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विश्व के सबसे प्रदूषित शहर कानपुर में फर्जीवाड़े का ये खुलासा आपको भी हैरान कर देगा
Sat, 13 Apr 2019 11:34 AM IST
शिखा पांडेय
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 13 Apr 2019 11:34 AM IST
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कल्याणपुर थाने के सामने महीनों से खड़ी बस और ट्रक, दोनों वाहनों के प्रदूषण की जांच के प्रमाणपत्र
- फोटो : अमर उजाला
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दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषित कानपुर बनने के पीछे लोगों के साथ ही सरकारी विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। आरटीओ दफ्तर भी उनमें से एक है। दफ्तर वाहनों के प्रदूषण की जांच कर प्रमाण पत्र देता है, पर हकीकत में बिना जांचे ही प्रमाण पत्र जारी कर देता है। ऐसा ही एक मामला सामने है।
थाने में महीनों से बंद बस और ट्रक के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। मात्र 200 रुपये में इन दोनों वाहनों की बिना जांच प्रदूषण की जांच कर दी गई। इससे पहले भी इस तरह के फर्जीवाड़े का खुलासा हो चुका है। प्रदूषण जांच केंद्रों को कई बार नोटिस देने के बाद भी सुधार नहीं हुआ है। आरटीओ दफ्तर हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
एक व्यक्ति ने एआरटीओ प्रशासन आदित्य त्रिपाठी से शिकायत की कि कुछ प्रदूषण जांच केंद्र बिना जांच के वाहनों के प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। इस पर एआरटीओ ने कहा कि यह उनकी जानकारी में है लेकिन कोई ठोस सबूत न मिलने के कारण प्रदूषण जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाते हैं।
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थाने में महीनों से बंद बस और ट्रक के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। मात्र 200 रुपये में इन दोनों वाहनों की बिना जांच प्रदूषण की जांच कर दी गई। इससे पहले भी इस तरह के फर्जीवाड़े का खुलासा हो चुका है। प्रदूषण जांच केंद्रों को कई बार नोटिस देने के बाद भी सुधार नहीं हुआ है। आरटीओ दफ्तर हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
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एक व्यक्ति ने एआरटीओ प्रशासन आदित्य त्रिपाठी से शिकायत की कि कुछ प्रदूषण जांच केंद्र बिना जांच के वाहनों के प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। इस पर एआरटीओ ने कहा कि यह उनकी जानकारी में है लेकिन कोई ठोस सबूत न मिलने के कारण प्रदूषण जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाते हैं।
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इस व्यक्ति ने एआरटीओ को सबूत देने के लिए कहा। इसके बाद एक जांच केंद्र से थाने में महीनों से बंद ट्रक नंबर एमएच 46 एआर 6321 और बस नंबर यूपी 78 बीटी 0451 के प्रदूषण की जांच कर प्रमाणपत्र बनाने के लिए संपर्क किया।
केंद्र संचालक को बताया गया कि ट्रक और बस बाहर गए हैं। इसलिए जांच के लिए केंद्र पर नहीं ला सकते। केंद्र संचालक ने दोनों वाहनों की नंबर प्लेट की फोटो खींच कर लाने और दो सौ रुपये की डिमांड की। नंबर प्लेट की फोटो और दो सौ रुपये देने पर प्रदूषण नियंत्रित प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इन प्रमाणपत्रों पर बाला जी पर्यावरण समिति की मुहर लगी है।
प्रमाणपत्र जारी करने की तारीख 11 अप्रैल 2019 लिखी है। वैधता की तारीख 10 अक्टूबर 2019 लिखी है। अब गौर करें, यह दोनों वाहन महीनों से कल्याणपुर थाने में विभिन्न कारणों से बंद हैं। दोनों प्रमाणपत्र की फोटो कॉपी एआरटीओ प्रशासन को दी गई है।
केंद्र संचालक को बताया गया कि ट्रक और बस बाहर गए हैं। इसलिए जांच के लिए केंद्र पर नहीं ला सकते। केंद्र संचालक ने दोनों वाहनों की नंबर प्लेट की फोटो खींच कर लाने और दो सौ रुपये की डिमांड की। नंबर प्लेट की फोटो और दो सौ रुपये देने पर प्रदूषण नियंत्रित प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इन प्रमाणपत्रों पर बाला जी पर्यावरण समिति की मुहर लगी है।
प्रमाणपत्र जारी करने की तारीख 11 अप्रैल 2019 लिखी है। वैधता की तारीख 10 अक्टूबर 2019 लिखी है। अब गौर करें, यह दोनों वाहन महीनों से कल्याणपुर थाने में विभिन्न कारणों से बंद हैं। दोनों प्रमाणपत्र की फोटो कॉपी एआरटीओ प्रशासन को दी गई है।
आरटीओ दफ्तर ठेंगे पर
जिले में प्रदूषण जांच के लिए 35 केंद्रों को मान्यता मिली थी। जांच में अनियमितता मिलने, मौके पर बंद मिलने, मानक पूरे न करने पर 14 प्रदूषण जांच केंद्रों के लाइसेंस निरस्त/निलंबित कर दिए गए हैं। अब 21 प्रदूषण जांच केंद्र चल रहे हैं। बिना प्रदूषण की जांच के थाने में बंद वाहनों के जारी प्रमाणपत्रों पर बाला जी पर्यावरण समिति की मुहर लगी है। इस केंद्र के संचालक मुकेश गुप्ता हैं।
एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि मुकेश गुप्ता के तीन प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हैं। यह श्रीबाला जी पर्यावरण समिति बर्रा विश्व बैंक कालोनी (केंद्र जूही में), बाला जी पर्यावरण समिति रेलवे लाइन स्वराज आश्रम सर्वोदय नगर और सोमदेव पर्यावरण समिति विनायकपुर हैं। 15 मार्च को बालाजी पर्यावरण समिति को नोटिस दिया गया था। इस जांच केंद्र ने 7-8 भारी वाहनों के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी किए थे।
इनमें जांच का समय सुबह 10 से दोपहर तीन बजे तक लिखा था। नगर निगम के नियम के अनुसार सुबह आठ से दोपहर तीन बजे तक भारी वाहनों का प्रवेश शहर में नहीं हो सकता। समिति का दफ्तर आरटीओ दफ्तर के पास है। ऐसे में भारी वाहन शहर में आए ही नहीं तो जांच कैसे हो गई। इस नोटिस का जवाब नहीं मिला है। चार अप्रैल को सोमदेव पर्यावरण समिति को नोटिस दिया गया था। इसमें एक ही नंबर पर दो-दो वाहन के प्रदूषण जांच के प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए थे।
जिले में प्रदूषण जांच के लिए 35 केंद्रों को मान्यता मिली थी। जांच में अनियमितता मिलने, मौके पर बंद मिलने, मानक पूरे न करने पर 14 प्रदूषण जांच केंद्रों के लाइसेंस निरस्त/निलंबित कर दिए गए हैं। अब 21 प्रदूषण जांच केंद्र चल रहे हैं। बिना प्रदूषण की जांच के थाने में बंद वाहनों के जारी प्रमाणपत्रों पर बाला जी पर्यावरण समिति की मुहर लगी है। इस केंद्र के संचालक मुकेश गुप्ता हैं।
एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि मुकेश गुप्ता के तीन प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हैं। यह श्रीबाला जी पर्यावरण समिति बर्रा विश्व बैंक कालोनी (केंद्र जूही में), बाला जी पर्यावरण समिति रेलवे लाइन स्वराज आश्रम सर्वोदय नगर और सोमदेव पर्यावरण समिति विनायकपुर हैं। 15 मार्च को बालाजी पर्यावरण समिति को नोटिस दिया गया था। इस जांच केंद्र ने 7-8 भारी वाहनों के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी किए थे।
इनमें जांच का समय सुबह 10 से दोपहर तीन बजे तक लिखा था। नगर निगम के नियम के अनुसार सुबह आठ से दोपहर तीन बजे तक भारी वाहनों का प्रवेश शहर में नहीं हो सकता। समिति का दफ्तर आरटीओ दफ्तर के पास है। ऐसे में भारी वाहन शहर में आए ही नहीं तो जांच कैसे हो गई। इस नोटिस का जवाब नहीं मिला है। चार अप्रैल को सोमदेव पर्यावरण समिति को नोटिस दिया गया था। इसमें एक ही नंबर पर दो-दो वाहन के प्रदूषण जांच के प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए थे।
जिले में 12.91 लाख वाहन
जिले में बढ़ते वाहन भी प्रदूषण का कारण हैं। इस समय जिले में 12 लाख 91 हजार 501 वाहन हैं। इसमें नौ लाख 81 हजार 755 मोटर साइकिल, स्कूटर, 34 हजार 685 मोपेड, एक लाख 98 हजार 863 कार, 13 हजार 894 कृषि काम के लिए ट्रैक्टर, 28 हजार 577 गुड्स कैरियर, एक हजार व्यावसायिक ट्रैक्टर, यात्री ढोने वाले थ्री व्हीलर 7057, सामान ढोने वाले थ्री व्हीलर 4667, बस 2026, मोटर कैब 2534 शामिल हैं।
जिले में बढ़ते वाहन भी प्रदूषण का कारण हैं। इस समय जिले में 12 लाख 91 हजार 501 वाहन हैं। इसमें नौ लाख 81 हजार 755 मोटर साइकिल, स्कूटर, 34 हजार 685 मोपेड, एक लाख 98 हजार 863 कार, 13 हजार 894 कृषि काम के लिए ट्रैक्टर, 28 हजार 577 गुड्स कैरियर, एक हजार व्यावसायिक ट्रैक्टर, यात्री ढोने वाले थ्री व्हीलर 7057, सामान ढोने वाले थ्री व्हीलर 4667, बस 2026, मोटर कैब 2534 शामिल हैं।
थाने में बंद वाहनों का प्रदूषण जांच का प्रमाणपत्र जारी होना गंभीर है। केंद्र संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को केंद्र का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की जाएगी। - आदित्य त्रिपाठी, एआरटीओ प्रशासन