धर्मनगरी में CM योगी: बोले- 2014 से पहले लोगों ने भरा था पाप का घड़ा, खर-दूषण का हुआ सफाया, जानें क्या कहा
Chitrakoot Nikay Chunav: सीएम योगी बोले कि भगवान श्रीराम इसी तपोभूमि पर साधना करते थे। कुछ लोग तो ऐसे होते हैं, जो अपने पाप से घड़ा इतना भर लेते हैं कि जगह नहीं होती। ऐसे ही कुछ लोगों ने 2014 के पहले घड़ा भरा था।
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चित्रकूट जिले के रामायण मेला परिसर में निकाय चुनाव प्रचार को लेकर सीएम योगी पहुंचे। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर कहकर चित्रकूट के सभी जनता जनार्दन को पूज्य संतों को मेरा प्रणाम।
इस जगह कितना महत्व है, जहां तुलसीदास जी को भगवान हनुमान जी की कृपा से लक्ष्मण जी को राम जी के दर्शन हुए थे। पुराने समय में प्रधानमंत्री खुद पूरे देश में अकेले निकलते थे। अमृत महोत्सव की बारी आई, तो पूरे देश में एक साथ एकत्र होकर के महोत्सव में शामिल होने का काम किया था।
विरासत का हो रहा है सम्मान
भारत में आज क्या नहीं है। एक्सप्रेस हाईवे बन गए हैं, रेलवे की नई-नई लाइनें बिछ रही हैं। मेट्रो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का बेहतरीन माध्यम हो रहा है। एयरपोर्ट बन रहे हैं। बड़े-बड़े संस्थान तैयार हो रहे हैं। विरासत का सम्मान हो रहा है काशी में बाबा विश्वनाथ धाम, अयोध्या में भगवान श्री राम का मंदिर बनकर तैयार हो रहा है।
हम पुरातन पहचान के साथ आगे बढ़ रहे हैं
अब मथुरा की बारी है और हम फिर से अपनी पुरातन पहचान को बनाए रखने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यह चित्रकूट धाम है। इसके साथ ही इस धरती को सौभाग्य है कि महर्षि बाल्मीकि की जन्मभूमि भी लालापुर में है। तुलसीदास जी की पावन धरती राजापुर, चित्रकूट में है संस्कृत का पहला मौलिक ग्रंथ त्रिकालदर्शी लिखा था।
खर-दूषण का हुआ है सफाया
उन्होंने आगे कहा कि मैं जब छह साल पहले चित्रकूट आया था, तो पूछा कि इतना पिछड़ा हुआ क्यों है... तो लोगों ने कहा कि छह बजे के बाद यहां शाम को लोग निकलते नहीं है। मैंने पूछा ऐसा कौन सा खर-दूषण आ गया है। हमारे नेताओं की सक्रियता से उनका भी सफाया हुआ है।
जहां संयम होगा, वहीं होगी साधना
सीएम योगी ने कहा कि चित्रकूट की भूमि संयम की धरती है, जहां संयम होगा वही साधना हो सकती है। प्रभु श्रीराम ने इसी चित्रकूट में 14 वर्ष के वनवास के सर्वाधिक समय साधना की थी। यहां लाखों की संख्या मे आने वाले श्रद्धालु मंदाकिनी में डुबकी लगाकर कामतानाथ की परिक्रमा करके धन्य होते हैं।
उत्तरप्रदेश में भी था पहचान का संकट
कुछ लोग अपने कृत्यों से पाप का घड़ा इतना भर लेते है कि स्वयं के लिए पहचान का संकट पैदा करते ही है। साथ ही समाज के लिए भी पहचान का संकट पैदा कर देते है। 2017 के पहले यही पहचान का संकट उत्तरप्रदेश में भी पैदा कर दिया गया था।
आजादी के अमृत वर्ष में देखें लीडरशिप
देश का लीडरशिप कैसे होना चाहिए उसको देखना हो, तो आजादी के अमृत वर्ष मे देखना चाहिए। प्रधानमंत्री जी ने हर घर तिरंगा अभियान चलाकर लोकतंत्र के पर्व का अहसास करवाया। कोरोना के समय प्रधानमंत्री जी अकेले निकलते थे, जीवन बचाने के लिए।