औरैया जिले में कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से यमुना नदी का जलस्तर पिछले कई दिनों से निरंतर बढ़ रहा था। शनिवार शाम को जलस्तर के स्थिर होने के बाद रविवार सुबह करीब एक मीटर पानी घट जाने से लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं कीचड़ ने लोगों की दुश्वरियां बढ़ा दी है। यही नहीं गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुसने के चलते प्रशासन की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर बिजली कटवा दी गई थी, लेकिन इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई गई। इससे बाढ़ प्रभावित गांव अस्ता, नौरी, क्योंटरा, फरिहा, सिकरोड़ी समेत 23 गांवों में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। इससे घरों में मौजूद लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
Auraiya Flood Update: यमुना का जलस्तर घटा, कीचड़ ने बढ़ाई दुश्वरियां, प्रशासन के व्यवस्था दुरस्त के दावे फेल
यमुना के बढ़े जलस्तर से अजीतमल व औरैया तहसील क्षेत्र के करीब 20 गांवों में पानी ने भयंकर तबाही मचाई। घरों में पानी भर जाने की वजह से ग्रामीणों को गांव के बाहर तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर थे। रविवार सुबह तक करीब एक मीटर घटे जलस्तर से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। पानी घटने के साथ कीचड़, मिट्टी कटान व जमीन के धस जाने से ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ गईं हैं। कुछ घरों से पानी निकल जाने के बाद से लोग घरों से कीचड़ निकालते दिखे। वहीं कुछ घरों में अभी भी पानी भरा हुआ है। जलभराव की वजह से लोगों के पक्के मकानों में दरारें व चटकन आ गई हैं। इससे लोगों को कच्चे मकान गिरने का डर सता रहा है।
अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर ग्रामीण
गांवों में पानी भरने पर विद्युत विभाग के करंट फैलने के खतरे को देखते हुए कई गांवों की विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई थी। इससे ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। फरिहा निवासी शैलू सेंगर, अशोक सेंगर, लोकेंद्र चौहान व सुधीर चौहान ने बताया कि बाढ़ के साथ कई वन्य जीव व जहरीले कीड़े गांव में आ गए हैं। विद्युत आपूर्ति बंद करने के बाद रात में प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं की गई। रात में अंधेरा होने की वजह से हमेशा किसी अनहोनी का डर सताता रहता है।
पीने के पानी की किल्लत
बाढ़ के पानी में हैंडपंप व कुएं डूब जाने की वजह से पीने के पानी की समस्या से लोग परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पीने के पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई।
समस्या का नहीं हुआ निदान
अस्ता गांव के प्रधान अखिलेश पांडेय ने बताया कि यमुना का जल स्तर कम होने के बाद भी अभी भी लगभग सैंकड़ों मकानों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। लोग अपने-अपने घरों की छतों पर सामान रखकर रूके हुए हैं। जिला प्रशासन की ओर से गांव में बिजली व्यवस्था के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो जनरेटर लगाया गया है और न ही सौर ऊर्जा की लाइटें। बाढ़ के पानी में काफी मात्रा में जहरीले कीड़े घरों के आसपास आ गए हैं। इससे ग्रामीणों को शाम होते ही जहरीले कीड़ों का डर सताने लगता है।