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बीडीसी सदस्य सीटों का आरक्षण गलत होने की जांच करेंगे डीडी चित्रकूट मंडल
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कानपुर देहात। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान मलासा विकासखंड की 40 बीडीसी सदस्य सीटों का आरक्षण गलत करने में दोषी ठहराए गए डीपीआरओ व बाबू के मामले में नया मोड़ आ गया है। शासन ने मामले में डीपीआरओ समेत अन्य अफसरों भूमिका को भी संदेह के घेरे में मानते हुए चित्रकूट धाम मंडल के उपनिदेशक पंचायत को जांच सौंपी है।
इसी साल अप्रैल में जिले की 7851 ग्राम पंचायत सदस्य समेत जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान आदि पदों पर पंचायत चुनाव कराया गया था। अनंतिम आरक्षण सूची जारी होने के बाद मलासा ब्लॉक की बीडीसी सीट के लिए कोई आपत्ति दाखिल नहीं हुई थी। जिसके चलते अंतिम आरक्षण मेें भी किसी तरह का बदलाव न होने की बात कही गई, लेकिन चुनाव से पहले ही मलासा ब्लॉक की 40 क्षेत्र पंचायत सीटों में अचानक बदलाव हो गया।
सियासी गलियारे में हड़कंप मचा तो अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए तत्काल में लिपिक अशोक कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया था। डीएम ने मामले की जांच सीडीओ सौम्या पांडेय को दी थी। सीडीओ की रिपोर्ट में आरक्षण गलत होने में डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह व कनिष्ठ लिपिक सुरेंद्र बहादुर कुशवाहा को दोषी ठहराया गया।
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डीएम ने डीपीआरओ व लिपिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट पंचायती राज निदेशक लखनऊ को रिपोर्ट भेजी थी। जिस पर निदेशक ने लिपिक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश डीपीआरओ को दिए थे। जो अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ी है।
वहीं गलत आरक्षण में डीपीआरओ व अन्य अफसरों की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है। जिसके चलते शासन ने अब दूसरे जिले के अधिकारी से जांच कराने का फैसला लिया है। फिलहाल मामले की जांच चित्रकूट धाम मंडल के उपनिदेशक पंचायत को सौंपी गई है।
निदेशक के पत्र पर भी डीपीआरओ ने दोषी लिपिक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की, इस बारे में जानकारी कराई जाएगी। गलत आरक्षण होने की जांच चित्रकूट धाम मंडल के डीडी पंचायत को दी गई है। - अभय कुमार शाही, उपनिदेशक पंचायत, कानपुर मंडल
शासन से गलत आरक्षण होने की जांच मिली है, लेकिन डीपीआरओ के खिलाफ अभी तक आरोप पत्र नहीं दिया गया है। जिसके कारण जांच नहीं हो पा रही है। - दिनेश सिंह, जांच अधिकारी/उपनिदेशक पंचायत, चित्रकूट मंडल
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इसी साल अप्रैल में जिले की 7851 ग्राम पंचायत सदस्य समेत जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान आदि पदों पर पंचायत चुनाव कराया गया था। अनंतिम आरक्षण सूची जारी होने के बाद मलासा ब्लॉक की बीडीसी सीट के लिए कोई आपत्ति दाखिल नहीं हुई थी। जिसके चलते अंतिम आरक्षण मेें भी किसी तरह का बदलाव न होने की बात कही गई, लेकिन चुनाव से पहले ही मलासा ब्लॉक की 40 क्षेत्र पंचायत सीटों में अचानक बदलाव हो गया।
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सियासी गलियारे में हड़कंप मचा तो अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए तत्काल में लिपिक अशोक कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया था। डीएम ने मामले की जांच सीडीओ सौम्या पांडेय को दी थी। सीडीओ की रिपोर्ट में आरक्षण गलत होने में डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह व कनिष्ठ लिपिक सुरेंद्र बहादुर कुशवाहा को दोषी ठहराया गया।
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डीएम ने डीपीआरओ व लिपिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट पंचायती राज निदेशक लखनऊ को रिपोर्ट भेजी थी। जिस पर निदेशक ने लिपिक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश डीपीआरओ को दिए थे। जो अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ी है।
वहीं गलत आरक्षण में डीपीआरओ व अन्य अफसरों की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है। जिसके चलते शासन ने अब दूसरे जिले के अधिकारी से जांच कराने का फैसला लिया है। फिलहाल मामले की जांच चित्रकूट धाम मंडल के उपनिदेशक पंचायत को सौंपी गई है।
निदेशक के पत्र पर भी डीपीआरओ ने दोषी लिपिक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की, इस बारे में जानकारी कराई जाएगी। गलत आरक्षण होने की जांच चित्रकूट धाम मंडल के डीडी पंचायत को दी गई है। - अभय कुमार शाही, उपनिदेशक पंचायत, कानपुर मंडल
शासन से गलत आरक्षण होने की जांच मिली है, लेकिन डीपीआरओ के खिलाफ अभी तक आरोप पत्र नहीं दिया गया है। जिसके कारण जांच नहीं हो पा रही है। - दिनेश सिंह, जांच अधिकारी/उपनिदेशक पंचायत, चित्रकूट मंडल