अमृत महोत्सव: चंद्रशेखर आजाद ने काका जी को दिया था ग्रेनेड, कोलकाता से लाते थे क्रांतिकारियों के लिए हथियार
आजादी के आंदोलन में काका जी का योगदान नहीं भुलाया जा सकता है। मेस्टन रोड पर काका जी की दुकान थी। वो क्रांतिकारियों के लिए कोलकाता से हथियार लाते थे। चंद्रशेखर आजाद ने काका जी को एक ग्रेनेड दिया था, जो आज भी लखनऊ के संग्रहालय में रखा है।
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आजादी में क्रांतिकारियों ने जहां अंग्रेजों से लोहा लिया था। वहीं उनकी मदद करने वालों का योगदान भी कम नहीं था। मेस्टन रोड पर चौक वाले मोड़ पर काका वॉच शाप के नाम से दुकान चलाने वाले सोहन लाल अवस्थी (काका जी) क्रांतिकारियों को हथियार सप्लाई करते थे। वह कोलकाता से घड़ी का सामान लेने जाते तो वहां के क्रांतिकारियों को हथियार देते और वहां से कारतूस और अन्य हथियार लेकर शहर आते थे।
काका जी के पोते पांडु नगर निवासी दिनेश अवस्थी ने बताया कि 1920 में दादा जी कोलकाता में वेस्ट एंड वॉच कंपनी में नौकरी करने गए थे। वहीं पर उनका क्रांतिकारियों से संपर्क हुआ था। 1922 में कानपुर लौटने के बाद उनका संपर्क पुरुषोत्तम दास टंडन से हुआ। उसी के बाद वह कांग्रेस में सक्रिय हुए और क्रांतिकारियों की मदद करने लगे। 1932 में जेल जाने के बाद उनकी पत्नी जमुना देवी की मौत हो गई थी।
अंग्रेजों से अंतिम संस्कार करने के लिए पेरोल मांगी, तो उन्होंने माफी मांगने की शर्त रखी। काका जी ने माफी नहीं मांगी, तो उनके बिना आए ही पत्नी का अंतिम संस्कार हो गया था। बताया जाता है कि एक बार क्रांतिकारियों की मदद करने की वजह से कोतवाली इंस्पेक्टर शंभू दयाल गुप्ता ने काका जी को दुकान के बाहर पीटा था। वह 1930, 1932, 1941 और 1942 में वह जेल भी गए थे। 17 सितंबर 1987 को काका जी की मौत हो गई थी।
ग्रेनेड रखा है संग्रहालय में
चंद्रशेखर आजाद ने काका जी को एक हैंड ग्रेनेड और पांच वेब्ले स्कॉट रिवाल्वर दी थी। जेल जाते वक्त रिवाल्वर को उन्होंने काहूकोठी के रहने वाले गणेशी अग्रवाल को दी थी, जो कि उनके घर से चोरी हो गई थी। वहीं ग्रेनेड को काका जी ने 1974 में उप्र के मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा को सौंपा, जो कि आज भी लखनऊ के संग्रहालय में रखा है।
काका जी ने बसाया पांडु नगर
पांडु नगर हाउसिंग सोसाइटी के संस्थापक सोहन लाल अवस्थी थे। वर्ष 1949 में कानपुर नगर महापालिका से रजिस्ट्री कराई गई थी। यहां पर 82 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को प्लॉट दिए गए थे। वह कानपुर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी समिति के उपाध्यक्ष भी थे। कांग्रेस में भी सक्रिय रहे। इनको इंदिरा गांधी ने ताम पत्र भी दिया था।