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समय ने बदले दिवाली के रंग

Sun, 08 Nov 2015 11:49 PM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Sun, 08 Nov 2015 11:49 PM IST
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Time to Change the color of Diwali

मिट्टी के डिजाइनर दीये थोड़े महंगे हैं, इसके बावजूद

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इन पर फिदा होने वाले ग्राहक कम नहीं हैं। शनिवार को इस त्योहार पर यह दीये बिकने के लिए बाजार में पहुंचे तो ग्राहकों ने इन्हें हाथों-हाथ लिया। बिना घी बत्ती के रेडीमेड डिजाइनर दीये सभी को लुभा रहे हैं। लाल मिट्टी से बने यह दीये बेहद आकर्षक हैं।

गणेश, कमल, आम, सूरज, शंख, नाव, स्वास्तिक, चौमुखा दीयों की इस बार खासी मांग है। गणेश दीया 500 रुपये सैकड़ा की दर से बिक रहे हैं। बाकी दीयों का रेट 200 से 250 रुपये सैकड़ा है। छोटे वाले चार दीयों की कीमत 20 रुपये है। इनमें बत्ती व मोम मौजूद है। इन्हें केवल जलाना भर है। बड़ा दीया 10 रुपये का एक है।

इसमें भी घी, बत्ती की जरूरत नहीं है। मिट्टी के सामान्य दीयों की कीमत इस बार 60 से 80 रुपये सैकड़ा है। यह सामान्य वर्ग की पसंद है। अवधेश प्रजापति व उनके बेटे अश्वनी कुमार का कहना है कि यह दीये फीरोजाबाद से लाए गए हैं जिनकी जबरदस्त मांग है। पांच साल पहले बाजार में बेचने पहली बार लाए थे।

तब से ग्राहक इनके मुरीद हो चले हैं। उधर, नगर में मंडी समिति के पास गोपालनगर में अवधेश प्रजापति ने मिट्टी के डिजाइनर गिलास व दीये बनाने का कारखाना लगा रखा है। उनका कहना है कि मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए चिकनी मिट्टी आसानी से नहीं मिलती।

लाल रंग के कलात्मक डिजाइनर दीये तैयार करने के लिए राजस्थान से लाल मिट्टी मंगवानी पड़ती है। यह काफी महंगी पड़ती है। उनके चाचा ने फीरोजाबाद में काफी बड़ा कारखाना लगा रखा है। उनके यहां बना माल विदेशों तक जाता है। दीपावली के मौके पर वह डिजाइनर दीये वहां से भी लाकर यहां के बाजार में बेचते हैं।

यहां सबसे बड़ी समस्या बिजली की अंधाधुंध कटौती की है। कहने को तो सांसद डिंपल यादव के इस क्षेत्र में 24 घंटे बिजली देने के आदेश हैं, पर शहर के फीडर नंबर दो से जुड़े इस गोपालनगर क्षेत्र में आए दिन बिजली घंटों गुल रहती है। इसके कारण मशीनें नहीं चल पातीं। जनरेटर से मशीनें चलाना काफी महंगा पड़ता है।

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