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Kannauj News: बारिश के बाद निगम मंडी में जलभराव
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छिबरामऊ। जल निकासी का रास्ता बंद होने से निगम मंडी परिसर में जलभराव हो गया है। बारिश के चलते आढ़तों पर रखे आलू के पैकेट पानी में डूब गई है। जिससे व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुुआ है।
निगम मंडी परिसर में जल निकासी के लिए जीटी रोड के किनारे नाला बना था। बारिश होने पर इससे परिसर का पानी निकल जाता था। जीटी रोड चौड़ीकरण के दौरान नाला बंद हो गया और सड़क करीब दो से ढाई फीट ऊंची हो गई लेकिन यहां जल निकासी का इंतजाम नहीं कराया गया। बारिश व ओलावृष्टि से निगम मंडी में पानी भर गया।
आढ़तों पर रखे आलू व सरसों के हजारों पैकेट भीग गए। व्यापारियों ने इसे बचाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इससे व्यापारियों में काफी नाराजगी है। गल्ला आलू व्यापारी संघ के अध्यक्ष पीयूष गुप्ता ने बताया कि अधिकारियों से जल निकासी का इंतजाम कराने कराने की मांग की गई थी लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बारिश में आलू व खाद्यान्न भींगने से लाखों रुपये का नुकसान हो गया है।
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प्रभारी मंडी सचिव श्रवण कुमार परमार ने बताया कि नेशनल हाईवे ने मंडी से ढाई फीट ऊंचा नाला बनाया है। जिसके कारण जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। जेसीबी लगाकर गढ्ढा खुदवाकर पानी की निकासी की व्यवस्था कराई जा रही है। जल निकासी के स्थायी समाधान के लिए मंडी में एक तालाब का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। प्रस्ताव मंजूरी के बाद तालाब बनने के बाद ही इसका स्थायी समाधान हो पाएगा। फिलहाल बंद नालियों की सफाई कराई जा रही है।
मंडी में व्यापार करने वाले दिनेश यादव, शिव कुमार गुप्ता, राजू, दुर्गा, भूदेव, महावीर, प्रमोद व कैलाश मुनीम समेत कई व्यापारियों के अलावा मंडी में आए किसानों का हजारों पैकेट आलू डूब गया है। जिन किसानों की फसल बिक गई है, उसमें तो नुकसान व्यापारी का होगा लेकिन जिसकी फसल नहीं बिक पाई, उसमें नुकसान किसानों का ही होगा। गल्ला आलू व्यापारी संघ के अध्यक्ष पीयूष गुप्ता ने जिलाधिकारी से व्यापारियों व किसानों की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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निगम मंडी परिसर में जल निकासी के लिए जीटी रोड के किनारे नाला बना था। बारिश होने पर इससे परिसर का पानी निकल जाता था। जीटी रोड चौड़ीकरण के दौरान नाला बंद हो गया और सड़क करीब दो से ढाई फीट ऊंची हो गई लेकिन यहां जल निकासी का इंतजाम नहीं कराया गया। बारिश व ओलावृष्टि से निगम मंडी में पानी भर गया।
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आढ़तों पर रखे आलू व सरसों के हजारों पैकेट भीग गए। व्यापारियों ने इसे बचाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इससे व्यापारियों में काफी नाराजगी है। गल्ला आलू व्यापारी संघ के अध्यक्ष पीयूष गुप्ता ने बताया कि अधिकारियों से जल निकासी का इंतजाम कराने कराने की मांग की गई थी लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बारिश में आलू व खाद्यान्न भींगने से लाखों रुपये का नुकसान हो गया है।
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प्रभारी मंडी सचिव श्रवण कुमार परमार ने बताया कि नेशनल हाईवे ने मंडी से ढाई फीट ऊंचा नाला बनाया है। जिसके कारण जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। जेसीबी लगाकर गढ्ढा खुदवाकर पानी की निकासी की व्यवस्था कराई जा रही है। जल निकासी के स्थायी समाधान के लिए मंडी में एक तालाब का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। प्रस्ताव मंजूरी के बाद तालाब बनने के बाद ही इसका स्थायी समाधान हो पाएगा। फिलहाल बंद नालियों की सफाई कराई जा रही है।
मंडी में व्यापार करने वाले दिनेश यादव, शिव कुमार गुप्ता, राजू, दुर्गा, भूदेव, महावीर, प्रमोद व कैलाश मुनीम समेत कई व्यापारियों के अलावा मंडी में आए किसानों का हजारों पैकेट आलू डूब गया है। जिन किसानों की फसल बिक गई है, उसमें तो नुकसान व्यापारी का होगा लेकिन जिसकी फसल नहीं बिक पाई, उसमें नुकसान किसानों का ही होगा। गल्ला आलू व्यापारी संघ के अध्यक्ष पीयूष गुप्ता ने जिलाधिकारी से व्यापारियों व किसानों की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की है।