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सिख विरोधी दंगा: चार दंगाइयों की तलाश में एसआईटी की दबिश, सभी हुए फरार, पड़ोसियों का भी पहचानने से इनकार

Sat, 18 Jun 2022 07:06 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 18 Jun 2022 07:06 AM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगे के आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू हो गई है। इस बीच एसआईटी ने चार दंगाइयों की तलाश में दबिश दी, लेकिन सभी पहले ही फरार हो गए। उनको पड़ोसियों ने भी पहचानने से इनकार कर दिया।

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Anti-Sikh riots, SIT raids in search of four rioters, all absconding, neighbors also refuse to be recognized
सिख दंगा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के सिख विरोधी दंगे में शामिल एसआईटी ने गुरुवार रात चार और आरोपियों की तलाश में घाटमपुर, बर्रा और नौबस्ता क्षेत्र में छापेमारी की। गिरफ्तारी के डर से पहले ही आरोपी फरार हो चुके थे। एसआईटी ने पड़ोसियों से पूछताछ करने की कोशिश की तो उन्होंने आरोपियों को पहचानने से ही मना कर दिया। 

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एसआईटी आरोपियों के फोन नंबर निकालने में जुटी है। वहीं पूर्व राज्यमंत्री शिवनाथ सिंह के भतीजे राघवेंद्र सिंह कुशवाहा की तलाश में कबरई गई एसआईटी लौट आई है। डीआईजी एसआईटी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। उसकी तरफ से कोर्ट में जो अर्जी दी गई है, उसकी रिपोर्ट एसआईटी कोर्ट में दाखिल करेगी।
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1984 में दंगों के दौरान निराला नगर में रक्षपाल सिंह, भूपेंद्र सिंह और सतवीर सिंह की भीड़ ने हत्या कर दी थी। केस में एसआईटी ने बुधवार को चार आरोपियों को जेल भेजा था। मुख्य आरोपी राघवेंद्र सिंह कुशवाहा फरार है। एसआईटी ने 31 आरोपियों की धरपकड़ की तैयारी में है।

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पूर्व पार्षद भी आरोपी, एसआईटी ने दी दबिश फरार 
एसआईटी ने सिख विरोधी दंगे में दबौली निवासी तीन बार के पार्षद को भी आरोपी बनाया है। दबौली और गोविंद नगर में हुए नरसंहार में उसकी अहम भूमिका बताई गई है। पूर्व पार्षद को प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी बनाया गया है। गुरुवार रात एसआईटी ने उसके घर में दबिश दी लेकिन वह फरार हो गया। सिख विरोधी दंगों में कई कांग्रेसी, बीजेपी, पूर्व डीजीसी समेत कई नामी लोग आरोपी बनाए गए हैं। 11 केसों में कुल 96 लोगों को आरोपी बनाया गया है, इसमें से 22 की मृत्यु हो चुकी है। 74 में चार पकड़े जा चुके हैं। 20 आरोपी बेहद बीमार व बुजुर्ग हैं। अन्य पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

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