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हत्या के जुर्म में नौ लोगों को उम्रकैद
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 16 Apr 2015 03:33 AM IST
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50 रुपये को लेकर वर्ष 2001 में हुई हत्या के नौ दोषियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुना दी है। बुधवार को अपने फैसले में कोर्ट ने इन सब पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। मुकदमे के वादी की गवाही और जिरह पांच साल तक चली।
उधर बचाव पक्ष के वकीलों की सजा में राहत देने की बात को कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हत्या निर्मम तरीके से की गई है, इसलिए राहत नहीं दी जा सकती।
गांव सपई बिधनू निवासी बाबू यादव ने गांव के ही हरनाम सिंह, उसके बेटे इंद्र बहादुर सिंह और घनश्याम सिंह, वीरेंद्र और उसके भाई लल्ली सिंह, जय करन सिंह, झल्लर सिंह, बागीपुरवा निवासी शिवनाथ यादव, चालू यादव उर्फ रामचंद्र, मचहला निवासी झंडे यादव और पप्पू यादव उर्फ कपूरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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इसमें कहा गया था कि देशी दर्जी वादी बाबू यादव से दूध लेता था। हरनाम सिंह के बेटों ने देशी दर्जी से कहा था कि बाबू यादव के दूध के पचास रुपये उन्हें दे। इसी बात की जानकारी होने पर बाबू यादव का इन लोगों से झगड़ा हो गया था। नौ जुलाई 2001 को रात 11 बजे बाबू यादव का 27 साल का बेटा आजाद ट्यूबवेल पर सो रहा था।
तभी इन लोगों ने एक राय होकर बर्छी से गोदकर आजाद की हत्या कर दी। यह मामला एडीजे 2 अनुपम कुमार की की कोर्ट में चल रहा था। शासकीय अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी ने बताया कि मुकदमे के ट्रायल के दौरान हरनाम सिंह, पप्पू यादव उर्फ कपूरे की मौत हो गई।
अन्य नौ अभियुक्तों के मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने गवाहों और सबूतों के आधार पर इंद्र बहादुर सिंह और उसके भाई घनश्याम सिंह, वीरेंद्र और उसके भाई लल्ली सिंह, जय करन सिंह, झल्लर सिंह, बागीपुरवा निवासी शिवनाथ यादव, चालू यादव उर्फ रामचंद्र, मचहला निवासी झंडे यादव को सजा सुनाई। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि वादी के बयान और जिरह 2003 से 2008 तक चली।
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उधर बचाव पक्ष के वकीलों की सजा में राहत देने की बात को कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हत्या निर्मम तरीके से की गई है, इसलिए राहत नहीं दी जा सकती।
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गांव सपई बिधनू निवासी बाबू यादव ने गांव के ही हरनाम सिंह, उसके बेटे इंद्र बहादुर सिंह और घनश्याम सिंह, वीरेंद्र और उसके भाई लल्ली सिंह, जय करन सिंह, झल्लर सिंह, बागीपुरवा निवासी शिवनाथ यादव, चालू यादव उर्फ रामचंद्र, मचहला निवासी झंडे यादव और पप्पू यादव उर्फ कपूरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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इसमें कहा गया था कि देशी दर्जी वादी बाबू यादव से दूध लेता था। हरनाम सिंह के बेटों ने देशी दर्जी से कहा था कि बाबू यादव के दूध के पचास रुपये उन्हें दे। इसी बात की जानकारी होने पर बाबू यादव का इन लोगों से झगड़ा हो गया था। नौ जुलाई 2001 को रात 11 बजे बाबू यादव का 27 साल का बेटा आजाद ट्यूबवेल पर सो रहा था।
तभी इन लोगों ने एक राय होकर बर्छी से गोदकर आजाद की हत्या कर दी। यह मामला एडीजे 2 अनुपम कुमार की की कोर्ट में चल रहा था। शासकीय अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी ने बताया कि मुकदमे के ट्रायल के दौरान हरनाम सिंह, पप्पू यादव उर्फ कपूरे की मौत हो गई।
अन्य नौ अभियुक्तों के मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने गवाहों और सबूतों के आधार पर इंद्र बहादुर सिंह और उसके भाई घनश्याम सिंह, वीरेंद्र और उसके भाई लल्ली सिंह, जय करन सिंह, झल्लर सिंह, बागीपुरवा निवासी शिवनाथ यादव, चालू यादव उर्फ रामचंद्र, मचहला निवासी झंडे यादव को सजा सुनाई। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि वादी के बयान और जिरह 2003 से 2008 तक चली।