{"_id":"5caa5abcbdec22143b6f1a0a","slug":"15546682971635-akbarpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"35 लाख खर्च फिर भी मर रहे मवेशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
35 लाख खर्च फिर भी मर रहे मवेशी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर देहात। जिले में खोले गए 32 आश्रय स्थलों और 5 कांजी हाउस में छुट्टा मवेशियों के लिए छाया, चारे और पानी समेत अन्य सुविधाओं के लिए प्रशासन 35 लाख रुपये खर्च कर चुका है। समाजसेवियों ने भी चारे समेत नगद सहायता की इसके बावजूद मवेशी भूख और प्यास से मर रहे हैं। ज्यादातर आश्रय स्थलों में मवेशियों के लिए छाया तक की व्यवस्था नहीं है। मजदूरों का भुगतान भी लटका है। सरकार और दान में मिला पैसा कहां खर्च हुआ, इसका हिसाब जिला प्रशासन के पास नहीं है।
डीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि गो आश्रय स्थलों को जनवरी से अब तक 35 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। रुपया मांग के आधार पर दिया जाता है। एसडीएम खातों खर्च की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अगर कहीं गड़बड़ी हो रही है तो इसके लिए एसडीएम जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बताया कि असालतगंज में 11 मवेशियों के मरने की जांच एडीएम से कराई जा रही है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। आश्रय स्थल में बंद मवेशियों की नियमित जांच और इलाज की जिम्मेदारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की है। वह अपने स्तर पर मवेशियों की जांच के लिए डॉक्टरों की ड्यूटी लगाएं।
सिल्हौला गांव के प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। एसडीएम सिकंदरा रमेशचन्द्र यादव ने बताया कि प्रधान कमजीत ने आश्रय स्थल में बंद मवेशियों के लिए छाया, पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। मवेशियों को आश्रय स्थल से भगा दिया। इस लापरवाही पर लेखपाल ने प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
विज्ञापन
सरवनखेड़ा ब्लाक के बिलसरायां गांव बने बंद 150 मवेशियों के लिए छाया के लिए छप्पर रख गया है। मवेशियों को पीने के लिए कर्मचारी हैंडपंप से टैंक में पानी भर देते हैं। एक दो दिन में पानी का टैंकर भी मंगवाया जाता है। रविवार को एसडीएम अकबरपुर आनंद कुमार सिंह ने आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। उन्हें एक गाय बीमार मिली। उसके बछड़े को बोतल में भरकर दूध पिलाया। उन्होंने कर्मचारियों की आश्रय स्थल की ठीक से साफ सफाई करने के निर्देश भी दिए। विसायकपुर के कांजी हाउस में एक भी मवेशी नहीं था।
राजपुर ब्लाक क्षेत्र के गांव सिल्हौला बुजुर्ग में ढाई लाख की लागत से दो बीघे में आश्रय स्थल बनाया गया है। इसमें 10 गाय और 5 बछड़े बंद हैं। मवेशियों के लिए छाया की कोई व्यवस्था नहीं है। दोपहर में तेज धूप में मवेशी बिलबिलाते रहते हैं। चार गाय बीमार पड़ीं थीं। आश्रय स्थल में भूसा रखा था और पानी की भी व्यवस्था थी। देखरेख के लिए एक कर्मचारी भी लगाया गया है। प्रधान कमलजीत ने बताया कि बीमार गायों का उपचार कराया जा रहा है।
बुधेड़ा डेरा के आश्रय स्थल बंद 27 मवेशियों को लाही का सूखा भूसा खिलाया जा रहा है। आश्रय स्थल में लाही के भूसे का ढेर लगा था। सर्दी में डाला गया तिरपाल अब पूरी तरह फट चुका है। छाया न होने से धूप में मवेशी बेहाल होते हैं। मवेशियों को चरने के लिए आसपास के लाही की फसल कटने से खाली हुए खेतों में छोड़ दिया जाता है। यहां फरवरी में सर्दी लगने से पांच मवेशियों की मौत हो गई थी। तहसीलदार संजय कुमार कुशवाहा ने प्रधान को छाया की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। जसापुर आश्रय स्थल में बंद 17 मवेशियों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। रविवार को टीकाकरण पहुंचे डा. अनिल कुमार ने बताया कि पानी की कमी से मवेशियों को लू लगने का खतरा है। असवी आश्रय स्थल के मवेशियों को तालाब का गंदा पानी पिलाया जा रहा है। चार लाख की लागत से बने धरमपुर में आश्रय स्थल अभी चालू नहीं हुआ ह्रै।
नगर पालिका के आश्रय स्थल में 73, औरंगाबाद झड़ा में 90 मवेशी और जलिहापुर में 85 मवेशी बंद हैं। इन आश्रय स्थलों में चारा और पानी की व्यवस्था ठीक मिली। तीनों की आश्रय स्थल में सबमर्सिबल पंप लगे हैं। मवेशियों को लाही और गेहूं का भूसा मिलाकर खिलाया जा रहा है। मवेशियों के लिए छाया की भी पर्याप्त व्यवस्था मिली।
35 लाख खर्च फिर भी मर रहे मवेशी
फोटो संख्या-07 एकेबीपी-17 असालतगंज के गो आश्रय स्थल में टीन शेड का निर्माण कराते एसडीएम
फोटो संख्या-07 एकेबीपी-18 असालतगंज आश्रय स्थल में धूप में बैठे बेहाल गोवंश
विज्ञापन
डीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि गो आश्रय स्थलों को जनवरी से अब तक 35 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। रुपया मांग के आधार पर दिया जाता है। एसडीएम खातों खर्च की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अगर कहीं गड़बड़ी हो रही है तो इसके लिए एसडीएम जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बताया कि असालतगंज में 11 मवेशियों के मरने की जांच एडीएम से कराई जा रही है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। आश्रय स्थल में बंद मवेशियों की नियमित जांच और इलाज की जिम्मेदारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की है। वह अपने स्तर पर मवेशियों की जांच के लिए डॉक्टरों की ड्यूटी लगाएं।
विज्ञापन
सिल्हौला गांव के प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। एसडीएम सिकंदरा रमेशचन्द्र यादव ने बताया कि प्रधान कमजीत ने आश्रय स्थल में बंद मवेशियों के लिए छाया, पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। मवेशियों को आश्रय स्थल से भगा दिया। इस लापरवाही पर लेखपाल ने प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
विज्ञापन
सरवनखेड़ा ब्लाक के बिलसरायां गांव बने बंद 150 मवेशियों के लिए छाया के लिए छप्पर रख गया है। मवेशियों को पीने के लिए कर्मचारी हैंडपंप से टैंक में पानी भर देते हैं। एक दो दिन में पानी का टैंकर भी मंगवाया जाता है। रविवार को एसडीएम अकबरपुर आनंद कुमार सिंह ने आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। उन्हें एक गाय बीमार मिली। उसके बछड़े को बोतल में भरकर दूध पिलाया। उन्होंने कर्मचारियों की आश्रय स्थल की ठीक से साफ सफाई करने के निर्देश भी दिए। विसायकपुर के कांजी हाउस में एक भी मवेशी नहीं था।
राजपुर ब्लाक क्षेत्र के गांव सिल्हौला बुजुर्ग में ढाई लाख की लागत से दो बीघे में आश्रय स्थल बनाया गया है। इसमें 10 गाय और 5 बछड़े बंद हैं। मवेशियों के लिए छाया की कोई व्यवस्था नहीं है। दोपहर में तेज धूप में मवेशी बिलबिलाते रहते हैं। चार गाय बीमार पड़ीं थीं। आश्रय स्थल में भूसा रखा था और पानी की भी व्यवस्था थी। देखरेख के लिए एक कर्मचारी भी लगाया गया है। प्रधान कमलजीत ने बताया कि बीमार गायों का उपचार कराया जा रहा है।
बुधेड़ा डेरा के आश्रय स्थल बंद 27 मवेशियों को लाही का सूखा भूसा खिलाया जा रहा है। आश्रय स्थल में लाही के भूसे का ढेर लगा था। सर्दी में डाला गया तिरपाल अब पूरी तरह फट चुका है। छाया न होने से धूप में मवेशी बेहाल होते हैं। मवेशियों को चरने के लिए आसपास के लाही की फसल कटने से खाली हुए खेतों में छोड़ दिया जाता है। यहां फरवरी में सर्दी लगने से पांच मवेशियों की मौत हो गई थी। तहसीलदार संजय कुमार कुशवाहा ने प्रधान को छाया की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। जसापुर आश्रय स्थल में बंद 17 मवेशियों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। रविवार को टीकाकरण पहुंचे डा. अनिल कुमार ने बताया कि पानी की कमी से मवेशियों को लू लगने का खतरा है। असवी आश्रय स्थल के मवेशियों को तालाब का गंदा पानी पिलाया जा रहा है। चार लाख की लागत से बने धरमपुर में आश्रय स्थल अभी चालू नहीं हुआ ह्रै।
नगर पालिका के आश्रय स्थल में 73, औरंगाबाद झड़ा में 90 मवेशी और जलिहापुर में 85 मवेशी बंद हैं। इन आश्रय स्थलों में चारा और पानी की व्यवस्था ठीक मिली। तीनों की आश्रय स्थल में सबमर्सिबल पंप लगे हैं। मवेशियों को लाही और गेहूं का भूसा मिलाकर खिलाया जा रहा है। मवेशियों के लिए छाया की भी पर्याप्त व्यवस्था मिली।
35 लाख खर्च फिर भी मर रहे मवेशी
फोटो संख्या-07 एकेबीपी-17 असालतगंज के गो आश्रय स्थल में टीन शेड का निर्माण कराते एसडीएम
फोटो संख्या-07 एकेबीपी-18 असालतगंज आश्रय स्थल में धूप में बैठे बेहाल गोवंश