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Kanpur News: पीएफ खाता खुला नहीं पर वेतन से 12 फीसदी की कटौती
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कानपुर। नगर निगम के खिलाफ आ रहीं भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच तेज हो गई है। आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती में धांधली और कमीशनबाजी की जांच के लिए गुरुवार को जेटीएन कंपनी के अधिकारी और डोर टू डोर सफाई कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारी पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुंचे। यहां जांच अधिकारी के सामने एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आरोपों की झड़ी लगा दी तो कंपनी के अधिकारी उनकी बातों का जवाब न दे सके। आउटसोर्स कर्मियों ने आरोप लगाया कि बिना पीएफ खाता खोले वेतन से 12 फीसदी की कटौती की जा रही है।
बीते सप्ताह नगर निगम के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों में आउटसोर्स भर्ती में भी कमीशन और अनियमितता की शिकायत मिली थी। शिकायत में बताया गया था कि आउटसोर्स कर्मियों को कम वेतन देकर अधिक काम कराया जाता है। उनके पीएफ में घपला किया जा रहा है। इसके अलावा किसी तरह सुरक्षा भी नहीं दी जाती है। यह सब कमीशनबाजी के चलते किया जा रहा है। इसी शिकायत की जांच की कड़ी में गुरुवार को बयान देने के लिए कंपनी और आउटसोर्स कर्मियों को सीपी कार्यालय बुलाया गया था।
एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सिंह और महामंत्री ने जांच अधिकारी को बताया कि करीब 400 कर्मचारी डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम करते हैं। इसमें हेल्पर को सात हजार और गाड़ी के ड्राइवर को आठ हजार रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। यह वेतन दूसरे आउटसोर्स कर्मियों और यहां तक की मजदूरों की मासिक दिहाड़ी से भी कम है। इसके अलावा वेतन का 12 फीसदी पैसा पीएफ के नाम पर भी काटा जाता है लेकिन पीएफ खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचता है।
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कुछ कर्मचारियों के तो पीएफ खाते ही नहीं हैं तो कुछ के खाते में साल में सिर्फ एक बार ही पीएफ की रकम भेजकर घालमेल किया जा रहा है। इसके अलावा कर्मियों की भर्ती भी बिना कमीशन तय किए नहीं की जाती है। आउटसोर्स कंपनी जेटीएन के एडमिन धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कर्मियों से आठ घंटे काम भी नहीं लिया जाता है। इस कारण उनका वेतन कम है। रही बात पीएफ व अन्य शिकायतों की तो कंपनी के नियमों के अनुसार ही सारी कार्रवाई की जाती है। जांच अधिकारी एवं स्टाफ अफसर योगेश कुमार का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद अब रिपोर्ट एसआईटी को भेजी जाएगी। आगे की कार्रवाई एसआईटी अपने स्तर से करेगी।
पुलिस के पास पांच और शिकायतें पहुंचीं
जब से नगर निगम की परतें उधेड़ने का सिलसिला शुरू हुआ, तब से पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। गुरुवार को भी पुलिस के पास रजिस्ट्री के माध्यम से पांच और शिकायतें मिली हैं। जांच अधिकारियों ने बताया कि कुछ शिकायतकर्ताओं ने अपना नाम भी नहीं लिखा है। उसे भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। शिकायतें लेखा, मार्ग प्रकाश व सफाई आदि विभागों से संबंधित हैं।
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बीते सप्ताह नगर निगम के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों में आउटसोर्स भर्ती में भी कमीशन और अनियमितता की शिकायत मिली थी। शिकायत में बताया गया था कि आउटसोर्स कर्मियों को कम वेतन देकर अधिक काम कराया जाता है। उनके पीएफ में घपला किया जा रहा है। इसके अलावा किसी तरह सुरक्षा भी नहीं दी जाती है। यह सब कमीशनबाजी के चलते किया जा रहा है। इसी शिकायत की जांच की कड़ी में गुरुवार को बयान देने के लिए कंपनी और आउटसोर्स कर्मियों को सीपी कार्यालय बुलाया गया था।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सिंह और महामंत्री ने जांच अधिकारी को बताया कि करीब 400 कर्मचारी डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम करते हैं। इसमें हेल्पर को सात हजार और गाड़ी के ड्राइवर को आठ हजार रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। यह वेतन दूसरे आउटसोर्स कर्मियों और यहां तक की मजदूरों की मासिक दिहाड़ी से भी कम है। इसके अलावा वेतन का 12 फीसदी पैसा पीएफ के नाम पर भी काटा जाता है लेकिन पीएफ खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचता है।
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कुछ कर्मचारियों के तो पीएफ खाते ही नहीं हैं तो कुछ के खाते में साल में सिर्फ एक बार ही पीएफ की रकम भेजकर घालमेल किया जा रहा है। इसके अलावा कर्मियों की भर्ती भी बिना कमीशन तय किए नहीं की जाती है। आउटसोर्स कंपनी जेटीएन के एडमिन धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कर्मियों से आठ घंटे काम भी नहीं लिया जाता है। इस कारण उनका वेतन कम है। रही बात पीएफ व अन्य शिकायतों की तो कंपनी के नियमों के अनुसार ही सारी कार्रवाई की जाती है। जांच अधिकारी एवं स्टाफ अफसर योगेश कुमार का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद अब रिपोर्ट एसआईटी को भेजी जाएगी। आगे की कार्रवाई एसआईटी अपने स्तर से करेगी।
पुलिस के पास पांच और शिकायतें पहुंचीं
जब से नगर निगम की परतें उधेड़ने का सिलसिला शुरू हुआ, तब से पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। गुरुवार को भी पुलिस के पास रजिस्ट्री के माध्यम से पांच और शिकायतें मिली हैं। जांच अधिकारियों ने बताया कि कुछ शिकायतकर्ताओं ने अपना नाम भी नहीं लिखा है। उसे भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। शिकायतें लेखा, मार्ग प्रकाश व सफाई आदि विभागों से संबंधित हैं।