Dog Attack: कुत्ताें के काटने से दहशत में छात्रा, सोते से बार-बार उठ पड़ती, एक लाख आवारा कुत्ते बने हैं मुसीबत
Kanpur News: दहेली सुजानपुर, कोयलानगर, रामपुरम, सतबरी, पीएसी बाईपास में लावारिस कुत्तों और बंदरों का आतंक है। दिन भर बंदर और कुत्ते गलियों और छतों में मंडराते रहते हैं। सीएमओ ऑफिस और कांशीराम हॉस्पिटल में कुत्ते घूमते रहते हैं। इतना ही नहीं, कई बार कुत्ते तीमारदारों को भौंकने लगते हैं। काटने के लिए भी दौड़ते हैं।
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कानपुर में चार दिन बाद भी कुत्तों के काटने से छात्रा चार दहशत में है। वह सोते से बार-बार उठ बैठती है। भीड़ देखकर चिल्लाने लगती है। श्यामनगर के केडीए कॉलोनी दहेली सुजानपुर रामपुर फेज-1 में रहने वाले चाचा आशुतोष ने बताया कि उन्होंने शादी नहीं की है। बड़े भाई वीरेंद्र स्वरूप साहू की 2017 में पैरालिसिस से मौत हो गई थी।
भाभी सोनी, उनके बच्चे ऋषभ, गौरव और बेटी वैष्णवी उनके साथ रहते हैं। वैष्णवी (21) एलेन हाउस रूमा में बीबीए तृतीय वर्ष की छात्रा है। 20 अगस्त की शाम काॅलेज से लाैटते समय घर से 500 मीटर की दूरी पर स्थित मधुबन पार्क के पास लावारिस कुत्तों ने हमला कर दिया था। उसके गाल में 17 टांके आए थे। उसको स्ट्रॉ से जूस पिला रहे हैं। सोमवार को उसे फिर से डाॅक्टर को दिखाएंगे।
चेहरा ठीक कराने के लिए सरकार मदद करे
शाम को पुलिस चाैकी से दरोगा और सिपाही बयान लेने आए थे, लेकिन बोलने की स्थिति न होने से मना कर दिया। बताया कि घटना के बाद अभी भी नगर निगम की टीम लावारिस कुत्तों को पकड़ कर नहीं ले गई है। उन्होंने कुत्तों को शेल्टर होम में शिफ्ट करने की मांग की है। उन्होंने मांग की कि भतीजी का जो चेहरा बिगड़ा है, उसे ठीक कराने के लिए सरकार से मदद करे।
लावारिस कुत्तों और बंदरों का आतंक
दहेली सुजानपुर, कोयलानगर, रामपुरम, सतबरी, पीएसी बाईपास में लावारिस कुत्तों और बंदरों का आतंक है। दिन भर बंदर और कुत्ते गलियों और छतों में मंडराते रहते हैं। सीएमओ ऑफिस और कांशीराम हॉस्पिटल में कुत्ते घूमते रहते हैं। इतना ही नहीं, कई बार कुत्ते तीमारदारों को भौंकने लगते हैं। काटने के लिए भी दौड़ते हैं। अस्पताल प्रशासन भी कुत्तों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाता है। तीन जुलाई को सीएमओ ऑफिस में कुत्ते ने डॉक्टर समेत पांच लोगों को काट भी लिया था।
मुसीबत का सबब बने शहर में घूम रहे एक लाख लावारिस कुत्ते
कानपुर शहर में एक लाख लावारिस कुत्ते लोगों के लिए मुसीबत के सबब बने हुए हैं। इनमें कई कभी-कभी हिंसक हो जाते हैं जिस वजह से लोगों की जान खतरे में बन आती है। निगम लावारिस कुत्तों को पकड़वाता तो है लेकिन नसबंदी कर तीन दिन रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता है। चकेरी के श्यामनगर में एक छात्रों को लावारिस कुत्ते ने काटा था। उसको 17 टांके लगवाने पड़े थे।
गाइडलाइन के अनुसार की जाएगी नसबंदी
घटना के बाद नगर निगम के पशु चिकित्सा विभाग ने शनिवार को श्यामनगर में अभियान चलाया। बच्ची को काटने वाले लावारिस कुत्ते के साथ ही 23 कुत्ते पकड़े गए। इन्हें फूलबाग स्थित एनिमन बर्थ कंट्रोल सेल ऑफ डॉग सेंटर ले जाया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. निरंजन सिंह ने बताया कि इन्हें तीन दिन सेंटर में रखा जाएगा और गाइडलाइन के अनुसार नसबंदी की जाएगी।
किशनपुर में भी नगर निगम का डॉग सेंटर
कटखने या हिंसक कुत्तों को यहीं पर रोककर बाकी को रैबीज इंजेक्शन लगाकर वहीं छोड़ दिया जाएगा जहां से लाया गया है। डॉ. निरंजन सिंह ने बताया कि फूलबाग के अलावा किशनपुर में भी नगर निगम का डॉग सेंटर हैं। दोनों जगह मिलाकर हर दिन 60 कुत्तों (एक माह में 1800) की नसबंदी की जाती है। हिंसक कुत्तों को इन्हीं सेंटरों में चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाता है।
9000 कुत्ते पालतू पर पंजीकृत सिर्फ 2100
शहर में लावारिस के अलावा करीब 9000 पालतू कुत्ते भी हैं। इनमें से नगर निगम में सिर्फ 2100 का ही पंजीकरण है। इन्हें पालने वाले समय-समय पर चेकअप कराते रहते हैं लेकिन कभी-कभी ये भी हिंसक हो जाते और हमला कर देते हैं।
मांस-मछली की दुकानों वाले क्षेत्र में कुत्ते ज्यादा हिंसक
डॉ. निरंजन का कहना है कि वैसे तो शहर में हर गली-मोहल्ले में लावारिस कुत्ते हैं, लेकिन जहां मांस-मछली की दुकानें होती हैं। उन इलाकों के कुत्ते अधिक हिंसक होते हैं। कारण ये है कि ऐसी जगहों पर कुत्तों को मांस के साथ जानवरों का रक्त भी मिलता है। खून व मांस की लत लग जाने से ये कुत्ते हिंसक हो जाते हैं।