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ट्रेजेडी किंग का निधन: दिलीप कुमार को कानपुर का शीरमाल और कबाब था पसंद, आखिरी बार 1980 में आए थे शहर
Thu, 08 Jul 2021 09:28 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 08 Jul 2021 09:28 AM IST
सार
वासिया इब्राहिम के बताया कि चाचा फजल हलीम और दिलीप कुमार दोस्त थे। इसलिए दोनों के संबंध एक परिवार की तरह थे। जब भी दिलीप कुमार कानपुर या आसपास के जिलों में आते तो इनके घर जरूर आते थे।
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दिलीप कुमार की फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दिलीप कुमार के अंदर घमंड जरा सा भी नहीं था। वह बहुत ही सरल स्वभाव के थे और ज्यादा से ज्यादा परिवार में समय बिताते थे। उन्हें कानपुर का शीरमाल और कबाब बहुत पसंद था। ये बातें दिलीप के रिश्तेदार स्वरूप नगर निवासी तारिक इब्राहिम व उनकी पत्नी वासिया इब्राहिम ने बताई।
वासिया इब्राहिम के बताया कि चाचा फजल हलीम और दिलीप कुमार दोस्त थे। इसलिए दोनों के संबंध एक परिवार की तरह थे। जब भी दिलीप कुमार कानपुर या आसपास के जिलों में आते तो इनके घर जरूर आते थे। तारिक इब्राहिम ने बताया कि दिलीप कुमार शूटिंग के अलावा पूरा समय घर परिवार के बीच ही देना पसंद करते थे।
ऐसे में जब पुरानी बातें छिड़तीं तो घंटों की फुर्सत हो जाती थी। एक बार जो भी कोई उनसे मिलता तो फैन हो जाता था। उनके स्वभाव को लेकर चर्चाएं हमेशा होती रहती हैं। हम लोगों के मुंबई जाने पर शूटिंग से छूटते ही मिलने घर आते थे।
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वह मीट खाने के ज्यादा शौकीन थे। उनके आने पर नॉनवेज पार्टी होती थी। उन्हें कानपुर का शीरमाल और कबाब बहुत पसंद था। जब हम लोग कभी मुंबई जाते थे तो उनके लिए शीरमाल और कबाब लेकर जाते थे।
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वासिया इब्राहिम के बताया कि चाचा फजल हलीम और दिलीप कुमार दोस्त थे। इसलिए दोनों के संबंध एक परिवार की तरह थे। जब भी दिलीप कुमार कानपुर या आसपास के जिलों में आते तो इनके घर जरूर आते थे। तारिक इब्राहिम ने बताया कि दिलीप कुमार शूटिंग के अलावा पूरा समय घर परिवार के बीच ही देना पसंद करते थे।
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ऐसे में जब पुरानी बातें छिड़तीं तो घंटों की फुर्सत हो जाती थी। एक बार जो भी कोई उनसे मिलता तो फैन हो जाता था। उनके स्वभाव को लेकर चर्चाएं हमेशा होती रहती हैं। हम लोगों के मुंबई जाने पर शूटिंग से छूटते ही मिलने घर आते थे।
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वह मीट खाने के ज्यादा शौकीन थे। उनके आने पर नॉनवेज पार्टी होती थी। उन्हें कानपुर का शीरमाल और कबाब बहुत पसंद था। जब हम लोग कभी मुंबई जाते थे तो उनके लिए शीरमाल और कबाब लेकर जाते थे।
आखिरी बार 1980 में आए थे कानपुर
तारिक इब्राहिम ने बताया कि वह आखिरी बार 1980 में कानपुर आए थे। इससे पहले 1961 और 1972 में स्वरूप नगर स्थित महमूद हलीम के घर आए थे। हलीम शिक्षण संस्थानों और मुस्लिम एसोसिएशन के संस्थापक हाफिज मुहम्मद हलीम के पुत्र महमूद हलीम थे। महमूद हलीम के दामाद तारिक इब्राहिम हैं। उनके आने की खबर मिलते ही परिवार में एक अलग सा उत्साह लोगों में छा जाता था। वह लोगों के बीच हंसी-खुशी का माहौल बनाने में बहुत माहिर थे।
राजू श्रीवास्तव ने जताया शोक
फिल्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के चेयरमैन राजू श्रीवास्तव ने फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार के निधन पर शोक जताया। कहा कि दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का निधन फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति है। वह काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
तारिक इब्राहिम ने बताया कि वह आखिरी बार 1980 में कानपुर आए थे। इससे पहले 1961 और 1972 में स्वरूप नगर स्थित महमूद हलीम के घर आए थे। हलीम शिक्षण संस्थानों और मुस्लिम एसोसिएशन के संस्थापक हाफिज मुहम्मद हलीम के पुत्र महमूद हलीम थे। महमूद हलीम के दामाद तारिक इब्राहिम हैं। उनके आने की खबर मिलते ही परिवार में एक अलग सा उत्साह लोगों में छा जाता था। वह लोगों के बीच हंसी-खुशी का माहौल बनाने में बहुत माहिर थे।
राजू श्रीवास्तव ने जताया शोक
फिल्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के चेयरमैन राजू श्रीवास्तव ने फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार के निधन पर शोक जताया। कहा कि दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का निधन फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति है। वह काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।