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अपने ही झूठ में उलझी पुलिस: मानवाधिकार आयोग को नहीं दी हिरासत में मौत की जानकारी, उठ रहे सवालों से खलबली
Thu, 18 Jul 2024 09:44 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 18 Jul 2024 09:44 PM IST
सार
Jalaun News: पुलिस अभिरक्षा में मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सवाल उठाए हैं। आयोग की कड़ी आपत्ति के बाद पुलिस में खलबली है।
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मृतक राजकुमार के शरीर पर चोटों के निशान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अपने ही गुनाहों पर पर्दा डालने की नाकाम कोशिश जालौन पुलिस के लिए मुसीबत का सबब बनती जा रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया तो पुलिस महकमे में हडकंप मचा गया। आयोग ने 24 घंटे के अंदर पुलिस द्वारा पूरी रिपोर्ट न देने पर कड़ी नाराजगी जताई है।
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डकोर थाने में अभिरक्षा के दौरान युवक की मौत पर पर्दा डालने, तथ्यों को छुपाने, परिजनों का यातना देने पर आयोग ने नाराजगी जताई है। पीडित पक्ष के परिजनों के बयान बदलवा कर वीडियो जारी करवाने को भी आयोग ने गंभीरता से लिया है। मामले से जुडे सभी बिंदुओ पर एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश जालौन पुलिस को दिया है। आयोग ने कहा कि जालौन में पुलिस हिरासत में यातना के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला लेकर बताया कि पुलिसकर्मी पीड़ित राजकुमार के शव को बिना बताए जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड के बाहर छोड़कर भाग गए। कथित तौर पर, घटना को छिपाने के प्रयास में, उन्होंने मृतक के परिवार के सदस्यों को भी अवैध रूप से पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा।
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आयोग ने पाया है कि पीड़ित और उसके परिवार के मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। मीडिया रिपोर्ट देखकर लगता है कि पुलिसकर्मियों ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया। पीड़ित के परिवार के सदस्यों को कथित तौर पर उत्पीड़न और अवैध हिरासत का शिकार होना पड़ा, जो चिंता का विषय है। इसलिए प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को दो सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
आयोग ने यह भी गौर किया है कि जालौन पुलिस अधिकारियों ने 24 घंटे के भीतर पुलिस हिरासत में मौत के बारे में अपने स्थायी दिशानिर्देशों के अनुसार उसे अभी तक कोई सूचना नहीं भेजी है। इसलिए पुलिस अधीक्षक, जालौन को एक सप्ताह के भीतर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि हिरासत में की सूचना 24 घंटे के भीतर आयोग को क्यों नहीं दी गई।
आयोग ने यह भी गौर किया है कि जालौन पुलिस अधिकारियों ने 24 घंटे के भीतर पुलिस हिरासत में मौत के बारे में अपने स्थायी दिशानिर्देशों के अनुसार उसे अभी तक कोई सूचना नहीं भेजी है। इसलिए पुलिस अधीक्षक, जालौन को एक सप्ताह के भीतर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि हिरासत में की सूचना 24 घंटे के भीतर आयोग को क्यों नहीं दी गई।
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आयोग ने पत्र के माध्यम से कहा कि जैसा कि समाचार रिपोर्ट में बताया गया है, ड्यूटी डॉक्टर ने इमरजेंसी वार्ड के सामने एक शव देखकर एक वार्ड बॉय को पुलिस स्टेशन को सूचित करने के लिए भेजा। हालाँकि, कथित तौर पर पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया। अस्पताल कर्मचारियों के विरोध के बाद ही उन्हें रिहा किया गया। कथित तौर पर, मृतक के शरीर पर चोट के निशान थे, जबकि पुलिस का दावा है कि हत्या के मामले में वांछित व्यक्ति बीमार था और गिरफ्तारी के बाद पुलिस स्टेशन में बीमारी के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
नोटिस के बारे में जानकारी नहीं
प्रभारी एसपी प्रदीप कुमार वर्मा का कहना है कि अभी उन्हें इस नोटिस के बारे में कोई जानकारी प्राप्त नही है। नए एसपी आने तक इस मामले में जो भी नई जानकारी होगी वह साझा की जाएगी।
नोटिस के बारे में जानकारी नहीं
प्रभारी एसपी प्रदीप कुमार वर्मा का कहना है कि अभी उन्हें इस नोटिस के बारे में कोई जानकारी प्राप्त नही है। नए एसपी आने तक इस मामले में जो भी नई जानकारी होगी वह साझा की जाएगी।