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चिंता की बात: अभी नहीं संभले तो सर्दी में फूलेगी सांस, ठंड में पांच गुना ज्यादा बढ़ जाता है हवा में प्रदूषण

Thu, 13 Oct 2022 12:33 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 13 Oct 2022 12:33 PM IST
सार

मौसम की मेहरबानी से पिछले चार दिनों से शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में हवा काफी अच्छी है। शहर में चार स्थानों पर लगाए गए प्रदूषण मापक मीटर में जो रीडिंग दर्ज गई है, उसमें शहर का एक्यूआई 50 से 30 के बीच है। यह स्थिति आगे रहने वाली नहीं है।

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Air pollution increases five times in winter
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ठंड के मौसम में प्रदूषण के लिहाज से शहर की हवा का स्तर कभी भी अच्छा नहीं रहा है। पिछले वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो हवा में प्रदूषण की मात्रा सामान्य से पांच गुना अधिक (500 से लेकर 700 एक्यूआई) रही है। ऐसे में प्रदूषण को कम करने के लिए शासन से जो गाइड लाइन जारी की गई है, उस पर अभी से अमल नहीं किया गया तो इस बार भी सांस लेना दूभर होगा।

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अभी तक इस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। मौसम की मेहरबानी से पिछले चार दिनों से शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में हवा काफी अच्छी है। शहर में चार स्थानों पर लगाए गए प्रदूषण मापक मीटर में जो रीडिंग दर्ज गई है, उसमें शहर का एक्यूआई 50 से 30 के बीच है। यह स्थिति आगे रहने वाली नहीं है।
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यह बात पिछले दिनों पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह ने भी अधिकारियों के साथ बैठक में स्वीकारी है। उन्होंने चेताया है कि ठंड के मौसम में प्रदूषण को रोकने के लिए जो भी विभाग सीधे तौर पर जुड़े हैं, वे लापरवाही बिल्कुल न करें। शासन ने सभी की जिम्मेदारी भी तय की है।

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इन उपायों को अपनाने पर जोर 
- सड़कों पर धूल न उड़े, इसके लिए सड़कें गड्ढा मुक्त की जाएं
- कूड़ा जलाने पर सख्ती से पाबंदी लगाई जाए
- निर्माण सामग्रियों को खुले में न रखा जाए। 
- यदि कहीं निर्माण हो रहा है, सामग्री पर पानी छिड़काव करते रहें।
- 15 साल पुराने वाहनों पर सख्ती से पाबंदी लगाई जाए।
- जाम न लगे, क्योंकि एक स्थान पर बड़ी संख्या में वाहन चालू हालत में खड़े होने से प्रदूषण बढ़ जाता है। 

इन विभागों की है जिम्मेदारी
नगर निगम, केडीए, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, परिवहन विभाग, परिवहन निगम, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग, औद्योगिक इकाइयां। इनकी मॉनीटरिंग जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को करनी है।

प्रदूषण रोकने के इंतजाम में कानपुर फिसड्डी
प्रदूषण रोकने को लेकर किए जाने वाले कार्यों पर जो भी बजट खर्च किया जाता है, उसमें प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में कानपुर सबसे पीछे है। शासन की ओर से एनसीएपी (नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम) के तहत 2022-23 की सितंबर तक की जारी वित्तीय प्रगति रिपोर्ट में कानपुर में अभी तक अपने कुल बजट का मात्र 64.36 प्रतिशत धन ही खर्च हो पाया है। इससे साफ है कि प्रदूषण रोकने की दिशा में जो कार्य तेजी से होने चाहिए, वे नहीं किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक खर्च करने वाले शहरों में आगरा 86.12, प्रयागराज 84.54, लखनऊ 80.47, वाराणसी 71.46 प्रतिशत है।

शिवराजपुर-घाटमपुर क्षेत्र में डीजल वाले टेंपो-टैक्सी पर प्रतिबंध
शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रदूषण की स्थिति सुधारने की कवायद शुरू हो गई है। बुधवार को संभागीय परिवहन प्राधिकरण की ओर से जिले के ग्रामीण क्षेत्र शिवराजपुर व घाटमपुर क्षेत्र में डीजल वाले टेंपो-टैक्सी के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला पिछले दिनों शासन की ओर से जारी किए गए आदेश के तहत लिया गया है। आदेश में बताया गया है कि इन क्षेत्र में चलने वाले जिन वाहनों की आयु सीमा 31 दिसंबर तक खत्म हो रही है, उनकी जगह वे सभी लोग 60 दिन के अंदर ई-रिक्शा व सीएनजी से चलने वाले वाहनों का परमिट ले सकते हैं। इसके लिए प्रार्थना पत्र सर्वोदय नगर स्थित संभागीय परिवहन अधिकारी के यहां से ले सकते हैं। शहरी क्षेत्रों में टैंपो-टैक्सी के लिए पहले से ही सीएनजी अनिवार्य है।

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