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गैंगस्टर पप्पू को पेशी पर लाने का मामला: कोर्ट मोहर्रिर और गारद में शामिल दोनों पुलिसकर्मी जांच में दोषी
Sun, 14 Aug 2022 09:40 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 14 Aug 2022 09:40 AM IST
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यूपी पुलिस
- फोटो : सोशल मीडिया
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बिना तारीख के तलबी वारंट जारी कर गैंगस्टर पप्पू स्मार्ट को कचहरी लाने के मामले में कोर्ट मोहर्रिर व गारद में शामिल पुलिसकर्मी जांच में दोषी पाए गए हैं। हालांकि किसी तरह की साजिश की बात सामने नहीं आई है। इन पर विभागीय कार्रवाई के साथ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा सकती है।
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चकेरी में 20 जून 2020 को हिस्ट्रीशीटर व बसपा नेता पिंटू सेंगर की हत्या हुई थी। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता पप्पू स्मार्ट समेत 14 आरोपियों को जेल भेजा था। पप्पू स्मार्ट पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई थी। 25 जुलाई को तलबी वारंट पर पप्पू को कोर्ट लाया गया था। पता चला था कि उस दिन पेशी की तारीख ही नहीं थी। उसकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मी उसे चार घंटे घुमाते रहे थे। मामले का संज्ञान लेकर ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ने जांच के आदेश दिए थे।
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इसलिए ठहराए गए दोषी
10 जून को पप्पू की पेशी थी। इस दिन 22 जुलाई की तारीख पेशी के लिए तय की गई। 22 को पेशी भी हुई। इस बीच 24 जुलाई की तारीख भी रजिस्टर में दर्ज कर दी गई। इसी तारीख का तलबी वारंट जारी हो गया। चूंकि इस दिन रविवार था, इसलिए 25 जुलाई को जेल से कोर्ट लाया गया। जांच में सामने आया कि 24 तारीख लगाकर कोर्ट मोहर्रिर ने तलबी वारंट जारी करवाया था। इसलिए उसे दोषी ठहराया गया। तारीख न होने के बाद भी पप्पू ने चार घंटे तक कचहरी में रहकर परिवार वालों व एक अपराधी से मुलाकात की थी। इसलिए उनकी अभिरक्षा में लगे दोनों पुलिसकर्मी भी दोषी ठहराए गए हैं।
पहले ऐसा नहीं हुआ
जांच के दौरान जेल व कोर्ट से तमाम जानकारी जांच अधिकारी ने जुटाई। देखा गया कि क्या पहले कभी पप्पू स्मार्ट व उसके गिरोह के किसी सदस्य को इस तरह से बिना तलबी वारंट कोर्ट लाया गया। इस संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिला। कई और अपराधियों का भी विवरण खंगाला तो उसमें भी ऐसी बात सामने नहीं आई।
10 जून को पप्पू की पेशी थी। इस दिन 22 जुलाई की तारीख पेशी के लिए तय की गई। 22 को पेशी भी हुई। इस बीच 24 जुलाई की तारीख भी रजिस्टर में दर्ज कर दी गई। इसी तारीख का तलबी वारंट जारी हो गया। चूंकि इस दिन रविवार था, इसलिए 25 जुलाई को जेल से कोर्ट लाया गया। जांच में सामने आया कि 24 तारीख लगाकर कोर्ट मोहर्रिर ने तलबी वारंट जारी करवाया था। इसलिए उसे दोषी ठहराया गया। तारीख न होने के बाद भी पप्पू ने चार घंटे तक कचहरी में रहकर परिवार वालों व एक अपराधी से मुलाकात की थी। इसलिए उनकी अभिरक्षा में लगे दोनों पुलिसकर्मी भी दोषी ठहराए गए हैं।
पहले ऐसा नहीं हुआ
जांच के दौरान जेल व कोर्ट से तमाम जानकारी जांच अधिकारी ने जुटाई। देखा गया कि क्या पहले कभी पप्पू स्मार्ट व उसके गिरोह के किसी सदस्य को इस तरह से बिना तलबी वारंट कोर्ट लाया गया। इस संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिला। कई और अपराधियों का भी विवरण खंगाला तो उसमें भी ऐसी बात सामने नहीं आई।