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Kanpur News: जेन जी का दिमाग पढ़ेगा सीएसजेएमयू
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कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय जेन जी का दिमाग पढ़ेगा। वे किस तरह सोचते हैं और उनका नजरिया क्या रहता है? सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक समेत अन्य बदलावों को किस तरह से देखते हैं? सभी पहलुओं का पता लगाया जाएगा। इसके लिए दस टीमें गठित हुई हैं। प्रथम वर्ष के साढ़े सात हजार विद्यार्थियों पर अध्ययन किया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के साइकोलॉजिकल टूल्स का इस्तेमाल होगा।
कुलपति प्रो. विनय पाठक ने अध्ययन की जिम्मेदारी स्कूल आफ आर्ट, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज को दी है। निर्देशक डॉ. अमित मिश्रा की निगरानी में सेंटर फॉर वेल बीइंग के प्रभारी डॉ. सृजन श्रीवास्तव और डॉ. दुर्गा यादव की अगुवाई में टीमें काम करेंगी। यह जेन जी की सोच के साथ ही उनकी मानसिकता और धारणाओं के संबंध में पता लगाएगी। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि जेन जी के अध्ययन के लिए 10 टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक सदस्य साइकोलॉजिकल टूल के जरिये जेन जी के मिजाज का अध्ययन करेंगे। टूल्स विश्व स्वास्थ्य संगठन के हैं। यह अपने तरह का प्रदेश का पहला अध्ययन होगा। यह युवा हुई नई पीढ़ी के सोच की दिशा, दशा और विभिन्न पहलुओं को परखेगा।
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पापा-मम्मी अच्छे लगते या तन्हाई
विशेषज्ञों के मुताबिक शोध में यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि जेन जी में सिंगल चाइल्ड की क्या मनोदशा रहती है। उन्हें मम्मी के साथ अधिक खुशी मिलती है या पापा के साथ। या फिर दोनों को छोड़कर तन्हाई पसंद है। इससे सामाजिक दृष्टिकोण की जानकारी मिल सकेगी।
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स्क्रीन एडिक्शन रहेगा शामिल
इस अध्ययन में एक महत्वपूर्ण बिंदु स्क्रीन एडिक्शन काे भी शामिल किया गया है। जेन जी से जाना जाएगा कि उन्हें मोबाइल फोन, लैपटॉप की स्क्रीन में कितने घंटे समय बिताना अच्छा लगता है। वह किस नजरिये से इसे देखते हैं। वे अपनी समस्याओं के हल करने की पहल कहां से करते हैं। अवसाद और तनाव का स्तर भी पता चलेगा।
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अध्ययन टीम का खाका
- अध्ययन सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाएगा
- प्रत्येक टीम में सात सदस्य होंगे
- हर टीम एक प्रोफेसर की निगरानी में रहेगी
- जेन जी से एक प्रश्नावली प्रपत्र भरवाया जाएगा
- प्रपत्र में विभिन्न पहलुओं से संबंधित प्रश्न होंगे
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कुलपति प्रो. विनय पाठक ने अध्ययन की जिम्मेदारी स्कूल आफ आर्ट, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज को दी है। निर्देशक डॉ. अमित मिश्रा की निगरानी में सेंटर फॉर वेल बीइंग के प्रभारी डॉ. सृजन श्रीवास्तव और डॉ. दुर्गा यादव की अगुवाई में टीमें काम करेंगी। यह जेन जी की सोच के साथ ही उनकी मानसिकता और धारणाओं के संबंध में पता लगाएगी। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि जेन जी के अध्ययन के लिए 10 टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक सदस्य साइकोलॉजिकल टूल के जरिये जेन जी के मिजाज का अध्ययन करेंगे। टूल्स विश्व स्वास्थ्य संगठन के हैं। यह अपने तरह का प्रदेश का पहला अध्ययन होगा। यह युवा हुई नई पीढ़ी के सोच की दिशा, दशा और विभिन्न पहलुओं को परखेगा।
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पापा-मम्मी अच्छे लगते या तन्हाई
विशेषज्ञों के मुताबिक शोध में यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि जेन जी में सिंगल चाइल्ड की क्या मनोदशा रहती है। उन्हें मम्मी के साथ अधिक खुशी मिलती है या पापा के साथ। या फिर दोनों को छोड़कर तन्हाई पसंद है। इससे सामाजिक दृष्टिकोण की जानकारी मिल सकेगी।
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स्क्रीन एडिक्शन रहेगा शामिल
इस अध्ययन में एक महत्वपूर्ण बिंदु स्क्रीन एडिक्शन काे भी शामिल किया गया है। जेन जी से जाना जाएगा कि उन्हें मोबाइल फोन, लैपटॉप की स्क्रीन में कितने घंटे समय बिताना अच्छा लगता है। वह किस नजरिये से इसे देखते हैं। वे अपनी समस्याओं के हल करने की पहल कहां से करते हैं। अवसाद और तनाव का स्तर भी पता चलेगा।
अध्ययन टीम का खाका
- अध्ययन सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाएगा
- प्रत्येक टीम में सात सदस्य होंगे
- हर टीम एक प्रोफेसर की निगरानी में रहेगी
- जेन जी से एक प्रश्नावली प्रपत्र भरवाया जाएगा
- प्रपत्र में विभिन्न पहलुओं से संबंधित प्रश्न होंगे