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बूचड़खाने की मुहिम में मुर्गा, बकरे के मीट पर झटका
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 22 Mar 2017 11:52 PM IST
सार
होटल व बिरयानी की दुकानों पर बिक्री ठप होने का पड़ा असर
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विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर अवैध तरीके से चलाए जा रहे बूचड़खाने बंद किए जाने की मुहिम के साथ ही बुधवार को कस्बे में मुर्गा और बकरे के मीट के अलावा बड़े जानवरों का मीट मिलना बंद हो गया। इससे इन कारोबारियों से जुड़े कई होटल व बिरयानी की दुकानों पर भी इसका असर पड़ने लगा है।
नगर पालिका परिषद में नियमानुसार पंजीकृत मीट कारोबारियों के 11 लाइसेंसी धारक हैं। जबकि बकरे के मीट के कारोबारी मात्र तीन ही पंजीकृत हैं। वहीं, मछली की बिक्री करने वाली पांच दुकानदार पंजीकृत हैं।
इन सबका पंजीयन शुल्क 31 मार्च 2017 तक जमा है। जबकि इनके लिए पालिका परिषद ने अभी तक कई वर्षों से शुल्क लेने के बावजूद न तो अलग से दुकानें बनवाई हैं और न ही इनकी मनमानी पर कोई ध्यान दिया है। जिसकी वजह से यह अपने-अपने सुविधानुसार बकरा व बड़े जानवर का वध कर मीट बिक्री कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के नए आदेश के साथ ही बुधवार को बकरे मीट के व्यापारियों के अलावा कस्बे में बडे़े जानवरों के मीट नहीं मिल सका। इसके शौकीन लोग व कारोबारी परेशान घूम रहे हैं। इतना ही नहीं बिरयानी के शौकीनों ने भी अब मुर्गे की बिरयानी की तरफ रुख किया है जो महंगी पड़ती है।
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नगर पालिका परिषद में नियमानुसार पंजीकृत मीट कारोबारियों के 11 लाइसेंसी धारक हैं। जबकि बकरे के मीट के कारोबारी मात्र तीन ही पंजीकृत हैं। वहीं, मछली की बिक्री करने वाली पांच दुकानदार पंजीकृत हैं।
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इन सबका पंजीयन शुल्क 31 मार्च 2017 तक जमा है। जबकि इनके लिए पालिका परिषद ने अभी तक कई वर्षों से शुल्क लेने के बावजूद न तो अलग से दुकानें बनवाई हैं और न ही इनकी मनमानी पर कोई ध्यान दिया है। जिसकी वजह से यह अपने-अपने सुविधानुसार बकरा व बड़े जानवर का वध कर मीट बिक्री कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के नए आदेश के साथ ही बुधवार को बकरे मीट के व्यापारियों के अलावा कस्बे में बडे़े जानवरों के मीट नहीं मिल सका। इसके शौकीन लोग व कारोबारी परेशान घूम रहे हैं। इतना ही नहीं बिरयानी के शौकीनों ने भी अब मुर्गे की बिरयानी की तरफ रुख किया है जो महंगी पड़ती है।
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मीट कारोबारी महसूस कर रहे ठगा सा
मौदहा में बंद पड़ा स्लाटर हाउस।
मौदहा कस्बे में छिमौली मार्ग पर वर्षों पुराना नगर पालिका का स्लाटर हाउस है। जीर्णशीर्ण अवस्था में होने की वजह से इसका नया निर्माण भी कराया गया। लेकिन मानक के अनुरूप न होने से पर्यावरण व प्रदूषण विभाग ने नगर पालिका के इस वधशाला के संचालन की अनुमति नहीं दी। तबसे इसके लिए कोई प्रयास नहीं हुए। इस इमारत में न तो फाटक है और न ही पानी की व्यवस्था। यहां तक इसका संपर्क मार्ग भी अभी तक चिन्हित नहीं है। ऐसे हालात में कई वर्षों से वधशाला का इस्तेमाल ही नहीं हुआ और मीट के कारोबारी अपनी ही बस्तियों में पशुवध कर मीट की बिक्री करते चले आ रहे हैं। जहां बुधवार से पशुवध होना बंद हो गया। इससे जुड़े लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। जहां इन्हें उम्मीद है कि वह नगर पालिका के अधिकृत मीट विक्रेता व कारोबारी हैं। वहीं इनका कहना है कि स्लाटर हाउस बनवाना नगर पालिका की जिम्मेदारी बनती है।