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UP: कानपुर समेत कई शहरों में हुए थे बम धमाके, करीम टुंडा बरी...कोर्ट ने दो आतंकवादियों को माना दोषी

Thu, 29 Feb 2024 01:31 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 29 Feb 2024 01:31 PM IST
सार

Kanpur News: कानपुर समेत कई शहरों में हुए बम धमाकों के मामले की सुनवाई पूरी हो गई है। 30 साल बाद राजस्थान के अजमेर जिले की टाडा मामलों का विशेष न्यायालय ने फैसला सुनाया है। 

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There were bomb blasts in many cities including Kanpur, Karim Tunda acquitted, Court found two terrorists guil
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद छह दिसंबर 1993 को कानपुर व लखनऊ समेत चार महानगरों में ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में राजस्थान के अजमेर स्थित टाडा मामलों के विशेष न्यायालय में चल रही सुनवाई पूरी हो गई है। इस मामले में 30 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए करीम टुंडा को बरी कर दिया है। 

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वहीं, इरफान और हमीमुद्दीन को दोषी माना है। अब्दुल करीम टुंडा के एडवोकेट शफकत सुल्तानी ने बताया कि सीबीआई कोर्ट द्वारा लगाए गए आरोप कोर्ट ने नहीं माने और करीब को बरी कर दिया। वहीं, अन्य दो आरोपी इरफान और हमीमुद्दीन को न्यायालय ने दोषी माना है, उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई है।
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बता दें कि मामले में हापुड़ जिले के कस्बा पिलखुवा का रहने वाले अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के अलावा इरफान और हमीमुद्दीन को आरोपी बनाया गया है। बम धमकों के बाद टुंडा फरार हो गया था और 2013 में नेपाल सीमा से पकड़ा गया था। जांच में दावा किया गया था कि टुंडा आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का विस्फोटक विशेषज्ञ था।

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने 1996 में हुए बम धमाकों में भी टुंडा को आरोपी बनाया गया था। साल 2000 में टुंडा के बांग्लादेश में मारे जाने की बात सामने आई। वहीं, लेकिन साल 2005 में दिल्ली में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अब्दुल रज्जाक मसूद से अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के जिंदा होने की जानकारी मिली, तो एजेंसियों ने फिर से उसकी तलाश शुरू कर दी।

देशभर में करीब 40 बम धमाके करने का आरोप
साल 2001 में संसद भवन पर हुए हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से जिन 20 आतंकियों के प्रत्यर्पण की मांग की थी, उनमें टुंडा का नाम भी शामिल था। बताया जाता है कि टुंडा के खिलाफ तीन दर्जन से ज्यादा मामले देश के अलग अलग हिस्सों में दर्ज हैं। 1997-98 में उस पर देशभर में करीब 40 बम धमाके करने का आरोप देशभर में करीब 40 बम धमाके करने का आरोप है।

कानपुर से पकड़ा गया था टुंडा का साथी जलीस
टुंडा ने मुंबई के रहने वाले जलीस अंसारी, नांदेड़ के आजम गौरी और टुंडा ने तंजीम इस्लाम उल मुसलमीन संगठन बनाकर हैदराबाद, मालेगांव, पुणे, अजमेर में भी बम धमाके किए। इस मामले में आरोपी जलीस एक मामले में पेरोल मिलने के बाद फरार हो गया था और महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के संयुक्त अभियान में कानपुर नगर के फेथफुलगंज में पकड़ा गया था।

अजमेर में होती है उत्तर भारत के टाडा मामलों की सुनवाई
टाडा कानून के तहत पकड़े जाने वाले आरोपियों की सुनवाई के लिए देश में केवल तीन विशेष अदालतें हैं। ये अदालतें अजमेर, मुंबई और श्रीनगर में हैं। उत्तर भारत से जुड़े अधिकांश मामलों की सुनवाई अजमेर स्थित टाडा अदालत में होती है।

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