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Auraiya News: जंगली सुअर और नीलगाय के झुंड ने मक्का की फसल उजाड़ी
Sun, 13 Sep 2026 12:51 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 13 Sep 2026 12:51 AM IST
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फोटो -24- खेतों में उजड़ी पड़ी मक्का की फसल। संवाद
फफूंद। क्षेत्र के गांव चिरैयापुर में जंगली सुअरों और नीलगाय के झुंड ने किसानों की मक्का की फसल को नुकसान पहुंचाया है। कई दिनों से रात होते ही जंगली सुअर और नीलगाय खेतों में घुसकर मक्का की फसल और भुट्टे खा रहे हैं। किसानों के अनुसार अब तक 40 से 60 फीसदी तक फसल बर्बाद हो चुकी है। फसल बचाने के लिए किसान पूरी रात खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं।
किसानों ने बताया कि गांव के किनारे से निकली सेंगर नदी के आसपास और बाजरा के खेतों में नीलगाय व जंगली सुअरों के झुंड दिन में छिपे रहते हैं। रात होते ही ये मक्का के खेतों में पहुंच जाते हैं। किसानों के शोर मचाने पर कुछ देर के लिए भागते हैं लेकिन मौका मिलते ही दोबारा खेतों में घुसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। गांव निवासी किसान नाथूराम कुशवाह की दो बीघा, मुकेश की चार, रमेश की साढ़े तीन, धर्मेंद्र की चार, रामसरन पाल की पांच, राम आसरे की ढाई, गोपाल की पौन, रामकुमार की आधा, भारत सिंह पाल की सवा, बाबूराम की दो और गणेश की एक बीघा समेत कई किसानों की मक्का की फसल प्रभावित हुई है। किसान नाथूराम कुशवाह ने बताया कि एक बीघा मक्का की फसल में लगभग 10 हजार की लागत आती है।
तैयार होने के समय जंगली सुअर और नीलगाय सबसे ज्यादा नुकसान कर रहे हैं। रात भर जागने के बावजूद झुंड खेत में घुस जाता है। किसान मुकेश ने बताया कि मक्का की फसल में लागत और मेहनत लगने के बाद अब 40 से 60 प्रतिशत तक नुकसान हो चुका है। किसान रामसरन पाल ने बताया कि लगातार रखवाली के कारण रातों की नींद हराम हो गई है। किसानों ने जिला प्रशासन से जंगली सुअरों और नीलगाय के आतंक से निजात दिलाने तथा फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित कार्रवाई की मांग की है।
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किसानों ने बताया कि गांव के किनारे से निकली सेंगर नदी के आसपास और बाजरा के खेतों में नीलगाय व जंगली सुअरों के झुंड दिन में छिपे रहते हैं। रात होते ही ये मक्का के खेतों में पहुंच जाते हैं। किसानों के शोर मचाने पर कुछ देर के लिए भागते हैं लेकिन मौका मिलते ही दोबारा खेतों में घुसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। गांव निवासी किसान नाथूराम कुशवाह की दो बीघा, मुकेश की चार, रमेश की साढ़े तीन, धर्मेंद्र की चार, रामसरन पाल की पांच, राम आसरे की ढाई, गोपाल की पौन, रामकुमार की आधा, भारत सिंह पाल की सवा, बाबूराम की दो और गणेश की एक बीघा समेत कई किसानों की मक्का की फसल प्रभावित हुई है। किसान नाथूराम कुशवाह ने बताया कि एक बीघा मक्का की फसल में लगभग 10 हजार की लागत आती है।
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तैयार होने के समय जंगली सुअर और नीलगाय सबसे ज्यादा नुकसान कर रहे हैं। रात भर जागने के बावजूद झुंड खेत में घुस जाता है। किसान मुकेश ने बताया कि मक्का की फसल में लागत और मेहनत लगने के बाद अब 40 से 60 प्रतिशत तक नुकसान हो चुका है। किसान रामसरन पाल ने बताया कि लगातार रखवाली के कारण रातों की नींद हराम हो गई है। किसानों ने जिला प्रशासन से जंगली सुअरों और नीलगाय के आतंक से निजात दिलाने तथा फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित कार्रवाई की मांग की है।
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