दुष्कर्म के आरोपी की मौत का मामला: शरीर से टपक रहा था खून, पुलिस ने नहीं कराया अस्पताल में भर्ती
- दुष्कर्म के आरोपी की हत्या में पुलिस भी जिम्मेदार
- मरणासन्न हालत में था सुबोध, नहीं कराया था इलाज
- वीडियो व फोटो से पुलिस की लापरवाही का खुलासा
- अफसर सीएचसी के डॉक्टरों पर फोड़ रहे हैं ठीकरा
विस्तार
पुलिस की लापरवाही और अनदेखी का खुलासा वीडियो फुटेज और फोटो से हुआ है, जिसे ग्रामीणों ने अमर उजाला को उपलब्ध कराए हैं। पुलिस अफसर अब पूरा ठीकरा सीएचसी के डॉक्टरों पर फोड़ रहे हैं। सचेंडी के एक गांव में शुक्रवार रात सुबोध पर दुष्कर्म व हत्या के प्रयास का केस दर्ज हुआ था। शनिवार सुबह युवती के परिजनों और ग्रामीणों ने सुबोध को जमकर पीटा था। पुलिस ने उसको चौबेपुर स्थित अस्थायी जेल भेजा था, जहां देर रात मौत हो गई थी।
ग्रामीणों ने घटना के तमाम वीडियो बनाए थे। पिटाई के बाद सुबोध मरणासन्न हालत में पड़ा दिखाई दे रहा है। उसके माथे पर गहरा जख्म और पैंट, शर्ट खून से सनी थी। पुलिस कर्मी खुद उसको उठाकर जीप में लादकर ले गए थे। सवाल है कि पुलिस सुबोध को तत्काल हैलट क्यों नहीं ले गए। खानापूरी के लिए मेडिकल कराया और उसको जेल भेज दिया। सुबोध की मौत के पीछे पुलिस की बहुत बड़ी लापरवाही रही है।
एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि जब सुबोध को लाया गया था तो वह बातचीत कर रहा था। उठने बैठने के साथ चल फिर रहा था। वीडियो जब सामने आए तो पुलिस का झूठ उजागर हो गया। पुलिस को सीएचसी के बजाय सीधे किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए था। सवाल है कि आखिर पुलिस अफसर सचेंडी पुलिस की लापरवाही पर क्यों पर्दा डाल रहे हैं।
क्या डॉक्टरों की तय होगी जिम्मेदारी
पुलिस के मुताबिक सीएचसी में सुबोध की हालत सामान्य बताई गई थी। इसी बात का अफसर हवाला दे रहे हैं कि अगर डॉक्टर ने सलाह दी होती तो उसको तुरंत भर्ती कराया जाता। हालांकि वीडियो से पुलिस की लापरवाही तो उजागर हो गई है। अब देखना होगा कि क्या मेडिकल करने वाले डॉक्टरों की कोई जिम्मेदारी तय की जाएगी या नहीं।
घटना के संबंध में तमाम तथ्य सामने आ रहे हैं। एक-एक तथ्यों की जांच की जा रही है। अगर किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
डॉ. प्रीतिंदर सिंह, डीआईजी