए। ये लोग युवाओं को गुमराह करते हैं।
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यह बात डॉ. कुमार विश्वास ने एकल भारत लोक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित एकल के राम कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली में हो रहा था, जिसको लाइव देखने के लिए शहर से हजारों लोग लाइव जुड़े रहे।
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इस कार्यक्रम में शहर से एकल भारत अभियान के डॉ. प्रवीण कटियार, डॉ.एएस प्रसाद, अनुराधा वार्ष्णेय, डॉ. उमेश पालीवाल, सुरेंद्र गुप्ता, ध्रुव रुइया, डॉ. अवध दुबे, सुरेश झाझरिया और प्रकाश कनौडिया आदि जुड़े रहे।
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बंधन में होना बाध्य नहीं
गोष्ठी में संबोधन से पहले डॉ. विश्वास ने बाबा रामदेव, सुरेंद्र शर्मा और लक्ष्मी गोयल को प्रणाम किया। बंधन और बाध्य में अंतर बताते हुए डॉ. विश्वास ने कहा कि माता सीता अशोक वाटिका में बंधन में जरूर थीं, लेकिन बाध्य नहीं थीं। जब जब रावण ने अपनी मर्यादा लांघनी चाही, उन्होंने रावण को याद दिलाया कि अगर तुम लंकापति हो तो मैं भी अयोध्यापति की पत्नी हूं।

कोरोना मनुष्यता का शांतिकाल
कोरोना काल मनुष्यता का शांतिकाल था। इसमें वही लोग परेशान हुए जो बाजार से जुड़े हुए थे। जिनको अपनी संस्कृति और परिवार से लगाव था, वह शांति में थे। कोरोना ने उन देशों को प्रकृति की ताकत का एहसास करा दिया जो अपनी शक्ति को पूरे विश्व के सामने बताते थे। एक अदृश्य शत्रु ने उनकी सीमा में पहुंचकर व्यवस्था को चुनौती दे दी। बड़ी बड़ी मिसाइलें धरी की धरी रह गईं।

राम मंदिर में सीता माता भी हो साथ
डॉ. विश्वास ने कहा कि मैं राम मंदिर का निर्माण कराने वालों से कहना चाहूंगा कि अयोध्या ने बन रहे राम मंदिर में सीता माता का साथ होना जरूरी है। उनके बिना प्रभु श्री राम का मंदिर अधूरा रहेगा।

राम एक महानप्रेमी
उन्होंने कहा कि राम पति से ज्यादा एक महान प्रेमी थे, जिन्होेंने मां सीता के लिए समुद्र पर पत्थरों से बांध बनवाया। ताजमहल को हम प्रेम की निशानी मानते हैं, लेकिन ऐसा प्यार किस काम का जो महल बनाने वालों के हाथ कटवा दिए गए। इससे बड़ा प्रेमी तो बिहार का दशरथ मांझी था, जिसने अपनी पत्नी की याद में पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया।
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