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Kanpur News: डिजिटल ओवरलोड कर रहा युवाओं को मानसिक बीमार

Mon, 17 Nov 2025 02:26 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 17 Nov 2025 02:26 AM IST
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Digital overload is making young people mentally ill
कानपुर। तकनीक के बढ़ते दौर में युवा अब डिजिटली ओवरलोड हो रहे हैं। इससे युवा मानसिक बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। इससे न केवल नींद में गड़बड़ी या भावनात्मक असंतुलन हो रहा है बल्कि संवाद क्षमता भी घटती जा रही है। पारिवारिक या सामाजिक तनाव झेल रहे युवाओं में डिजिटल लोड का बढ़ना और भी घातक साबित हो रहा है।
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यह बात छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के डीन प्रो. संदीप कुमार सिंह ने विवि में एचसीडी (इंट्रोडक्शन टू ह्यूमन सेंटर्ड डिजाइन) पर आयोजित कार्यशाला में कही। कार्यशाला में स्वास्थ्य से जुड़ीं चुनौतियों, उनके कारणों और समाधान पर मंथन हुआ। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि पॉलीवाल डायग्नोस्टिक सेंटर के प्रबंध निदेशक डॉ. उमेश पालीवाल, विशिष्ट अतिथि विटामिन एंजेल्स के प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर प्रतीक तिवारी और स्कूल के डीन प्रो. संदीप कुमार सिंह ने किया।
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प्रतीक तिवारी ने एचसीडी के सिद्धांतों की जानकारी दी। डॉ. उमेश पालीवाल ने रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं और नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि एचसीडी न केवल स्वास्थ्य प्रणाली को संवेदनशील बनाता है बल्कि नवाचार और दक्षता को भी बढ़ाता है। इस मौके पर डॉ. शरद दीक्षित, डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. मानस उपाध्याय, डॉ. अंशु सिंह, डॉ. प्रियंका शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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मंथन से निकले ये सुझाव
डिजिटल वेलनेस और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना
स्क्रीन टाइम कम करने के लिए डिजिटल रूटीन, ब्रेक रिमाइंडर और टेक फ्री समय को अपनाना
-सोशल मीडिया के दबाव को कम करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां विकसित करना
-डिजिटल आदतों में सुधार के लिए नवाचारपूर्ण समाधान तैयार करना मसलन एप आधारित मॉनीटरिंग, समय-सीमा निर्धारण और सकारात्मक डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देने वाली तकनीक।
-मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए नीतिगत सुझाव देना ताकि संस्थागत और सामुदायिक स्तर पर मानसिक कल्याण को बढ़ावा मिल सके।
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