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फर्रुखाबाद: डीएम कार्यालय के बाहर युवक ने जहर खाया, वजह हैरान कर देगी

Wed, 23 Jan 2019 06:50 PM IST
दुष्यंत शर्मा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 23 Jan 2019 06:50 PM IST
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boy try to commit suicide in front of dm office
लोहिया अस्पताल में दीपक का इलाज करते डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला
यूपी के फर्रुखाबाद जिले में कलक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय के बाहर बुधवार को एक युवक ने जहर खा लिया। लोहिया अस्पताल में उसने ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक पर बीस हजार रुपये लेने के बाद भी लोन न देने का आरोप लगाया। बताया गया कि युवक दो बैंकों का डिफाल्टर है। इसके चलते उसका लोन मंजूर नहीं हुआ।
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मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव गैसिंगपुर निवासी दीपक पुत्र कुंवरपाल मंगलवार पूर्वाह्न 11 बजे कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी से शिकायत करने पहुंचा। उसने दरवाजे पर खड़े कर्मचारी से डीएम से मिलने की बात कही। इस पर कर्मचारी ने कुछ देर रुकने को कहा तो उसने जहर खा लिया। उसके गिरते ही अफरातफरी मच गई। 
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डीएम भी अपने कार्यालय से बाहर निकल आईं। उन्होंने तत्काल होमगार्ड के साथ कार से उसे लोहिया अस्पताल भेज दिया। वहां होश आने पर उसने कर्नलगंज चौकी इंचार्ज हरिओम त्रिपाठी को बताया कि उसने एक वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से पांच लाख रुपये लोन के लिए आवेदन किया था। उसकी फाइल लोन के लिए मुरहास स्थित ग्रामीण बैंक शाखा पहुंची। वहां के शाखा प्रबंधक ने लोन कराने के नाम पर उससे बीस हजार रुपये ले लिए। अभी तक लोन नहीं हो सका। कई बार शिकायत के बाद भी लोन न होने पर उसने डाई व चूहे मार दवा खा ली। इससे कुछ देर पहले उसने मैंडेक्स की गोली खाई।
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लोहिया अस्पताल में दीपक का इलाज करते डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक सत्तार हुसैन ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी हुई है। इस पर मुरहास ग्रामीण बैंक के प्रबंधक अरविंद आर्या से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि दीपक की फाइल उनके पास आई थी। इस पर उन्होंने जांच की। इसमें पता चला कि उसने सकवाई स्थित आईडीबीआई बैंक शाखा से केसीसी से 52 हजार, डेयरी के लिए 50 हजार, माइक्रो स्कीम के तहत 40 हजार का लोन ले रखा है। इसके अलावा अपनी पत्नी ज्योति के नाम से एक लाख रुपये कर्ज आईडीबीआई से लिया है। यह सभी लोन वर्ष 2016-17 में लिए थे। अरविंद ने बताया कि उनकी बैंक से भी दीपक ने 36 हजार रुपये केसीसी से लोन 2015 में लिया था। वह खाता एनपीए हो गया है। दीपक जो आरोप लगा रहा है वह गलत है। उस पर गांव के लोगों का भी कर्ज है। इससे वह परेशान है।  

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण रोजगार योजना के तहत दीपक ने आवेदन किया था। उसकी फाइल तीन बार लोन के लिए बैंक भेजी गई। पर दो बैंकों का डिफाल्टर होने से उसका लोन मंजूर न होने पर फाइल वापस आ गई।
   
इमरजेंसी में छोड़कर चला गया होमगार्ड
जहर खाने के बाद दीपक के साथ एक होमगार्ड को गाड़ी से कलक्ट्रेट से भेजा गया। होमगार्ड ने उसे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा दिया। इसके बाद होमगार्ड वहां से चला गया। स्वास्थ्य कर्मचारी कागजों पर जहर खाने वाले व्यक्ति का नाम लिखने के लिए होमगार्ड को खोजते रहे। पर वह नहीं मिला। बाद में दीपक के कुछ होश में आने पर उसका नाम पता चल सका।
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