अमर उजाला पड़ताल: 1000 करोड़ गए गड्ढों में, लाखों लोग हिचकोले खाते हुए चलने के लिए मजबूर, इनकी भी स्थिति खराब
Kanpur News: अधिकारियों का कहना है कि अब जो प्रमुख सड़कें बनवाई जा रही हैं, इन्हें बनाने वाले ठेकेदार को ही पांच साल तक मरम्मत, रखरखाव भी कराना पड़ेगा। शहरवासियों को इसका लाभ मिलेगा।
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कानपुर स्मार्ट सिटी की प्रमुख सड़कों में गड्ढे ही गड्ढे हैं। शहरवासी हिचकोले खाकर सफर करने के लिए मजबूर हैं। जानलेवा सड़कों पर आए दिन हादसे भी हो रहे हैं। यह हालत तब है, जब नगर निगम और पीडब्ल्यूडी चालू वित्तीय वर्ष में सड़कों की मरम्मत और निर्माण के नाम पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। मेट्रो निर्माण स्थलों से जुड़ी सड़कों की भी स्थिति खराब हैं।
जीटी रोड पर अनगिनत गड्ढे
रामादेवी से कल्याणपुर तक जीटी रोड में अनगिनत गड्ढे हैं। गुरुदेव चौराहे से विश्वविद्यालय तक इतने गड्ढे हैं कि सड़क ही कहीं-कहीं नजर आती है। कल्याणपुर क्रासिंग के पास सड़क की गिट्टी तक गायब हो गई है। गुटैया क्रासिंग से गोल चौराहे के बीच जगह-जगह बजरी उखड़ गई है। सीओडी पुल पर भी गड्ढेनजर आ रहे हैं। इस सड़क से रोज एक लाख से ज्यादा वाहन निकलते हैं।
आठ साल से नहीं बनी व्यस्ततम एक्सप्रेस रोड
घंटाघर को नरोना चौराहे पर माल से जोड़ने वाली व्यस्ततम एक्सप्रेस रोड आठ साल से नहीं बनी। इस सड़क में 635 गड्ढे हैं। कई जगह बजरी भी उखड़ गई है। सड़क पर कई बार पैचवर्क कराया गया, पर घटिया निर्माण की वजह से चंद महीनों में ही हालत जस की तस हो गई।
मेट्रो की मनमानी से पांच साल से गड्ढों का पर्याय बनी मकड़ीखेड़ा रोड
जीटी रोड को मकड़ीखेड़ा से जोड़ने वाली सड़क पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन ने पांच साल पहले इस रोड के किनारे कॉस्टिंग यार्ड बनाया था। मेट्रो के भारी वाहन, मशीनें इसी मार्ग से आती-जाती रहीं, जिसकी वजह से डेढ़ फीट तक गहरे गड्ढे हो गए हैं। रोज 20-25 हजार लोग इस ऊबड़-खाबड़ सड़क से आवागमन के लिए मजबूर हैं। यूपीएमआरसी के डिप्टी जीएम (पीआर) पंचानन मिश्रा ने अप्रैल में यह सड़क बनवाने का दावा किया है।
जूही-हमीरपुर रोड पर पैचवर्क के नाम पर खानापूरी
यूपीएमआरसी के ठेकेदार जूही-हमीरपुर रोड से नौबस्ता गल्ला मंडी तक की सड़क में डेढ़ साल से पैचवर्क के नाम पर खानापूरी कर रहे हैं। 24 घंटे पहले इसी सड़क के गड्ढों की वजह से गिरने के बाद केंद्रीय विद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य की मौत हो गई थी। इसके बावजूद भी सोमवार को गड्ढे नहीं भरे गए। क्षेत्रीय पार्षद शालू कनौजिया ने जल्द निर्माण न होने पर धरने पर बैठने की चेतावनी दी।
काकादेव-छपेड़ा पुलिया रोड
जेके मंदिर से छपेड़ा पुलिया तक करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क को पीडब्ल्यूडी बनवाना ही भूल गया। हर साल बरसात के बाद पैचवर्क करा दिया जाता है, वह भी ऊंचा-नीचा होने की वजह से दोपहिया वाहन चलाने में दिक्कत होती है। देवकी चौराहा से छपेड़ा पुलिया चौराहे तक कमोबेश यही हालत है।
वाहन चलने लायक भी नहीं की कल्याणपुर-सिंहपुर रोड
कल्याणपुर को बिठूर से जोड़ने वाले इस चार लेन के मार्ग में जल निगम (शहरी) आठ महीने से गहरी सीवर लाइन बिछवा रहा है। करीब ढाई किलोमीटर हिस्से में सीवरलाइन बिछने के बाद सड़क नहीं बनवाई गई। रुद्रा ग्रींस अपार्टमेंट और सिंहपुर तिराहे के पास सड़क सर्वाधिक खराब है। जल निगम (शहरी) के परियोजना प्रबंधक विशाल सिंह ने बताया कि ठेकेदार को सड़क चलने योग्य बनाने के निर्देश दिए हैं।
पनकी धाम स्टेशन रोड
नमामि गंगे परियोजना के तहत एक साल पहले इस सड़क को खोद कर सीवरलाइन बिछाई गई थी। उसके बाद घटिया पैचवर्क किया गया, जो चंद दिनों में ही उखड़ने लगा था। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। स्टेशन आने-जाने वाली सवारियों से भरे ऑटो, ई-रिक्शे अक्सर पलट जाते हैं।
15 महीने में ही टूटी आठ करोड़ की पनकी नहरिया सीसी रोड
पीडब्ल्यूडी ने पनकी नहर से अरमापुर नहर पटरी तक 1300 मीटर लंबी सीसी रोड तीन साल पहले बनवाई थी। घटिया निर्माण के कारण सड़क पर जगह-जगह दरारें नजर आने लगी हैं। सड़क उखड़ने से कई जगह गड्ढे हो गए हैं। आए दिन ई-रिक्शा पलट जाते हैं।
10 साल से नहीं बनी गंगागंज रोड
पनकी धाम मंदिर से गंगागंज आने-जाने वाली गंगागंज रोड 10 साल से जर्जर है। ग्रामीणों ने बताया कि 10 साल से न तो सड़क बनी और न ही पैचवर्क हुआ। बरसात में जलभराव होता है।
सड़कें प्राथमिकता के आधार पर बनवाई जा रही हैं। समय-समय पर पैचवर्क भी कराया जाता है। सीएम ग्रिड योजना के तहत बन रहीं 10 सड़कें वर्षों ठीक रहेंगी।
-एसएफए जैदी, मुख्य अभियंता, नगर निगम
फिलहाल जीटी रोड पर अस्थायी पैचवर्क कराया जा रहा है। रामादेवी से आईआईटी तक इस रोड की मरम्मत और पांच साल तक रखरखाव के लिए 21 मार्च तक ई-टेंडर पड़ेंगे। इसके बाद यह सड़क गड्ढामुक्त कराई जाएगी।
-अरुण जयंत, अधिशासी अभियंता, एनएच पीडब्ल्यूडी
अब जो प्रमुख सड़कें बनवाई जा रही हैं, इन्हें बनाने वाले ठेकेदार को ही पांच साल तक मरम्मत, रखरखाव भी कराना पड़ेगा। शहरवासियों को इसका लाभ मिलेगा। -अखंडेश्वर प्रसाद, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी
- नगर निगम की पक्की सड़कें- 1219 किलोमीटर
- गड्ढे वाली सड़कों की लंबाई- करीब 59 किलोमीटर
- नगर निगम का सड़कों के मद में बजट- करीब 700 करोड़ रुपये
- इसमें से सीएम ग्रिड योजना में मिला धन- 300 करोड़ रुपये
- नगर निगम निधि- करीब 300 करोड़ रुपये
- 15वें वित्त आयोग से मिला धन- 100 करोड़ रुपये
- पंडित दीनदयाल योजना में मिला धन- 3.5 करोड़ रुपये
- पीडब्ल्यूडी की सड़कें- 246 किलोमीटर
- क्षतिग्रस्त सड़कें- करीब 100 किलोमीटर
- पीडब्ल्यूडी का नगर का बजट- करीब 300 करोड़ रुपये