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CBSE 12th Result 2018: असफलता से न हों निराश, सीख लेकर आगे बढ़ें 

Sat, 26 May 2018 01:29 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 26 May 2018 01:29 PM IST
सार

-रिजल्ट अच्छा न आने पर अभिभावक बच्चों को उलाहना न दें 
-मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र ने छात्र-छात्राओं से की अपील
 

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CBSE Intermediate Results declared
डेमाे पिक

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) इंटर का रिजल्ट जारी हो चुका है। एेसे में जिन छात्रों के कम नंबर आएं हैं उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है बल्कि परीक्षा परिणाम से सबक लेकर भविष्य को बेहतर करने का यह अच्छा मौका है।

 




 

CBSE Intermediate Results declared
डेमाे पिक

मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र चुन्नीगंज के प्रभारी एलके सिंह ने अभिभावकों  से अपील की है कि कम नंबर आने पर बच्चों को उलाहना न दें बल्कि प्यार से समझाएं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक दो नहीं कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने बोर्ड परीक्षाओं में तो कम अंक हासिल किया लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सफलता की नई इबारतें लिखीं हैं।

हाईस्कूल या इंटर में कम नंबर लाने वाले भी आईएएस-पीसीएस अफसर बने हैं और कम नंबर पाने वाले एक दो नहीं सैकड़ों लोग देश के दिग्गज कारोबारियों में शुमार हैं। बस आपके हौसलों में जान होनी चाहिए। सफलता आपके कदम चूमेगी। जिस क्षेत्र में भी आपका मन लगे उसी को अपना कॅरियर बनाएं और माता-पिता से खुलकर बात करें सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
 

रिजल्ट के दौरान बच्चों के साथ रहें परिजन

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परीक्षा परिणाम का दिन परीक्षार्थियों के लिए काफी मुश्किल भरा और तनावग्रस्त होता है। क्यों कि इस समय साल भर की पढ़ाई का नतीजा सामने होता है। कुछ बच्चों को परीक्षा परिणाम बेहतर होता है तो कुछ का काफी निराशाजनक होता है। इस स्थिति में परिजनों की भूमिका बेहद अहम होती है। अगर परीक्षा परिणाम खराब आए तो बच्चों डांटें नहीं। इसके साथ ही बच्चों से बातचीत करें और उसे अकेला नहीं छोड़ें।
 
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बच्चा गुमसुम तो गंभीरता से लें 

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अगर परीक्षा परिणाम के बाद बच्चा गुमसुम सा हो गया है। खाने-पीने में मन नहीं लग रहा और एकांत की ओर भाग रहा है। किसी से बातचीत करना उसे अच्छा नहीं लग रहा है तो यह संकेत ठीक नहीं हैं। इस हालात में परिजन बच्चों के साथ रहें और उनसे बातचीत करें। बच्चे के कंधे पर हाथ रखें और साथ खड़े होकर कहें कि जिंदगी से बड़ा कोई रिजल्ट नहीं होता। उठो और आगे के बारे में सोचो। ऐसे रास्ते के बारे में सोचो जो तुम्हे बेहतर कल की ओर ले जाए। हार के बाद भी जीत संभव है, अगर तुम दिमाग की परीक्षा से गुजरना बंद नहीं करो।

 
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ये भी ध्यान रखें 

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डेमाे पिक
- अपने बच्चों की दूसरों से तुलना न करें 
- तीन दिनों तक बच्चों को डांटें नहीं और उनके साथ रहें
- बच्चों को विश्वास में लें और उनसे बातचीत करें
- बच्चों के साथ मूवी देखें, बाहर खाना खाएं और समय बिताएं
- बच्चों को प्रोत्साहित व समर्थन करें न कि घर को जंग का मैदान बनाएं
- परिजन बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी बनने से बचें
- बच्चों की इच्छाओं को समझें और उसी दिशा में कॅरियर बनाने की सलाह दें
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