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यूरिया, डीएपी का टोटा, समितियों में लटके ताले
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तालग्राम साधन सहकारी समिति पर बचीं यूरिया की दो बोरी ले जाता किसान।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। जिले में डीएपी और यूरिया खाद का टोटा है। साधन सहकारी समितियों की गोदामों में स्टाक खत्म हो गया है। ज्यादातर समितियों में ताले लटक गए हैं। खाद की आस में दिनभर चक्कर काटने के बाद यहां से किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इससे निजी दुकानों पर कालाबाजारी शुरू हो गई है। किसानों का कहना है कि जल्द यूरिया और डीएपी नहीं मिली तो आलू और सरसों की फसल चौपट हो जाएगी।
तकरीबन एक लाख 30 हजार किसान 50 हजार 250 हेक्टेयर में आलू की बुआई करते हैं। हर साल करीब 12 लाख छह हजार मीट्रिक टन पैदावार होती है। इस बार बारिश के चलते अगेती बुआई नहीं हो सकी। अब बुआई ने जोर पकड़ा है। इससे यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ गई है। यह दोनों खाद इन्हें समितियों में नहीं मिल पा रही हैं।
शासन ने इस बार जिले में डीएपी का 26 हजार मीट्रिक टन आवंटन का लक्ष्य रखा है। अक्तूबर तक महज आठ हजार मीट्रिक टन यूरिया की रैक आई है। यूरिया का 18 हजार 168 मीट्रिक टन लक्ष्य दिया गया है। इसमें अभी तक सिर्फ 451 मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई है। बेहद कम आपूर्ति से एक सप्ताह में 48 साधन सहकारी समितियों में डीएपी और यूरिया का स्टाक खत्म हो गया। इससे सचिवों ने सहकारी समितियों और गोदामों में ताले लगा दिए। ऐसे में निजी दुकानदार निर्धारित दाम से 200 से 300 रुपये अधिक लेकर डीएपी और यूरिया दे रहे हैं। इससे किसानों में आक्रोश है।
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जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार का कहना है कि शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द पर्याप्त खाद मिल जाएगी। ओवररेट पर बिक्री करने वाले दुकानदारों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। किसानों को चाहिए कि वह डीएपी और यूरिया की बजाय एनपीके खाद का प्रयोग करें। यह खाद आसानी से उपलब्ध है। बोरी पर लिखे अधिकतम मूल्य से कोई ज्यादा लेता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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तकरीबन एक लाख 30 हजार किसान 50 हजार 250 हेक्टेयर में आलू की बुआई करते हैं। हर साल करीब 12 लाख छह हजार मीट्रिक टन पैदावार होती है। इस बार बारिश के चलते अगेती बुआई नहीं हो सकी। अब बुआई ने जोर पकड़ा है। इससे यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ गई है। यह दोनों खाद इन्हें समितियों में नहीं मिल पा रही हैं।
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शासन ने इस बार जिले में डीएपी का 26 हजार मीट्रिक टन आवंटन का लक्ष्य रखा है। अक्तूबर तक महज आठ हजार मीट्रिक टन यूरिया की रैक आई है। यूरिया का 18 हजार 168 मीट्रिक टन लक्ष्य दिया गया है। इसमें अभी तक सिर्फ 451 मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई है। बेहद कम आपूर्ति से एक सप्ताह में 48 साधन सहकारी समितियों में डीएपी और यूरिया का स्टाक खत्म हो गया। इससे सचिवों ने सहकारी समितियों और गोदामों में ताले लगा दिए। ऐसे में निजी दुकानदार निर्धारित दाम से 200 से 300 रुपये अधिक लेकर डीएपी और यूरिया दे रहे हैं। इससे किसानों में आक्रोश है।
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जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार का कहना है कि शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द पर्याप्त खाद मिल जाएगी। ओवररेट पर बिक्री करने वाले दुकानदारों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। किसानों को चाहिए कि वह डीएपी और यूरिया की बजाय एनपीके खाद का प्रयोग करें। यह खाद आसानी से उपलब्ध है। बोरी पर लिखे अधिकतम मूल्य से कोई ज्यादा लेता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।