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11 हजार लोगों को मिलेगा बकाया पीएफ
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 23 Feb 2015 03:17 AM IST
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बंद पड़ी कताई मिलों के करीब 11 हजार मजदूर-अफसरों को उनके बकाए भविष्य निधि का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए 125 करोड़ रुपये की जरूरत है, जो मिलों की संपत्ति बेचकर जमा किए गए हैं। इटावा, सीतापुर की मिलों की संपत्ति बेचकर कई करोड़ रुपये सरकार के पास आ गए हैं।
जल्द ही भुगतान प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। कानपुर में मिलों का मुख्यालय है। प्रदेश में कुल 11 मिलें हैं। जो वर्ष 2000 से बंद हैं। पांच मिलों को फिर से चलाने की भी योजना बनाई गई है।
उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिलें 1983-84 में प्रदेश के अमरोहा, बरेली, बहेड़ी, सीतापुर, मऊआइमा, इटावा, फतेहपुर, मगहर, महमूदाबाद, संत कबीर नगर, भदोही में खोली गई थी। कानपुर सहित प्रदेश के तमाम हिस्सों की सूती मिलों के बंद होने के बाद से यह मिलें भी एक-एक करके वर्ष 2000 में बंद कर दी गई।
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मिल बंद होने से मजदूरों-अफसरों का भविष्य निधि जमा बंद हो गया था। क्षेत्रीय भविष्य निधि संगठन के वरिष्ठ रिकवरी अफसर एके शुक्ला ने बताया पीएफ भुगतान के लिए हाल ही में भविष्य निधि संगठन, कमिश्नर और मिल के अफसरों के साथ बैठक हुई थी।
जिसमें विभाग की ओर से बताया गया था कि मजदूरों-अफसरों का करीब 125 करोड़ का बकाया है। 70 करोड़ पीएफ और शेष राशि ब्याज की है। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान कताई मिल अफसरों की ओर से बताया गया कि सरकार ने इटावा और सीतापुर मिलों की संपत्ति बेचकर रकम जुटाई गई है।
इस रकम का इस्तेमाल बकाया पीएफ भुगतान में किया जाएगा। कताई मिल फतेहपुर के जीएम वीके मिश्रा ने बताया कि जल्द ही बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। सभी मिलों के कर्मचारियों को कुछ-कुछ रुपया दिया जाए या फिर किसी एक मिल के सभी श्रमिकों को बकाया भुगतान किया जाए। इस पर निर्णय किया जाना है।
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जल्द ही भुगतान प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। कानपुर में मिलों का मुख्यालय है। प्रदेश में कुल 11 मिलें हैं। जो वर्ष 2000 से बंद हैं। पांच मिलों को फिर से चलाने की भी योजना बनाई गई है।
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उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिलें 1983-84 में प्रदेश के अमरोहा, बरेली, बहेड़ी, सीतापुर, मऊआइमा, इटावा, फतेहपुर, मगहर, महमूदाबाद, संत कबीर नगर, भदोही में खोली गई थी। कानपुर सहित प्रदेश के तमाम हिस्सों की सूती मिलों के बंद होने के बाद से यह मिलें भी एक-एक करके वर्ष 2000 में बंद कर दी गई।
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मिल बंद होने से मजदूरों-अफसरों का भविष्य निधि जमा बंद हो गया था। क्षेत्रीय भविष्य निधि संगठन के वरिष्ठ रिकवरी अफसर एके शुक्ला ने बताया पीएफ भुगतान के लिए हाल ही में भविष्य निधि संगठन, कमिश्नर और मिल के अफसरों के साथ बैठक हुई थी।
जिसमें विभाग की ओर से बताया गया था कि मजदूरों-अफसरों का करीब 125 करोड़ का बकाया है। 70 करोड़ पीएफ और शेष राशि ब्याज की है। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान कताई मिल अफसरों की ओर से बताया गया कि सरकार ने इटावा और सीतापुर मिलों की संपत्ति बेचकर रकम जुटाई गई है।
इस रकम का इस्तेमाल बकाया पीएफ भुगतान में किया जाएगा। कताई मिल फतेहपुर के जीएम वीके मिश्रा ने बताया कि जल्द ही बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। सभी मिलों के कर्मचारियों को कुछ-कुछ रुपया दिया जाए या फिर किसी एक मिल के सभी श्रमिकों को बकाया भुगतान किया जाए। इस पर निर्णय किया जाना है।