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कानपुर: ‘300 करोड़ खर्च फिर भी हवा खराब’, टूटी सड़कें…खुले कूड़ाघर और उड़ती धूल, 200 में 183.2 अंक, पढ़ें डिटेल

Tue, 08 Sep 2026 10:18 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 08 Sep 2026 10:18 AM IST
सार

Kanpur News: सीपीसीबी के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में कानपुर 5वें से फिसलकर 11वें स्थान पर पहुंच गया है, जिसका मुख्य कारण टूटी सड़कें, खोदाई और धूल नियंत्रण की कमी है। हालांकि, शहर के वार्ड-78 (सिविल लाइंस) ने बेहतर कचरा और धूल प्रबंधन के दम पर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है।

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Kanpur 300 crore spent yet air quality remains poor broken roads open garbage dumps scored 183.2 out of 200
रावतपुर की ओर जाने वाली वीआईपी रोड उड़ती धूल - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में कानपुर की रैंकिंग छह पायदान गिरकर देश में 11वें स्थान पर पहुंच गई है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों की रैंकिंग में शहर को 200 में 183.2 अंक मिले हैं। पिछले दो वर्षों से पांचवें स्थान पर रहने वाले कानपुर की इस बार खराब स्थिति के पीछे मेट्रो और सीवर लाइन समेत लगातार चल रहे निर्माण कार्य, टूटी सड़कों से उड़ती धूल, खुले में कचरा, ग्रीन बेल्ट में गिरावट और अव्यवस्थित विकास कार्य प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

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सीपीसीबी, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से नई दिल्ली में आयोजित स्वच्छ वायु दिवस समारोह में सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की गई। इसमें लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले, इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। आगरा और गाजियाबाद की रैंकिंग भी कानपुर से बेहतर रही। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2023-24 और 2024-25 की रैंकिंग में शहर का पांचवां स्थान था।

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वार्ड-78 को प्रदेश में पहला स्थान
शहर की ओवरऑल रैंकिंग भले ही गिरी हो, लेकिन सिविल लाइंस स्थित वार्ड-78 ने प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरे का निस्तारण, धूल नियंत्रण, सीएंडडी वेस्ट प्रबंधन, हरित क्षेत्र विकसित करने और जनजागरूकता के कामों के आधार पर वार्ड को यह स्थान मिला। प्रयागराज का वार्ड-33 दूसरे और बरेली का गांधी उद्यान वार्ड-32 तीसरे स्थान पर रहा। पर्यावरण अभियंता दिवाकर भास्कर ने बताया कि इस बार शहर से तीन वार्डों 23, 37 और 78 ने ही प्रतिभाग किया था। इसमें वार्ड 78 को प्रदेश में पहला स्थान मिला है।

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कंपनी बाग चौराहा पर डाट नाले के धंसने से खुदी पड़ी सड़क - फोटो : amar ujala

300 करोड़ खर्च, फिर भी रैंकिंग में पहुंचे नीचे
शहर की हवा साफ करने के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने और कई योजनाएं चलाने के बावजूद रैंकिंग में इस बार गिरावट आई है। नगर निगम ने सड़क सुधार, इंटरलॉकिंग टाइल्स, वाटर स्प्रिंकलर, मियावाकी पद्धति से नौ नमो वन, मैकेनिकल स्वीपिंग और स्मार्ट कूड़ाघरों समेत कई कार्य कराए हैं। इससे इन योजनाओं के जमीनी असर पर सवाल उठ रहे हैं।

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इन वजहों ने घटाई रैंक
शहर में वायु प्रदूषण की बड़ी वजह सड़कों की बदहाल स्थिति है। कई मार्गों पर छह-सात इंच से लेकर डेढ़ फीट तक गहरे गड्ढे हैं। वाहनों के गुजरने से धूल लगातार हवा में रहती है। किदवईनगर, यशोदनगर, कर्रही, लालबंगला और काकादेव के साथ कल्याणपुर क्षेत्र में जीटी रोड पर भी धूल की समस्या बनी हुई है। इन स्थानों पर नियमित सफाई और धूल नियंत्रण के उपाय प्रभावी नहीं हो सके हैं। मेट्रो, सीवर लाइन, पाइपलाइन और अन्य विकास कार्यों के लिए जगह-जगह हुई खोदाई ने भी समस्या बढ़ाई है।

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रावतपुर में खराब सड़क - फोटो : amar ujala

पानी के छिड़काव की निगरानी कमजोर रही
स्वरूपनगर समेत विभिन्न मोहल्लों में सीएम ग्रिड योजना के तहत बन रही 10 सड़कों में मानकों के पालन पर भी सवाल उठे हैं। निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के इंतजाम और नियमित पानी के छिड़काव की निगरानी कमजोर रही है। फुटपाथों की बदहाल स्थिति, उजड़ी ग्रीनबेल्ट, घटता हरित क्षेत्र और खुले में पड़ा कचरा भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। कई जगह कूड़े और पत्तियों में आग लगाए जाने से भी प्रदूषण बढ़ रहा है।

सिर्फ नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं
वायु गुणवत्ता सुधारने की जिम्मेदारी नगर निगम के साथ उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यातायात एवं परिवहन विभागों की भी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को औद्योगिक इकाइयों, निर्माण स्थलों और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों की निगरानी करनी होती है। वहीं, यातायात एवं परिवहन विभाग वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार हैं। विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय और योजनाओं की नियमित निगरानी में कमी का असर रैंकिंग पर पड़ा है।

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पनकी में कूड़े के ढेर में लगी भीषण आग - फोटो : amar ujala

ये हैं प्रमुख कमियां

  • जर्जर सड़कों से लगातार धूल उड़ना।
  • प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त मशीनी सफाई प्रभावी न होना।
  • धूल नियंत्रण के लिए कार्यस्थल पर पानी का छिड़काव न होना।
  • निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट का उपयोग न करना।
  • खुले में कूड़ा और पत्तियां जलाने की घटनाएं।
  • निर्माण, खोदाई और खराब सड़कों से धूल बढ़ना।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग में गिरावट के बावजूद वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल नियंत्रण, सड़क सुधार, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर विशेष जोर है, जिसका असर आने वाले समय में बेहतर रैंकिंग के रूप में दिखेगा।  -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त

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पनकी साइट नंबर-5 पर फैली गंदगी - फोटो : amar ujala

वार्ड-78 में किए गए यह दावे

  • 14.60 टन ठोस अपशिष्ट का प्रसंस्करण।
  • 2.92 टन प्लास्टिक रिसाइक्लिंग।
  • ठोस प्लास्टिक के 10 प्रतिशत का 24 घंटे में निस्तारण।
  • 19 किलोमीटर सड़क पैचहोल फ्री।
  • 1.50 किलोमीटर क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित।
  • स्कूल-कॉलेजों में जनजागरूकता अभियान।
  • ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना।
  • 14 स्थानों पर मियावाकी पौधरोपण।
  • 8986 घरों को एलपीजी/पीएनजी से जोड़ा गया।
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