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सेंटा क्लाज ने बांटे बच्चों को उपहार

Thu, 24 Dec 2015 11:29 PM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Thu, 24 Dec 2015 11:29 PM IST
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Santa Claus distributed gifts to children who

सिटी चिल्ड्रेंस एकेडमी में आयोजित क्रिसमस पर्व के

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दौरान जिंगल बेल की धुन के बीच बच्चों ने तालियां बजाकर सेंटाक्लाज का स्वागत किया। वहीं गांव लालकपुर के पास जिले का एक मात्र कैथोलिक चर्च में क्रिसमस की तैयारियां देर रात तक चलती रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ टीचर जितेंद्र नायक ने भजन मन का दीप जला...सुनाकर किया। इसके बाद मेरा प्रभु सबसे प्यारा है गीत पर बच्चों ने सामूहिक नृत्य पेश कर मन मोह लिया। सेंटाक्लाज बने बच्चों ने इसी बीच आकर उपहार बांटना शुरू कर दिया। प्रधानाचार्य जिम थामस ने कहा कि प्रभु यीशु ने दुनिया भर को शांति का संदेश दिया है।

उनके बताए रास्ते पर चलकर ही विश्व शांति स्थापित की जा सकती है। एकेडमी के निदेशक प्रदीप प्रधान ने कहा कि प्रभु यीशु ने समाज को नई दिशा देने का काम किया है। बृजेश दीक्षित ने भी यीशु के जीवन पर प्रकाश डाला।  प्रदीप तिवारी एवं रमई दुबे के संगीत संयोजन में हुए रंगारंग कार्यक्रम में दीपशंकर, टोजो मैथ्यू, कुंजुमोल टोजो, जया शेफर्ड, पवित्रा नायक, अक्षया नायर, श्रीजीत व श्याम लाल गुप्ता आदि मौजूद थे।

उधर, सौरिख रोड स्थित लालकपुर के पास जिले का एक मात्र कैथोलिक चर्च में क्रिसमस की तैयारियां देर रात तक चलती रहीं। चर्च में प्रभु यीशु के जन्म की झांकी समेत रंग बिरंगी बिजली की झालरें भी सजाई गई हैं। चर्च के फादर विंसन के निर्देशन में सिस्टर रिजी, सिस्टर एलिसा, सिस्टर रानी आदि ने सजावट को अंतिम रूप दिया।

क्रिसमस ट्री को रंग बिरंगी झालरों से सजाया गया। विंसन ने बताया कि गुरुवार को रात साढ़े 11 बजे से एक बजे तक विशेष प्रार्थना सभा होगी। इसके बाद 25 दिसंबर को सुबह सात बजे से प्रार्थना सभा होगी और फिर क्रिसमस के जश्न के साथ मुलाकातों का सिलसिला शुरू होगा।

उधर, बच्चों ने 25 दिसंबर को विश-डे के रूप में मनाया। बच्चों ने अपनी मुराद पूरी करने के लिए यीशु से गुजारिश की। उनकी इस मुराद में बड़ों ने भी समर्थन किया। इच्छा पत्र पर बड़ों के दस्तखत लेने के लिए बच्चे दिनभर गलियों में धमाचौकड़ी करते रहे। बच्चों ने कागज पर अपनी विश लिखी।

इसके बाद लोगों से उनके दस्तखत करवाए। इनका लक्ष्य 108 लोगों से दस्तखत का रहा। मुराद पूरी करने में बड़ों का समर्थन और आशीर्वाद दोनों को शामिल करना बच्चों का मकसद था। 108 दस्तखतों में से अंतिम में अपना नाम लिखा गया। बच्चों की मुराद में केवल अपनी और अपने परिजनों की तरक्की ही नहीं शहर की समस्याएं भी थीं। कई बच्चों के मन में शहर की और बेहतर तस्वीर का भी खाका था। विश-डे में शहर की सभी कौम के बच्चे शामिल थे।

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