Kannauj: अखिलेश यादव बोले- भाजपा किसी का भी नाम बदल कर अमृत रख सकती है, वोट से दूर होगी ये बीमारी
जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले में मारे गए श्रमिकों के आश्रितों से सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश ने मुलाकात की। इस दौरान अखिलेश यादवने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा मदद के नाम पर सिर्फ झूठा आश्वासन देती है।
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कन्नौज में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर रविवार को निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एलआईसी बिक गई और एसबीआई डूब रही है। यह देश के लिए बड़ा खतरा है। रविवार को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर अखिलेश यादव ने रामसागर की पत्नी मालती देवी और मुनेश की पत्नी पुष्पा देवी से मुलाकात की।
बता दें कि 17 अक्तूबर 2022 को ठठिया थाना के दन्नापुर्वा निवासी श्रमिक रामसागर वर्मा और मुनेश की जम्मू कश्मीर के शोपियां में आतंकियों ने हमला कर हत्या कर दी थी। दोनों परिवारों को उन्होंने एक-एक लाख की आर्थिक सहायता चेक दी। उन्होंने कहा कि भाजपा मदद के नाम पर सिर्फ झूठा आश्वासन देती है।
भाजपा किसी का भी नाम बदल सकती है
श्रमिकों को 50-50 लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दें। सिर्फ नाम बदलकर भाजपा धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाने का काम कर रही। मुगल गार्डन का नाम बदलने पर उन्होंने कहा कि कल किसी का भी नाम बदल कर भाजपा अमृत रख सकती है। सिर्फ वोट से ही भाजपा नाम की बीमारी दूर होगी।
झोपड़ी में रह रहा परिवार, बच्चों की पढ़ाई पर संकट
जम्मू कश्मीर में आतंकियों के हमले में मारे गए श्रमिकों के परिजनों का दर्द अब सियासत बन गया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से आश्रितों ने कहा कि सरकार अपना वादा नहीं निभा रही। उन्हें आवास, नौकरी और पट्टे का लाभ नहीं दिया गया। परिवार झोपड़ी में रह रहा और बच्चों की पढ़ाई तक नहीं हो पा रही है।
सुब्रत पाठक का नहीं कोई स्टैंडर्ड
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से जब पत्रकारों ने सवाल किए, तो सांसद सुब्रत पाठक का नाम सुनते ही उनके तेवर बदल गए। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद सुब्रत पाठक का कोई स्टैंडर्ड नहीं है। उनके बारे में कोई सवाल न पूछे।
श्रमिकों की मौत बन गया सियासी मुद्दा
सदर तहसील में 21 जनवरी को राज्यमंत्री असीम अरुण, डीएम शुभ्रांत शुक्ल और एसपी कुंवर अनुपम सिंह संपूर्ण समाधान दिवस में जनता की शिकायत सुन रहे थे। इस दौरान फरियाद लेकर पहुंची मृतक श्रमिक मुनेश की पत्नी पुष्पा ने शासन-प्रशासन पर आर्थिक मदद न करने का आरोप लगाया। इस घटना के बाद अब श्रमिकों की मौत का मुद्दे पर सियासी रंग चढ़ने लगा।